Cyber Security Framework Uttarakhand: Uttarakhand government officials discussing cyber security framework and digital infrastructure protection after Operation Sindoor
Cyber Security Framework: Cyber Security Framework को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अब बड़ा और निर्णायक कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राज्य में दो लाख से अधिक साइबर हमलों के प्रयास सामने आने के बाद सरकार ने महसूस किया कि डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को और मजबूत बनाना आवश्यक है।
राज्य सरकार अब सभी विभागों के लिए एक केंद्रीकृत Cyber Security Framework विकसित करने जा रही है, ताकि सरकारी डेटा, नेटवर्क, सर्वर और डिजिटल प्रणालियों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखा जा सके। इस पूरे सुरक्षा तंत्र का संचालन सूचना प्रौद्योगिकी विकास अभिकरण (आईटीडीए) के नेतृत्व में किया जाएगा।
दो लाख साइबर हमलों ने सरकार को किया सतर्क
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आए साइबर हमलों के प्रयासों ने यह संकेत दिया कि सरकारी डिजिटल नेटवर्क लगातार हैकरों और साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। इसी वजह से राज्य सरकार ने साइबर सुरक्षा की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर खतरों की गंभीरता भी बढ़ रही है। ऐसे में मजबूत Cyber Security Framework केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
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राज्य स्तरीय कार्यशाला में हुआ मंथन
सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की। यह कार्यशाला भारत सरकार की राष्ट्रीय परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा थी, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्राप्त अनुभवों और उभरे साइबर खतरों के आधार पर तैयार किया गया है।
बैठक में यह सहमति बनी कि राज्य के लिए एक मजबूत और एकीकृत Cyber Security Framework तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
विभागों में सामने आईं कई बड़ी कमजोरियां
कार्यशाला के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई सरकारी विभाग नियमित आईटी सुरक्षा ऑडिट नहीं करा रहे हैं। इसके अलावा अनेक विभागों का महत्वपूर्ण डेटा अभी भी सेवा प्रदाताओं या उपकरण आपूर्ति करने वाली निजी कंपनियों के सर्वरों पर निर्भर है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति डेटा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। मजबूत Cyber Security Framework के अभाव में संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने या साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की कमी भी एक प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आई। कई विभागों ने अपने नेटवर्क और सर्वर प्रबंधन का कार्य निजी एजेंसियों को सौंप रखा है, जिससे निगरानी और जवाबदेही के मुद्दे भी उत्पन्न हो रहे हैं।
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आईटीडीए को मिली केंद्रीय भूमिका
सरकार ने तय किया है कि नया Cyber Security Framework आईटीडीए की अगुवाई में विकसित किया जाएगा। आईटीडीए सभी विभागों की साइबर सुरक्षा गतिविधियों का समन्वय करेगा और एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था को लागू करेगा।
आईटीडीए के उप महाप्रबंधक (साइबर सुरक्षा) आशीष उपाध्याय ने कहा कि कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम उत्तराखंड (CERT-UK) विभागों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी और साइबर खतरों से निपटने के लिए विशेषज्ञ सहयोग उपलब्ध कराएगी।
डेटा सुरक्षा और निगरानी होगी मजबूत
प्रस्तावित Cyber Security Framework के तहत सरकारी डेटा को अधिक सुरक्षित राज्य डेटा केंद्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही सभी विभागों के नेटवर्क, सर्वर, सीसीटीवी कैमरे, स्मार्ट सिटी सिस्टम और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों की निगरानी केंद्रीकृत रूप से की जाएगी।
इसके लिए एक आधुनिक सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) भी स्थापित किया जाएगा, जो चौबीसों घंटे संभावित साइबर खतरों पर नजर रखेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया देगा।
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केंद्र सरकार ने भी दिए अहम निर्देश
हाल ही में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं। विशेष रूप से राउटर, डेटा सर्वर, सीसीटीवी नेटवर्क, स्मार्ट सिटी कमांड सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
केंद्र सरकार को उन प्रणालियों को लेकर भी चिंता है, जिनका संचालन या डेटा प्रबंधन अभी तक निर्माता अथवा सप्लायर कंपनियों के नियंत्रण में है। ऐसे मामलों में मजबूत Cyber Security Framework को राष्ट्रीय स्तर पर भी प्राथमिकता दी जा रही है।
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साइबर सुरक्षा क्षमता निर्माण पर जोर
कार्यशाला में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि सम्राट किशोर ने राज्यों में साइबर सुरक्षा क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय राज्यों की डिजिटल परिसंपत्तियों और महत्वपूर्ण डेटा की सुरक्षा के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में साइबर हमले और अधिक जटिल हो सकते हैं, इसलिए राज्यों को तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षित मानवबल और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों में निवेश बढ़ाना होगा।
डिजिटल उत्तराखंड की सुरक्षा की नई तैयारी
Cyber Security Framework के लागू होने के बाद उत्तराखंड की सरकारी डिजिटल व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सक्षम हो सकेगी। नियमित साइबर सुरक्षा ऑडिट, केंद्रीकृत निगरानी, प्रशिक्षित विशेषज्ञों की तैनाती और आधुनिक सुरक्षा तंत्र के माध्यम से राज्य साइबर खतरों से प्रभावी ढंग से निपट सकेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले अनुभवों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार का यह कदम राज्य की ई-गवर्नेंस प्रणाली, संवेदनशील डेटा और डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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