Doon Valley Tree Cutting: उत्तराखंड की यमुना और दून घाटी में प्रस्तावित सड़क निर्माण परियोजना को लेकर एक बार फिर पर्यावरण बनाम विकास की बहस तेज हो गई है। Doon Valley Tree Cutting करीब सात हजार पेड़ों के कटान के प्रस्ताव पर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार समेत सभी संबंधित विभागों से तीन हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
Doon Valley Tree Cutting मामला केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा है जंगलों का भविष्य, वन्यजीवों की सुरक्षा और उन प्राकृतिक जल स्रोतों का अस्तित्व, जिन पर हजारों लोगों की आजीविका निर्भर है।
क्या है पूरा मामला?
देहरादून की समाजसेवी रेनू पाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि आशारोड़ी से झाझरा के बीच प्रस्तावित ‘गतिमान ग्रीन रोड प्रोजेक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान किया जाना है। याचिका में दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए लगभग सात हजार पेड़ काटने की तैयारी है।
Doon Valley Tree Cutting पर याचिकाकर्ता का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर कटान से पहले उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड से अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई है। साथ ही पर्यावरणीय प्रभाव का समुचित आकलन भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
READ MORE: उत्तराखंड में पहली बार राज्यव्यापी वनाग्नि मॉक ड्रिल, 41 डिवीजनों में एक साथ परखी गई तैयारियां
पर्यावरण और वन्यजीवों पर संभावित असर
यमुना और दून घाटी का इलाका जैव विविधता की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। खासकर सर्दियों में कई विदेशी प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते हैं और आसन बैराज क्षेत्र में अपना अस्थायी ठिकाना बनाते हैं।
इसके अलावा यह इलाका हाथियों का बफर जोन भी है। हाथियों की आवाजाही के प्राकृतिक रास्ते (कॉरिडोर) इन जंगलों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान न केवल उनके आवास को प्रभावित करेगा, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ा सकता है।
Doon Valley Tree Cutting पर विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई से जल स्रोतों पर भी असर पड़ता है। दून घाटी के कई प्राकृतिक झरने और जलधाराएं इन वनों पर निर्भर हैं। यदि हरियाली कम होती है, तो भूजल स्तर में गिरावट और जल संकट जैसी समस्याएं भी गहरा सकती हैं।

READ MORE: हिमाचल प्रदेश ने नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप 2026 में मारी बाजी, जीती ओवरऑल ट्रॉफी
अदालत का रुख
Doon Valley Tree Cutting पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में सभी पहलुओं पर स्पष्टता जरूरी है। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
Doon Valley Tree Cutting पर कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि क्या परियोजना के लिए सभी वैधानिक स्वीकृतियां ली गई हैं और क्या पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक उपायों पर विचार किया गया है।
READ MORE: मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी का भव्य समापन, मैदान से निकले 1.62 लाख सितारे
विकास बनाम पर्यावरण की बहस
राज्य में सड़क और आधारभूत ढांचे का विस्तार विकास के लिए आवश्यक माना जाता है। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या विकास की कीमत पर पर्यावरण से समझौता किया जा सकता है?
Doon Valley Tree Cutting पर स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यदि सड़क निर्माण जरूरी है, तो वैकल्पिक डिजाइन, कम से कम पेड़ों का कटान और व्यापक पुनर्वनीकरण योजना पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों की चिंता
दून घाटी और आसपास के गांवों में रहने वाले कई लोग भी Doon Valley Tree Cutting प्रस्ताव को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि उनके जीवन का आधार हैं। जंगलों से उन्हें स्वच्छ हवा, पानी और आजीविका मिलती है।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यदि परियोजना में पारदर्शिता और पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय स्पष्ट हों, तो समाधान निकाला जा सकता है।
READ MORE: फाइलों में नहीं, अब जमीन पर होगा काम…. हरिद्वार में मुख्य सेवक की चौपाल में गरजे सीएम धामी
आगे क्या?
Doon Valley Tree Cutting पर अब सभी संबंधित विभागों को तीन हफ्तों में अपना पक्ष रखना है। इसके बाद हाईकोर्ट अगली सुनवाई में तय करेगा कि परियोजना पर रोक लगाई जाए या कुछ शर्तों के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।
फिलहाल, यह मामला उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती को फिर से सामने लेकर आया है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला न केवल इस परियोजना, बल्कि भविष्य की कई अन्य विकास योजनाओं के लिए भी मिसाल बन सकता है।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
