Illegal Tree Cutting: रुद्रप्रयाग जिले की मदमहेश्वर घाटी में बढ़ते Illegal Tree Cutting के मामलों पर अब वन विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की विशेष टीम ने देर रात सीमांत क्षेत्रों में बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान चलाकर अवैध लकड़ी कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर करारा प्रहार किया। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में अवैध रूप से काटी गई वन संपदा बरामद की गई है। वन विभाग का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में जंगलों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब लगातार सख्त अभियान चलाए जाएंगे।
वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मदमहेश्वर घाटी के कई गांवों और जंगलों से पिछले कुछ समय से Illegal Tree Cutting की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय स्तर पर मिल रही सूचनाओं के आधार पर विभाग ने रणनीति तैयार कर विशेष टीम गठित की और रात के समय सीमांत क्षेत्रों में दबिश दी।
14 सदस्यीय टीम ने चलाया विशेष अभियान
रेंज ऊखीमठ और गुप्तकाशी के वन क्षेत्राधिकारी विमल कुमार भट्ट के नेतृत्व में 14 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई थी। टीम ने कई तोकों और जंगलों में एक साथ छापेमारी की। अभियान के दौरान चीड़ समेत अन्य प्रजातियों की करीब 300 नग कड़ी और तख्ते अलग-अलग आकार में बरामद किए गए। विभाग ने मौके से मिली लकड़ी को कब्जे में लेकर वन चौकी और मुख्यालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह बड़े पैमाने पर लकड़ी बरामद हुई है, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि क्षेत्र में Illegal Tree Cutting का संगठित नेटवर्क सक्रिय था। हालांकि छापेमारी की भनक लगते ही कई आरोपी मौके से फरार हो गए। अब विभाग उनकी पहचान करने और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
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हिमालयी जंगलों पर बढ़ता खतरा
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में जंगलों की अवैध कटाई एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती Illegal Tree Cutting न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि इससे पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई का सीधा असर जल स्रोतों, वन्यजीवों और जैव विविधता पर पड़ता है।
मदमहेश्वर घाटी जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां के जंगल कई दुर्लभ वन्यजीवों और पक्षियों का प्राकृतिक आवास हैं। ऐसे में अवैध कटान की घटनाएं पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही हैं। वन विभाग का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे नेटवर्क पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले वर्षों में इसका बड़ा नुकसान देखने को मिल सकता है।
वन विभाग ने दी सख्त चेतावनी
वन क्षेत्राधिकारी विमल कुमार भट्ट ने कहा कि जंगलों की हरियाली और वन संपदा राज्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि Illegal Tree Cutting में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वन अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि विभाग लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है। इसके लिए वन चौकियों को सक्रिय किया गया है और फील्ड स्टाफ को लगातार गश्त के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्थानीय लोगों से भी जंगलों को बचाने में सहयोग की अपील की गई है।
स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का किया स्वागत
वन विभाग की इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने भी स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से कुछ लोग जंगलों में चोरी-छिपे पेड़ों की कटाई कर रहे थे, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। लोगों ने उम्मीद जताई कि इस अभियान के बाद Illegal Tree Cutting की घटनाओं में कमी आएगी।
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि पहाड़ की जीवनरेखा हैं। जंगलों से ही जल स्रोत सुरक्षित रहते हैं और पहाड़ी क्षेत्रों का पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। ऐसे में अवैध कटान को रोकना बेहद जरूरी है।
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आगे भी जारी रहेगा अभियान
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान लगातार चलाए जाएंगे। विभाग सीमांत गांवों और संवेदनशील जंगलों में निगरानी और सख्ती बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि Illegal Tree Cutting के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
वन विभाग का यह अभियान केवल कानून व्यवस्था की कार्रवाई नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में जंगलों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
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