Mahila Swarojgar Yojana: देहरादून में मुख्यमंत्री एकल Mahila Swarojgar Yojana का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Mahila Swarojgar Yojana की शुरुआत करते हुए लाभार्थी महिलाओं के खातों में सब्सिडी की पहली किस्त डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की। पहले चरण में राज्य के 6 जिलों से चयनित 484 एकल महिलाओं को कुल 3 करोड़ 45 लाख 34 हजार 500 रुपए की धनराशि भेजी गई। Mahila Swarojgar Yojana प्रदेश की उन महिलाओं के लिए संजीवनी साबित होगी जो किसी कारणवश अकेले जीवन यापन कर रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
दूसरे चरण में 540 महिलाओं को मिलेगा लाभ
सरकार ने Mahila Swarojgar Yojana को दो चरणों में लागू करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में देहरादून, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी, बागेश्वर और टिहरी जिलों की महिलाओं को लाभ दिया गया है। दूसरे चरण के तहत अल्मोड़ा, चंपावत, चमोली, हरिद्वार, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग जिलों की 540 महिलाओं को मार्च के पहले सप्ताह में सब्सिडी की राशि ट्रांसफर की जाएगी। विभाग के अनुसार कुल 1024 महिलाओं का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया गया है।
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2023 में हुई थी Mahila Swarojgar Yojana की घोषणा
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाएं जीवन यापन के लिए संघर्ष करती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 अगस्त 2023 को Mahila Swarojgar Yojana की घोषणा की थी। इसके बाद महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया। जून 2024 में मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव पर विचार किया और उप समिति का गठन किया गया। कई दौर की बैठकों के बाद 16 मई 2025 को कैबिनेट ने योजना को अंतिम मंजूरी दी और 18 जून से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
सब्सिडी का पूरा मॉडल समझिए
Mahila Swarojgar Yojana के तहत एकल महिलाएं दो लाख रुपए तक का स्वरोजगार प्रोजेक्ट तैयार कर सकती हैं। इसमें सरकार 75 प्रतिशत यानी डेढ़ लाख रुपए की सब्सिडी देगी, जबकि लाभार्थी को मात्र 50 हजार रुपए स्वयं निवेश करने होंगे। सब्सिडी तीन किस्तों में मिलेगी-पहली किस्त में 50 प्रतिशत, छह महीने बाद 30 प्रतिशत और एक साल के भीतर शेष 20 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि महिला वास्तव में व्यवसाय शुरू करे और उसे निरंतर आगे बढ़ाए।
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6 महीने में शुरू करना होगा कारोबार
सरकार ने स्पष्ट शर्त रखी है कि जिन महिलाओं को पहली किस्त मिली है, उन्हें छह महीने के भीतर अपना व्यवसाय शुरू करना अनिवार्य होगा। विभाग की टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी। यदि कोई लाभार्थी व्यवसाय शुरू नहीं करती है तो दी गई 50 प्रतिशत सब्सिडी वापस ले ली जाएगी। Mahila Swarojgar Yojana को गंभीरता से लागू करने के लिए निगरानी तंत्र बनाया गया है ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।
कौन-कौन से रोजगार कर सकेंगी महिलाएं
Mahila Swarojgar Yojana में महिलाओं को अपनी रुचि के अनुसार कई क्षेत्रों में काम करने की छूट दी गई है। कृषि, बागवानी, पशुपालन, भेड़-बकरी पालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, डेयरी, ब्यूटी पार्लर, सिलाई-कढ़ाई, होमस्टे, छोटी दुकान जैसे अनेक विकल्प शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं अपने गांव और आसपास ही रोजगार खड़ा करें ताकि पलायन रुके और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
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पहले चरण के लाभार्थियों का जिला वार आंकड़ा
पहले चरण में देहरादून जिले की 191, ऊधमसिंह नगर की 87, नैनीताल की 75, पौड़ी की 60, बागेश्वर की 42 और टिहरी की 23 महिलाओं को धनराशि दी गई है। इन सभी को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। विभाग का कहना है कि चयन प्रक्रिया में अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, दिव्यांग और निराश्रित महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है।
योजना से बदलेगा महिलाओं का जीवन
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि एकल महिलाओं के सामने सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह की चुनौतियां होती हैं। Mahila Swarojgar Yojana उन्हें सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगी। जब महिला कमाएगी तो परिवार भी मजबूत होगा और समाज में उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा। सरकार चाहती है कि महिलाएं सिर्फ सहायता लेने वाली न रहें बल्कि रोजगार देने वाली बनें।
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30 करोड़ का बजट, 2000 महिलाओं का लक्ष्य
पहले साल Mahila Swarojgar Yojana से दो हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अभी 484 महिलाओं को पहली किस्त दी गई है। विभाग का मानना है कि आने वाले समय में योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा। यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो सब्सिडी राशि और लाभार्थियों की संख्या दोनों में वृद्धि की जा सकती है।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों से रोजगार के अभाव में पलायन बड़ी समस्या है। सरकार को उम्मीद है कि जब गांव में ही महिलाओं के जरिए छोटे-छोटे उद्यम खड़े होंगे तो स्थानीय युवाओं को भी काम मिलेगा। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और परिवारों को शहरों की ओर भागना नहीं पड़ेगा।
सीएम धामी का भरोसा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि Mahila Swarojgar Yojana केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान की योजना है। जो महिलाएं परिस्थितियों से हार गई थीं, उन्हें अब नया रास्ता मिलेगा। सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहेगी और जरूरत पड़ने पर योजना को और व्यापक बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है। सही क्रियान्वयन हुआ तो यह योजना हजारों परिवारों की तस्वीर बदल सकती है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे सकती है।
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