Rajaji Tiger Reserve: उत्तराखंड के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधन लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। विशेष रूप से वे जंगल जो शहरों और घनी आबादी के नजदीक स्थित हैं, वहां यह समस्या और भी अधिक जटिल हो जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अब Rajaji Tiger Reserve में एक व्यापक सफाई अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग इस पहल को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसमें निजी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य Rajaji Tiger Reserve को कूड़ा मुक्त बनाना ही नहीं, बल्कि यह भी समझना है कि जंगल के किन हिस्सों में सबसे अधिक गंदगी फैल रही है और उसका स्रोत क्या है। वन विभाग का मानना है कि यदि समस्या की जड़ तक पहुंचा जाए तो भविष्य में इसे रोकने के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
शहरों के पास होने से बढ़ती है कूड़े की समस्या
उत्तराखंड में कई ऐसे संरक्षित वन क्षेत्र हैं जो शहरों और बस्तियों के बिल्कुल करीब स्थित हैं। इनमें Rajaji Tiger Reserve के अलावा Jim Corbett National Park भी शामिल हैं। इन जंगलों के आसपास रहने वाली आबादी, बढ़ता पर्यटन और कई बार निर्माण गतिविधियों के कारण कूड़ा फैलने की समस्या बढ़ जाती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जब जंगल की सीमा के पास कूड़ा जमा होता है तो इसका असर केवल पर्यावरण पर ही नहीं पड़ता, बल्कि वन्यजीवों के व्यवहार पर भी पड़ता है। यही कारण है कि अब Rajaji Tiger Reserve में कूड़ा प्रबंधन को एक दीर्घकालिक योजना के तहत व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
निजी संस्थाओं के साथ मिलकर चलेगा अभियान
वन विभाग इस सफाई अभियान को प्रभावी बनाने के लिए निजी संस्थाओं के साथ एक साल का अनुबंध करने की योजना बना रहा है। इन संस्थाओं की मदद से Rajaji Tiger Reserve और उसके आसपास के क्षेत्रों में नियमित सफाई अभियान चलाया जाएगा।
इसके अलावा स्थानीय निकायों, विशेष रूप से नगर निगम और अन्य प्रशासनिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जब सरकारी एजेंसियां, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय एक साथ काम करते हैं तो किसी भी अभियान की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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युवाओं और छात्रों की भी होगी भागीदारी
इस पहल को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को भी अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा। वन विभाग का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी ऐसी गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक Coco Rose के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं है, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि जंगल के आसपास कूड़ा फैलाने से पर्यावरण और वन्यजीवों पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उनका कहना है कि यदि स्थानीय समुदाय इस दिशा में जिम्मेदारी से काम करें तो Rajaji Tiger Reserve को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना कहीं अधिक आसान हो सकता है।
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कूड़े के स्रोतों की भी होगी पहचान
इस अभियान की एक खास बात यह है कि सफाई के दौरान केवल कूड़ा हटाने पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी अध्ययन किया जाएगा कि किस क्षेत्र में किस प्रकार का कचरा सबसे अधिक फैल रहा है।
इसके लिए कूड़े को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की योजना बनाई गई है। जैसे—प्लास्टिक कचरा, सूखा कूड़ा, निर्माण कार्यों से जुड़ा मलबा और अन्य अपशिष्ट। इस प्रक्रिया से यह समझने में मदद मिलेगी कि Rajaji Tiger Reserve में गंदगी के प्रमुख स्रोत क्या हैं और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए किस प्रकार की रणनीति अपनाई जानी चाहिए।
वन्यजीव संरक्षण से भी जुड़ा है कूड़ा प्रबंधन
वन अधिकारियों के अनुसार जंगल के आसपास फेंका गया कचरा कई बार वन्यजीवों को आकर्षित करता है। खाने-पीने से जुड़ा जैविक कचरा या खाद्य पदार्थों के अवशेष जानवरों को जंगल से बाहर आने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी, भालू और तेंदुआ जैसे कई वन्यजीव ऐसे कचरे की ओर आकर्षित हो सकते हैं। जब ये जानवर भोजन की तलाश में मानव बस्तियों के करीब पहुंचते हैं तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
इसलिए Rajaji Tiger Reserve में कूड़ा प्रबंधन को अब वन्यजीव संरक्षण की रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
अन्य वन क्षेत्रों के लिए बन सकता है मॉडल
वन विभाग को उम्मीद है कि यदि यह अभियान सफल रहता है तो Rajaji Tiger Reserve की यह पहल उत्तराखंड के अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। भविष्य में इसी तरह के अभियान अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और रिजर्व फॉरेस्ट में भी चलाए जा सकते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंगलों के आसपास कूड़ा फैलने की समस्या को नियंत्रित कर लिया जाए तो इससे न केवल प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर देखा जाए तो Rajaji Tiger Reserve में शुरू होने जा रहा यह सफाई अभियान केवल एक पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं है। यह वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और समाज की जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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