Forest Fire Drill: राज्य में हर साल 15 फरवरी से 15 जून तक वनाग्नि सीजन माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 15 फरवरी को सभी 41 फॉरेस्ट डिवीजनों में एक साथ Forest Fire Drill कराई गई। तय समय पर अलग-अलग स्थानों से जंगल में आग लगने की काल्पनिक सूचना जारी की गई, जिसके बाद संबंधित टीमें तत्काल मौके के लिए रवाना हुईं।
कई विभागों ने मिलकर किया संयुक्त अभ्यास
इस व्यापक अभ्यास में वन विभाग के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कई स्थानों पर जंगल में आग के काल्पनिक बिंदु निर्धारित किए गए, जहां सूचना मिलते ही संयुक्त टीमें पहुंचीं और आग बुझाने की प्रक्रिया शुरू की।
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मौके पर फायर लाइन काटने, पानी के स्रोतों के उपयोग, अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता और कर्मचारियों की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस भी Forest Fire Drill में शामिल रही, ताकि किसी संभावित घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता देने की व्यवस्था को परखा जा सके।
मुख्यालय से हुई लाइव निगरानी
देहरादून स्थित वन मुख्यालय में स्थापित एकीकृत नियंत्रण कक्ष से पूरे अभ्यास की लाइव मॉनिटरिंग की गई। अधिकारियों ने सभी 41 डिवीजनों की गतिविधियों पर नजर रखी। संचार व्यवस्था, सूचना के आदान-प्रदान की गति और फील्ड से मिल रहे फीडबैक का विश्लेषण किया गया। यह भी देखा गया कि आपात स्थिति में आदेश और संसाधन कितनी तेजी से निचले स्तर तक पहुंचते हैं।
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मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) सुशांत पटनायक ने बताया कि एक साथ 41 स्थानों पर यह अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सूचना मिलते ही सभी विभागों ने तय समय सीमा में प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, इस Forest Fire Drill से यह स्पष्ट हुआ कि फायर सीजन के लिए विभाग किस हद तक तैयार हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

मसूरी में भीषण आग की काल्पनिक स्थिति पर अभ्यास
मसूरी वन प्रभाग में भी जंगल में भीषण आग लगने की काल्पनिक सूचना पर व्यापक अभ्यास किया गया। स्थानीय प्रशासन, आईटीबीपी, पशु चिकित्सक, नगर पालिका और अन्य विभागों के अधिकारी इसमें शामिल हुए। सुबह वन विभाग कार्यालय में समन्वय बैठक के बाद करीब 11 बजे कंट्रोल रूम से अलर्ट जारी किया गया और संयुक्त टीमें रवाना हुईं।
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ITBP के जवानों के साथ वन विभाग की फायर टीम और पशु चिकित्सक घटनास्थल पहुंचे। यहां न केवल आग पर नियंत्रण की कार्रवाई की गई, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा की रणनीति का भी अभ्यास किया गया। मसूरी के प्रभागीय वनाधिकारी अमित कुमार ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल और प्रतिक्रिया समय को जांचना था।
उपकरणों और संसाधनों की जांच
Forest Fire Drill के दौरान फायर बीटर, पानी के टैंकर, ब्लोअर मशीन, सुरक्षा किट और संचार उपकरणों की भी जांच की गई। जिन उपकरणों में कमी या खराबी पाई जाएगी, उन्हें समय रहते ठीक किया जाएगा। आवश्यकता होने पर अतिरिक्त संसाधनों की मांग भी की जाएगी।
हल्द्वानी और हरिद्वार में भी अभ्यास
हल्द्वानी क्षेत्र में सूखी घास और पत्तियों के कारण जंगल अत्यधिक संवेदनशील हो गए हैं। यहां SDRF, फायर सर्विस और स्थानीय ग्रामीणों के साथ संयुक्त अभ्यास किया गया। आग की काल्पनिक स्थिति बनाकर बचाव और नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया दोहराई गई, ताकि वास्तविक स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम किया जा सके।
वहीं हरिद्वार में मनसा देवी पहाड़ी पर भी Forest Fire Drill आयोजित की गई, जिसमें हरिद्वार वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीमों सहित कुल 11 विभागों के लगभग 140 कर्मचारी शामिल हुए।
जागरूकता पर भी जोर
वन विभाग ने आगामी फायर सीजन को देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि जंगलों में आग न जलाएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। यदि कहीं धुआं या आग दिखाई दे तो तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।
राज्यव्यापी इस Forest Fire Drill को वनाग्नि से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि समय रहते की गई तैयारी ही आपदा के समय सबसे बड़ी ताकत साबित होती है। अब सभी डिवीजनों से विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी, जिसके आधार पर कमियों को दूर कर आगामी महीनों के लिए रणनीति को और मजबूत किया जाएगा।
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