Tehri Garhwal (Uttarakhand): उत्तराखंड के पहाड़ों के बीच, टिहरी गढ़वाल की ठंडी हवा और लोगों के जज़्बे के साथ जब पहले स्पोर्ट्स एंड कल्चर फेस्टिवल का क्लोजिंग सेरेमनी हुआ, तो सिर्फ एक इवेंट का समापन नहीं था, बाल्की एक नए विजन का ऐलान था। इस मौके पर पुष्कर सिंह धामी ने मंच से जो कहा, वो सिर्फ भाषण नहीं बाल्की उत्तराखंड के युवा, खिलाड़ी और संस्कृति के लिए एक रोडमैप था। हिंग्लिश में, सीधी और प्रेरणा देने वाली भाषा में CM धामी ने यह संदेश दिया कि देवभूमि सिर्फ धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं, बाल्की स्पोर्ट्स, कल्चर और ग्लोबल टैलेंट का भी पावरहाउस बनने जा रही है।
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पहाड़ों से उठी आवाज़
CM धामी ने अपने संबोधिन की शुरुआत टिहरी गढ़वाल के लोगों और यहाँ के युवाओं का धन्यवाद करके की। उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों के बच्चों के पास टैलेंट की कमी नहीं, बस उन्हें मौके और सही प्लेटफॉर्म की ज़रूरत होती है। यह पहला स्पोर्ट्स एंड कल्चर फेस्टिवल इसी सोच का नतीजा है, जहाँ खेल और कला दोनों को एक साथ सम्मान दिया गया। उनका कहना था कि उत्तराखंड का युवा जब अपनी मिट्टी से जुड़कर आगे बढ़ता है, तो उसकी पहचान सिर्फ राज्य तक नहीं दिखती, बाल्की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टार पर चमकती है। ये फेस्टिवल इसी कॉन्फिडेंस को और मजबूत करता है।
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स्पोर्ट्स + कल्चर = उत्तराखंड मॉडल
पुष्कर सिंह धामी ने ज़ोर देकर कहा कि स्पोर्ट्स और कल्चर अलग-अलग चीज़ें नहीं हैं। दोनों मिलकर व्यक्ति के कैरेक्टर को गढ़ते हैं। खेल डिसिप्लिन सिखाता है और संस्कृति संस्कार। जब दोनों साथ आते हैं, तब एक मजबूत समाज का निर्माण होता है। टिहरी गढ़वाल में आयोजित इस फेस्टिवल ने ये साबित कर दिया कि उत्तराखंड मॉडल सिर्फ बातों का नहीं, ग्राउंड रियलिटी का मॉडल है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है, गांव-गांव तक खेलों को पहुंचाया जा रहा है और युवाओं को ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और एक्सपोजर के नए अवसर दिए जा रहे हैं।
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युवा शक्ति पर विश्वास
CM धामी का फोकस पूरे भाषण के दौरान युवा शक्ति पर रहा है। उन्होंने कहा कि जो राज्य अपने युवाओं पर भरोसा करता है, वही आगे बढ़ता है। टिहरी गढ़वाल जैसे पहाड़ी जिलों से निकले खिलाड़ी जब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मेडल जीत कर तिरंगा लहराते हैं, तो पूरा देश गौरव महसूस करता है। उनका संदेश बिल्कुल साफ था, सरकार सिर्फ दर्शक नहीं, पार्टनर बनकर युवाओं के साथ खड़ी है। चाहे स्पोर्ट्स हो, कल्चर हो या एम्प्लॉयमेंट, हर फील्ड में युवाओं को आगे लाने के लिए पॉलिसी को जमीन पर उतारा जा रहा है।
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देवभूमि की संस्कृति, ग्लोबल पहचान
पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की लोक कला, लोक नृत्य और पारंपरिक विरासत पर भी डिटेल में बात की। उन्होंने कहा कि देवभूमि की संस्कृति अपने आप में एक ब्रांड है। इस फेस्टिवल के माध्यम से जब लोक कला और मॉडर्न प्रेजेंटेशन एक साथ दिखते हैं, तो दुनिया को उत्तराखंड की असली तस्वीर नज़र आती है। उनका मानना है कि कल्चरल फेस्टिवल टूरिज्म को बूस्ट करते हैं, लोकल आर्टिस्ट को पहचान देते हैं और राज्य की इकॉनमी को भी मजबूत बनाते हैं। टिहरी गढ़वाल में हुआ यह आयोजन इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।
टिहरी गढ़वाल से नया संदेश
क्लोजिंग सेरेमनी के विजुअल्स में स्टेज पर खड़े CM धामी के चेहरे पर कॉन्फिडेंस और पॉजिटिविटी साफ दिख रही थी। ऑडियंस से कनेक्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरू है। आने वाले समय में उत्तराखंड के हर जिले में स्पोर्ट्स और कल्चर को एक मूवमेंट की तरह आगे बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड किसी से कम नहीं है। यहां के युवा, यहां की मिट्टी और यहां की संस्कृति—तीनों मिलकर राज्य को नई ऊंचाई तक ले जाने वाले हैं।
पॉलिटिकल मैसेज भी क्लियर
इस संबोधन के ज़रिए पुष्कर सिंह धामी का पॉलिटिकल मैसेज भी बिल्कुल क्लियर था। सरकार सिर्फ़ चुनाव के वक़्त नहीं, बाल्की हर मौके पर युवा और संस्कृति के साथ खड़ी है। डेवलपमेंट का मतलब सिर्फ़ सड़क और बिल्डिंग नहीं, बाल्की इंसान और उसके टैलेंट का विकास भी है। टिहरी गढ़वाल के इस फेस्टिवल ने एक तरह से ये दिखाया कि उत्तराखंड का फ्यूचर सिर्फ़ फाइल्स और प्लान्स में नहीं, बाल्की ग्राउंड पर इवेंट्स, पार्टिसिपेशन और सेलिब्रेशन के लिए ज़रूर लिखा जा रहा है।
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अंत में उम्मीद और उत्साह
अपने भाषण के अंत में CM धामी ने सभी खिलाड़ियों, कलाकारों, ऑर्गनाइज़र और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब सरकार और समाज एक साथ मिलकर काम करते हैं, तब ऐसे ही पॉजिटिव नतीजे सामने आते हैं। टिहरी गढ़वाल का यह स्पोर्ट्स एंड कल्चर फेस्टिवल सिर्फ एक इवेंट नहीं, बाल्की उत्तराखंड के बदलते हुए नैरेटिव का सिंबल बन गया है जहाँ युवा है, विश्वास है, और जहां देवभूमि ग्लोबल मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
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