Russian Army viral video: भारत में गणतंत्र दिवस के बाद राष्ट्रीय कार्यक्रमों और पद्म पुरस्कार 2026 को लेकर चर्चाओं के बीच, खेल जगत में विराट कोहली और नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों के नाम सुर्खियों में हैं। इसी समय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल इस फुटेज में कथित तौर पर एक रूसी कमांडर दो सैनिकों को अनुशासन उल्लंघन के आरोप में बर्फीले इलाके में कठोर सजा देता दिख रहा है, जिससे मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठे हैं।
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Russian Army viral video: क्या है वायरल वीडियो का दावा
वायरल बताया जा रहा यह वीडियो लगभग 28 सेकंड का है। इसमें बर्फ से ढके जंगल जैसे क्षेत्र में दो सैनिकों को बेहद ठंड के बीच उल्टा लटकाया गया दिखता है। वीडियो में मौजूद व्यक्ति खुद को कमांडर बताकर सैनिकों पर आदेश न मानने का आरोप लगाता है। खास बात यह है कि, वीडियो में कथित तौर पर अपमानजनक भाषा और कठोर व्यवहार भी सुनाई देता है, जिसने दर्शकों को झकझोर दिया।
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Russian Army viral video; कब और कैसे सामने आया मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वीडियो हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हुआ। इसके अलावा, वीडियो की लोकेशन और तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने कहा है कि ऐसे क्लिप्स की सत्यता की स्वतंत्र जांच जरूरी होती है।
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Russian Army viral video: क्यों दी गई सजा कथित कारण
वीडियो में सुने जा रहे आरोपों के अनुसार, सैनिकों पर बिना अनुमति पोस्ट छोड़ने और आगे बढ़ने के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया गया। इसी क्रम में, कमांडर यह कहते सुना जाता है कि सैन्य परिस्थितियों में आदेशों का पालन अनिवार्य है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में अमानवीय दंड स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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मानवाधिकार और सैन्य अनुशासन पर सवाल
सैन्य अनुशासन हर देश की सेना की रीढ़ माना जाता है, लेकिन वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार मानक क्रूर या अपमानजनक सजा की अनुमति नहीं देते। यदि वीडियो के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय होगा।
आधिकारिक प्रतिक्रिया की स्थिति
अब तक रूस की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। साथ ही, स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स का कहना है कि युद्ध क्षेत्र से आने वाले वीडियो में अक्सर संदर्भ और संपादन से वास्तविकता प्रभावित हो सकती है, इसलिए निष्कर्ष से पहले जांच जरूरी है।
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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। खास बात यह है कि, कुछ यूज़र्स ने इसे सैन्य क्रूरता का उदाहरण बताया, जबकि अन्य ने सत्यापन की मांग की। प्लेटफॉर्म्स पर कई पोस्ट्स में वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की अपील की जा रही है। युद्ध की परिस्थितियों में अनुशासन महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके अलावा, मानवीय गरिमा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। वायरल वीडियो ने एक बार फिर दिखाया है कि युद्ध के दौरान सामने आने वाली सामग्री को तथ्यात्मक जांच और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के साथ ही देखा जाना चाहिए।
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