Pratistha Dwadashi Hanumangarhi Ayodhya: प्रतिष्ठा द्वादशी का पावन पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह तिथि केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और राष्ट्रचेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक भी मानी जाती है। इसी शुभ अवसर पर माननीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh का Hanumangarhi, Ayodhya धाम में श्री हनुमान जी महाराज के दर्शन-पूजन के लिए पहुँचना श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रेरणा का विषय बना।
READ MORE: योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सहभागिता से और दिव्य हुआ श्री राम जन्मभूमि मंदिर
हनुमानगढ़ी को अयोध्या की आत्मा कहा जाता है। मान्यता है कि श्रीराम जन्मभूमि में प्रवेश से पूर्व हनुमान जी के दर्शन करना मंगलकारी होता है। ऐसे में प्रतिष्ठा द्वादशी जैसे दिव्य पर्व पर देश के रक्षा मंत्री का यहाँ पूजन करना केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों के प्रति सार्वजनिक प्रतिबद्धता का भी संकेत देता है।
READ MORE: राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ, अयोध्या से उठती सनातन चेतना और राष्ट्रबोध का संदेश
प्रतिष्ठा द्वादशी का धार्मिक महत्व
प्रतिष्ठा द्वादशी वह तिथि है जब देव प्रतिमाओं की स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा और विशेष पूजन किए जाते हैं। यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक संकल्प और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। शास्त्रों में माना गया है कि इस दिन किया गया पूजन जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा और उन्नति प्रदान करता है।
हनुमानगढ़ी, शक्ति, सेवा और समर्पण का केंद्र
हनुमानगढ़ी में विराजमान महाबली पवनकुमार को संकटमोचक कहा जाता है। वे भक्ति, शक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यहां दर्शन-पूजन यह दर्शाता है कि राष्ट्र की सुरक्षा और आध्यात्मिक चेतना एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि पूरक हैं। हनुमान जी का चरित्र अनुशासन, निष्ठा और साहस का आदर्श प्रस्तुत करता है वही गुण जो देश की रक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं।
READ MORE: जनवरी का जश्न बनाम सनातन नववर्ष, सांस्कृतिक स्मृति पर एक विश्लेषण
आस्था और राष्ट्रभाव का संदेश
पूजन के दौरान की गई प्रार्थना महाबली पवनकुमार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें, सबके जीवन में सुख, उत्सव व उन्नति का संचार हो समाज के हर वर्ग को जोड़ने वाला भाव प्रकट करती है। यह संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय भी है। जब सार्वजनिक जीवन के शीर्ष पद पर आसीन व्यक्ति परंपराओं से जुड़ता है, तो जनमानस में विश्वास और सांस्कृतिक गर्व और प्रबल होता है।
READ MORE: 2 या 3 जनवरी? नए साल 2026 की पहली पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
अयोध्या: सांस्कृतिक पुनर्जागरण की धुरी
अयोध्या आज केवल एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बन चुकी है। प्रतिष्ठा द्वादशी जैसे आयोजनों से यहाँ आध्यात्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को नई दिशा मिलती है। हनुमानगढ़ी में हुए इस पूजन ने एक बार फिर अयोध्या की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ किया है। प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर हनुमानगढ़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दर्शन-पूजन सनातन आस्था, राष्ट्रभाव और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण है। यह घटना बताती है कि आधुनिक शासन और प्राचीन संस्कृति साथ-साथ चल सकते हैं। महाबली हनुमान जी से यही कामना है कि वे सभी नागरिकों के जीवन में साहस, समृद्धि और शांति का संचार करें, और राष्ट्र निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर रहे।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
