Madhya Pradesh Maoist Surrender: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में रविवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब प्रदेश के ‘Rehabilitation through Rebirth’ कार्यक्रम के तहत 10 hardcore Maoists ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से KB और MMC ज़ोन में सक्रिय ये नक्सली कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे और सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बने हुए थे।
बालाघाट वह इलाका है जो छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से सटा हुआ है, जिससे यहां नक्सली गतिविधियां पहले काफी बढ़ी हुई थीं। पुलिस सूत्रों ने पहले 11 नक्सलियों के सरेंडर की बात कही थी, लेकिन आधिकारिक रूप से 10 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए।
इन नक्सलियों पर IED विस्फोट करने, पुलिस पर फायरिंग, ग्रामीणों में डर फैलाने, जंगल के रास्तों पर कब्ज़ा जमाने और सुरक्षा बलों पर हमले जैसे कई आरोप थे। लगातार ऑपरेशन, मजबूत खुफिया नेटवर्क और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर surrendered cadre को भारतीय संविधान की प्रति सौंपी और कहा कि किसी भी व्यक्ति को देश के खिलाफ हथियार उठाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी सुरक्षा, शिक्षा, रोज़गार और बेहतर भविष्य के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
सीएम यादव ने यह भी बताया कि प्रदेश में नक्सल-रोधी अभियान लगातार मजबूत किया जा रहा है। 15 नए अस्थायी पुलिस कैंप और Special Support Squad के लिए 882 पदों की स्वीकृति इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि लगातार निगरानी और ऑपरेशनों के कारण KB क्षेत्र में नक्सल प्रभाव बेहद कम हो गया है।
सरकार ने पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित इलाकों में 46 One-Stop Facility Centres शुरू किए थे, जहाँ ग्रामीणों को रोजगार, वनाधिकार पट्टे और आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। सीएम ने शहीद अशिश शर्मा को नमन करते हुए बताया कि 328 पुलिसकर्मियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिए गए हैं।
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मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अभियान को नई दिशा मिली है। नए कैंप खुलने और फोर्स के विस्तार से नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर बढ़ते surrender में साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस का लक्ष्य नक्सल मुक्त भारत है और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज किए गए हैं।
सरेंडर करने वालों में सुरेंद्र उर्फ कबीर, राकेश ओड़ी, लालसिंह मरावी, शिल्पा नुप्पो, सलिता अलावा, नवीन नुप्पो, जयशिला ओयम, विक्रम वट्टी, जरीना मुसाक और समरु अत्रम शामिल हैं।
यह सामूहिक निर्णय न केवल मध्य प्रदेश की पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि बालाघाट और आसपास के KB क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क की पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है। सरकार और सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों से अब शांति और विकास की राह और मजबूत होती दिख रही है।
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