DUSU leader Deepika Jha slaps DU professor Sujit Kumar inside BR Ambedkar College principal office, Delhi
Delhi University DUSU Slap Case: दिल्ली यूनिवर्सिटी के भीम राव आंबेडकर कॉलेज (BRAC) में उस वक्त हड़कंप मच गया जब DUSU (दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन) की ज्वाइंट सेक्रेटरी दीपिका झा ने कॉमर्स विभाग के प्रोफेसर और डिसिप्लिन कमेटी के चेयरमैन सुजीत कुमार को प्रिंसिपल ऑफिस के अंदर थप्पड़ मार दिया। घटना के वक्त पुलिस और प्रिंसिपल दोनों वहीं मौजूद थे, लेकिन किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की। 16 अक्टूबर को हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही यह मामला अब विश्वविद्यालय स्तर तक पहुंच चुका है।

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प्रोफेसर सुजीत बोले-थप्पड़ से ज्यादा दुख, चरित्र पर कीचड़ उछाले जाने का है’
32 साल से पढ़ा रहे प्रोफेसर सुजीत कुमार ने बताया —
“थप्पड़ का दर्द कुछ घंटों में चला गया, लेकिन जिस तरह मेरे चरित्र पर सवाल उठाए गए, वो ज़िंदगीभर नहीं मिटेगा। मैं डिसिप्लिन कमेटी का प्रमुख था, और वही अनुशासन संभालने वाला व्यक्ति अब आरोपों के घेरे में है — ये बेहद पीड़ादायक है।”
सुजीत ने कहा कि उन्हें आरोप लगाया गया कि वो छात्र नेताओं के खिलाफ साजिश कर रहे थे, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। “मैं बस कॉलेज के माहौल को शांत रखने की कोशिश कर रहा था,” उन्होंने कहा।
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झगड़े की जड़ — NSUI और ABVP के बीच पुरानी खींचतान
प्रोफेसर सुजीत बताते हैं कि ये विवाद अचानक नहीं हुआ।
“ये झगड़ा किसी एक थप्पड़ या एक दिन का नहीं था। ये NSUI और ABVP के बीच की पुरानी खींचतान का नतीजा था।”
BRAC कॉलेज DUSU से संबद्ध नहीं है, इसलिए यहां सिर्फ कॉलेज लेवल के चुनाव होते हैं। फिर भी राजनीतिक संगठन अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अपने समर्थक छात्रों को मैदान में उतारते हैं। ABVP चाहती थी कि कॉलेज में उसका दबदबा बढ़े, जबकि NSUI समर्थित उम्मीदवार राजवर्धन सिंह ने चुनाव जीत लिया। इसके बाद माहौल गरमाया और झगड़े का सिलसिला शुरू हो गया।
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🔹 ‘हिमांशू’ पर कार्रवाई से भड़के छात्र
राजवर्धन ने सुजीत को शिकायत दी थी कि ABVP समर्थक छात्र हिमांशू चौधरी ने उसे यूनियन रूम से जबरन बाहर निकाल दिया। डिसिप्लिन कमेटी ने जांच के बाद हिमांशू को सस्पेंड किया, लेकिन वह कॉलेज आता रहा। 15 अक्टूबर को शपथग्रहण समारोह में उसी छात्र ने अपने साथियों के साथ “NSUI मुर्दाबाद” के नारे लगाए और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। प्रोफेसर सुजीत ने बताया
“प्रिंसिपल उस वक्त कॉलेज में नहीं थे। मैंने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन माहौल बिगड़ता गया। पुलिस बुलानी पड़ी। हमने हिमांशू को आखिरी चेतावनी देने का फैसला लिया। शायद यही बात कुछ छात्रों को नागवार गुज़री।”
16 अक्टूबर — कॉलेज में ‘हमला’ और थप्पड़ कांड
अगले ही दिन 16 अक्टूबर को, DUSU अध्यक्ष आर्यन मान और ज्वाइंट सेक्रेटरी दीपिका झा करीब 60–70 छात्रों के साथ कॉलेज पहुंचे।
प्रोफेसर सुजीत के अनुसार —
“वो सब स्टाफ रूम में घुसे और मुझे घेरने लगे। फीमेल टीचर्स मेरे आगे ढाल बनकर खड़ी हुईं। पुलिस को बुलाना पड़ा।”
प्रिंसिपल के ऑफिस में प्रोफेसर सुजीत को सुरक्षा के लिए बैठाया गया। तभी दीपिका और आर्यन फिर अंदर पहुंचे और आरोप लगाने लगे कि ‘आप ABVP के खिलाफ साजिश कर रहे हैं।’ सुजीत ने मौके पर ही डिसिप्लिन कमेटी से इस्तीफा दे दिया। लेकिन दीपिका यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा, ‘लिखित में दो।’ कुछ देर बाद दीपिका ने सुजीत के पास बैठते हुए उन्हें दो थप्पड़ जड़ दिए – पुलिस और प्रिंसिपल सब देखते रह गए।
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‘उन्होंने कहा मैं शराब पीता हूं, लेकिन सच कुछ और है’
प्रोफेसर सुजीत के मुताबिक दीपिका झा ने उन पर कई झूठे आरोप लगाए —
“उन्होंने कहा मैं उन्हें घूर रहा था, उन पर हंस रहा था, यहां तक कि शराब पीकर कॉलेज आता हूं। ये सब झूठ है। 32 साल में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी ने मेरे व्यवहार पर सवाल उठाया हो।”
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो स्टाफ उन्हें डिसिप्लिन कमेटी का अध्यक्ष कभी नहीं बनाता।
कॉलेज प्रशासन और पुलिस पर सवाल
प्रोफेसर सुजीत का कहना है कि इस पूरी घटना में कॉलेज प्रशासन ने उनका साथ नहीं दिया।
“प्रिंसिपल ने मुझसे एक शब्द तक नहीं कहा। वाइस चांसलर ने दीपिका झा को सस्पेंड करने की बजाय बस एक कमेटी बना दी। एक हफ्ता बीत गया, लेकिन मुझसे (पीड़ित) अब तक किसी ने बात नहीं की।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और प्रिंसिपल ने FIR की कॉपी उन्हें अब तक नहीं सौंपी है।
DUSU अध्यक्ष और कॉलेज अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
BRAC के छात्र संघ अध्यक्ष राजवर्धन सिंह ने कहा कि 15 अक्टूबर को उनके साथ मारपीट हुई थी, लेकिन 16 अक्टूबर की घटना की ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि वह उस दिन जल्दी घर चले गए थे। वहीं DUSU अध्यक्ष आर्यन मान और दीपिका झा ने अपने खिलाफ लगे आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
कैंपस फिलहाल बंद, लेकिन ‘तनाव’ बरकरार
BRAC कॉलेज 17 अक्टूबर से बंद है और 27 अक्टूबर को दोबारा खुलने वाला है। फिलहाल माहौल शांत है, लेकिन छात्र राजनीति की खींचतान अब भी दीवारों के भीतर गूंज रही है। छुट्टियों के बाद कैंपस लौटने वाले छात्रों को एक बार फिर उसी तनाव और गुटबाजी का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय -‘छात्र राजनीति, अब हिंसा का मंच बनती जा रही है’
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति का स्वरूप अब बदल रहा है। पहले ये विचारधारा और मुद्दों की राजनीति थी, अब यह “पावर और प्रभुत्व” की लड़ाई बन गई है। BRAC की घटना इस बात का उदाहरण है कि जब छात्र नेता प्रशासन पर हावी होने लगते हैं, तो अनुशासन और शिक्षा दोनों कमजोर हो जाते हैं।
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कैंपस में लौटेगा सन्नाटा या सियासत?
DUSU की यह घटना सिर्फ एक थप्पड़ का मामला नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल उठाती है जहां छात्र संगठन अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए शिक्षकों तक पर हाथ उठाने से नहीं हिचकते। प्रोफेसर सुजीत के शब्दों में —
“थप्पड़ का निशान मिट जाएगा, लेकिन जिस तरह मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है, वो हमेशा याद रहेगी।”
दिल्ली यूनिवर्सिटी का यह मामला अब यूनिवर्सिटी प्रशासन और वाइस चांसलर के फैसले पर टिका है।
क्या यह केवल एक कमेटी बनाकर ठंडे बस्ते में जाएगा, या सच में अनुशासन बहाल होगा — यही अब बड़ा सवाल है।
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