Defence Forces Veterans Day
Defence Forces Veterans Day: देश ने बुधवार को 10वें रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और सतत राष्ट्रसेवा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली से लेकर दूर-दराज के गांवों तक, पूरे भारत में आयोजित कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि देश की सुरक्षा की नींव रखने वाले सैनिक कभी भुलाए नहीं जाते। पूर्व सैनिक रैलियां, पुष्पांजलि कार्यक्रम, शिकायत निवारण काउंटर और सुविधा सहायता डेस्क के ज़रीये राष्ट्र ने अपने वीरों के प्रति आभार प्रकट की।
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मानेकशॉ सेंटर में मुख्य समारोह, 2,500 से अधिक पूर्व सैनिक शामिल
दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित मुख्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिरकत की। दिल्ली गाजियाबाद से आए करीब 2,500 पूर्व सैनिकों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। देशभर में समानांतर रूप से आयोजित कार्यक्रमों ने यह दिखाया कि पूर्व सैनिकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है।
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‘पूर्व सैनिक राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ’
सभा को निर्देशित करते हुए रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों को राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ पूर्व सैनिकों ने देश को दिया है, वही आने वाली जरूरतों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने आग्रह किया कि पूर्व सैनिक युवाओं का मार्गदर्शन करें, अग्निवीरों और नए सैनिकों को मेंटरशिप दें, आपदा के समय नागरिक प्रशासन का सहयोग करें और जमीनी स्तर पर देशभक्त व सामाजिक सद्भाव को मजबूत करें।
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आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में पूर्व सैनिकों की भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत तेज़ी से एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। ऐसे दौर में पूर्व सैनिकों का अनुभव और नेतृत्व संपदा संपत्ति है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे पूर्व सैनिकों के अनुशासन, धैर्य और जिम्मेदारी की भावना से सीख लें, क्योंकि यही गुण राष्ट्र निर्माण की असली ताकत हैं।
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ऑपरेशन पवन और आईपीकेएफ के वीरों को विशेष सम्मान
अपने मंत्रियों में रक्षा मंत्री ने लगभग चार दशक पहले श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान भारतीय शांति सेना (IPKF) का हिस्सा रहे पूर्व सैनिकों को विशेष श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वीकार किया कि लंबे समय तक उनके शौर्य और बलिदान को वह पहचान नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अब उनके योगदान को औपचारिक सम्मान दे रही है, जिसमें नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में सम्मान भी शामिल है।
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OROP, ECHS और टेलीमेडिसिन पर ज़ोर
रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के सहायक और पूर्व सैनिकों के लिए अंशदान स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) की भर्ती का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार जिले और इलाकों तक किया जा रहा है, ताकि उम्र या दूरी के इलाज में बाधा न बने।
पुनर्वास, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और सेवानिवृत्ति के बाद के अवसरों पर भी विशेष ध्यान दे रही है। कौशल विकास, सार्वजनिक निगमों में प्राथमिक रोजगार, मनमोहन को प्रोत्साहन और आवास व ऋण जैसी लक्षित कल्याण योजनाएं इसी दिशा में कदम हैं। उन्होंने कहा, एक सैनिक कभी सच में सेवानिवृत्त नहीं होता। वर्दी बदल सकती है, लेकिन देशसेवा और देशभक्त की भावना जीवन भर बनी रहती है।
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पूर्व सैनिकों और राष्ट्र का अटूट संबंध
कार्यक्रम में सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) सुकृति लिखी ने कहा कि वयोवृद्ध दिवस राष्ट्र और उसके सैनिकों के बीच अपूर्ण संबंध की याददाश्त है। उन्होंने बताया कि हर साल करीब 60,000 सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं और कुल पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग 35 लाख है। यह आंकड़ा बताता है कि पूर्व सैनिकों के कल्याण की जिम्मेदारी कितनी व्यापक है।
पेंशन, पुनर्वास और ECHS नेटवर्क में सुधार
सुकृति लिखी ने पेंशन वितरण में सुधार, अनुदानों में बढ़ोतरी, पुनर्वास व प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार और ईसीएचएस नेटवर्क के 64 लाख लाभार्थियों तक पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पूर्व नागरिकों और उनके परिवारों को लाभान्वित, सुरक्षित और टिकाऊ जीवन मिले।
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शीर्ष रक्षा नेतृत्व की मौजूदगी
इस अवसर पर देश का शीर्ष रक्षा नेतृत्व भी उपस्थित रहा। इनमें अनिल चौहान, नेवी चीफ दिनेश के त्रिपाठी, एयरफोर्स चीफ एपी सिंह सहित कई सेवारत और पूर्व मिलिट्री चीफ शामिल थे। समारोह के दौरान वार्षिक पत्रिकाएं सम्मान, सागर संवाद और वायु संवेदना भी जारी की गई।
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क्यों मनाया जाता है 14 जनवरी को वयोवृद्ध दिवस
रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के.एम. करियप्पा की विरासत और सेवा को सम्मान देने के लिए चुना गया था, क्योंकि वे इसी दिन 1953 में सेवानिवृत्त हुए थे। रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह संकल्प है कि भारत अपने पूर्व सैनिकों का त्याग कभी नहीं भूलेगा। उनका अनुभव, नेतृत्व और प्रेम राष्ट्र आने वाले पर्यटकों के लिए मार्गदर्शक बने रहें। जब देश विकसित हुआ भारत की ओर कदम बढ़ा रहा है, तब पूर्व सैनिकों का सम्मान और कल्याण ही सच्ची राष्ट्रभक्ति की पहचान है।
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