Uttarakhand Disaster Management monsoon mock drill with AI-based early warning system in Dehradun
Uttarakhand Disaster Management: उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही राज्य सरकार ने संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बुधवार को देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Uttarakhand Disaster Management से जुड़ी राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया और विभिन्न विभागों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी 13 जिलों से आगामी 72 घंटे के भीतर तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को उपलब्ध कराई जाए, ताकि संभावित कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है, जहां मानसून के दौरान भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना, सड़क अवरुद्ध होना और नदियों का जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं आम हैं। ऐसे में Uttarakhand Disaster Management को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित रखने के बजाय जनभागीदारी के मॉडल पर मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
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मॉक ड्रिल में परखी गई विभागों की तैयारियां
राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न जिलों से जुड़े अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों की तैयारियों की जानकारी साझा की। राहत एवं बचाव कार्यों, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता, रेस्क्यू टीमों की तैनाती और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल को केवल औपचारिक अभ्यास न मानते हुए वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों में कार्य करने की मानसिक और तकनीकी तैयारी विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग के बीच बेहतर समन्वय ही किसी भी आपदा के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम कर सकता है।
72 घंटे में मांगी विस्तृत रिपोर्ट
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि अगले 72 घंटे के भीतर मानसून को लेकर की गई तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाए।
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इस रिपोर्ट में राहत एवं बचाव उपकरणों की उपलब्धता, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, कंट्रोल रूम की स्थिति, संचार व्यवस्था, मेडिकल सुविधाएं, सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति और आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के वैकल्पिक मार्गों की जानकारी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचे।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि Uttarakhand Disaster Management को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी एजेंसियां पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने ग्राम स्तरीय समितियों, स्वयंसेवी संगठनों, स्थानीय युवाओं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गांव स्तर पर स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जाए ताकि आपदा आने की स्थिति में वे शुरुआती राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन की मदद कर सकें। इससे दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में राहत कार्यों की गति तेज होगी।
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SDRF, NDRF और जिला प्रशासन को समन्वय के निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), जल पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता से कार्य करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी सूचना पर तुरंत प्रतिक्रिया देना सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी एजेंसियां चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहें और संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा के समय सूचना का तेजी से आदान-प्रदान और समयबद्ध निर्णय ही राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता तय करते हैं।
AI आधारित तकनीकों से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन
राज्य सरकार अब आधुनिक तकनीकों के माध्यम से Uttarakhand Disaster Management को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित Early Warning System, ड्रोन सर्विलांस, GIS मैपिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
AI आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम के जरिए मौसम संबंधी जोखिमों का पहले से आकलन किया जा सकेगा, जबकि ड्रोन सर्विलांस के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का तुरंत पता लगाया जाएगा। वहीं GIS मैपिंग से संवेदनशील इलाकों की सटीक पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था से राहत और बचाव कार्य पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होंगे।
राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं की पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं से संबंधित पुस्तक का भी विमोचन किया। इस पुस्तक में विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं, विभागों की जिम्मेदारियां, संसाधनों का उपयोग और समन्वय व्यवस्था का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह दस्तावेज भविष्य में आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगा।
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कैबिनेट मंत्री समेत वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी, SDRF, NDRF, जल पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैठक में मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
मानसून में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में मानसून के दौरान सतर्कता, समय पर चेतावनी और बेहतर समन्वय ही किसी भी बड़ी आपदा के प्रभाव को कम कर सकता है। राज्य सरकार द्वारा Uttarakhand Disaster Management को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और जनभागीदारी के साथ मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम भविष्य में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करते हुए जन-धन की हानि को न्यूनतम स्तर पर रखा जाए।
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