Harsh Firing Case: करीब सात साल पुराने चर्चित Harsh Firing Case में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने गैर-इरादतन हत्या के मामले में उन्हें चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला नए साल के जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग से महिला डॉक्टर की मौत से जुड़ा है, जिसने उस समय पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
अदालत के फैसले के बाद विधायक को तुरंत न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह वर्ष 2019 से इस मामले में जमानत पर बाहर थे। कोर्ट का यह फैसला हर्ष फायरिंग जैसी घटनाओं पर सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है।
क्या है पूरा Harsh Firing Case?
यह मामला दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक फार्महाउस में आयोजित नए साल की पूर्व संध्या की पार्टी से जुड़ा है। पार्टी के दौरान कथित तौर पर विधायक राजू कुमार सिंह ने लाइसेंसी हथियार से हर्ष फायरिंग की थी। इसी दौरान चली गोली महिला डॉक्टर डॉ. अर्चना गुप्ता को जा लगी, जिससे उनकी मौत हो गई।
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घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने राजू सिंह को दोषी ठहराया।
कोर्ट ने किन धाराओं में सुनाई सजा?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने विधायक को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 (भाग-2) के तहत गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत भी उन्हें दोषी ठहराया गया, जो लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित है।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि जानलेवा गोली आरोपी द्वारा चलाई गई थी। भले ही हत्या का सीधा इरादा साबित नहीं हुआ, लेकिन हथियार का लापरवाही से उपयोग एक गंभीर अपराध है और इसके परिणामस्वरूप एक निर्दोष व्यक्ति की जान चली गई।
‘वैज्ञानिक जानकारी की कमी’ वाली दलील कोर्ट को नहीं कर सकी प्रभावित
सजा तय होने से पहले बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। विधायक की ओर से कहा गया कि घटना जानबूझकर नहीं हुई और उन्हें गोली के Parabolic Path यानी गोली की संभावित दिशा और उसके प्रभाव का वैज्ञानिक ज्ञान नहीं था।
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बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी ने किसी व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया था और न ही उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना था। उन्होंने इसे एक दुर्घटना बताते हुए कम सजा या प्रोबेशन का लाभ देने की मांग की।
हालांकि अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त आधार नहीं माना और कहा कि हथियार रखने वाले व्यक्ति से अधिक जिम्मेदारी और सावधानी की अपेक्षा की जाती है। सार्वजनिक या निजी समारोह में हथियार का प्रदर्शन और फायरिंग गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।
प्रोबेशन की मांग भी हुई खारिज
बचाव पक्ष ने Probation of Offenders Act, 1958 के तहत आरोपी को जेल की सजा के बजाय प्रोबेशन पर रिहा करने की भी मांग की थी। इसके लिए अदालत ने प्रोबेशन अधिकारी से रिपोर्ट भी मंगाई थी।
रिपोर्ट में यह जरूर सामने आया कि आरोपी किसी अन्य मामले में दोषी नहीं ठहराए गए हैं, लेकिन अदालत ने माना कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रोबेशन देना न्यायोचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की मौत जैसे गंभीर परिणाम वाले मामलों में केवल अच्छे आचरण के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
पत्नी समेत दो अन्य आरोपियों को मिली राहत
इस मामले में विधायक की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य लोगों पर सबूत मिटाने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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इसी आधार पर अदालत ने तीनों को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
हर्ष फायरिंग पर फिर उठे सवाल
इस फैसले के बाद एक बार फिर Harsh Firing Case को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शादी, पार्टी और अन्य समारोहों में हर्ष फायरिंग की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, जिनमें कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की अपील करती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोग हथियारों का प्रदर्शन प्रतिष्ठा या उत्साह दिखाने के लिए करते हैं। अदालत का यह फैसला ऐसे मामलों में भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है।
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राजनीतिक असर भी पड़ सकता है
चार साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजू कुमार सिंह की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि आगे की कानूनी प्रक्रिया और उच्च अदालत में अपील की संभावना बनी हुई है, लेकिन फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती, तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी कानूनी प्रभाव पड़ सकता है। वहीं भाजपा की ओर से इस फैसले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सख्त संदेश देने वाला फैसला
राउज एवेन्यू कोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि Harsh Firing Case जैसे मामलों में लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने यह संकेत दिया है कि हथियार रखने का अधिकार जिम्मेदारी के साथ जुड़ा होता है और उसकी अनदेखी किसी निर्दोष की जान ले सकती है। ऐसे मामलों में कानून का सख्ती से पालन ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
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