Yogi Rudrabhishek Gorakhnath: महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचे और गोरखनाथ मंदिर परिसर में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा कर रुद्राभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन जनता दरबार में करीब 150 फरियादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष निस्तारण के निर्देश दिए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री का यह दौरा दो दिनों में कई कार्यक्रमों से जुड़ा रहा महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर उन्होंने गोरखपुर के प्रमुख शिवालयों में दर्शन पूजन भी किया, जिससे शहर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी।
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बाबा गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक
महाशिवरात्रि के दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित शक्ति-स्थल शक्ति मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया और प्रदेशवासियों के आरोग्य, सुख-समृद्धि व लोकमंगल की कामना की। वहीं दूसरी ओर, यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, हर-हर महादेव के जयघोष और पूजा-अर्चना के वातावरण के बीच मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता दी यही कारण है कि पूजा के बाद जनता दर्शन में बड़ी संख्या में लोगों से संवाद किया गया।

प्रमुख शिवालयों में दर्शन-पूजन
खास बात यह है कि महाशिवरात्रि से पहले (शनिवार) मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के प्रमुख शिवालयों झारखंडी महादेव और मुक्तेश्वरनाथ में भी पूजा-अर्चना की। यहां उन्होंने दूधाभिषेक जलाभिषेक कर जनकल्याण की प्रार्थना की। इसी क्रम में सरकार की ओर से महाशिवरात्रि पर भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाओं को लेकर संदेश भी सामने आया सुरक्षा, स्वच्छता, चिकित्सा, ट्रैफिक और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर दिए जाने की बात कही गई।
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जनता दर्शन में 150 फरियादे सुनी गई (Yogi Rudrabhishek Gorakhnath)
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन में करीब 150 लोगों की शिकायतें मांगें सुनीं। इसके अलावा, कई फरियादियों ने जमीन विवाद, राजस्व संबंधी अड़चनें, पुलिस जांच से जुड़ी शिकायतें और कुछ मामलों में सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने जैसी बातें रखीं। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर प्रकरण का निस्तारण समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण हो, ताकि पीड़ितों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
‘चिंता मत करें समाधान का भरोसा’
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने फरियादियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्या सुनी जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि शिकायतों पर संवेदनशीलता से कार्रवाई हो। इसी क्रम में कई मामलों में प्रार्थना पत्र संबंधित विभागीय अधिकारियों को सौंपकर ऑन द स्पॉट निर्देश जारी किए गए, ताकि फील्ड-लेवल पर कार्रवाई जल्दी शुरू हो सके।
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अधिकारियों को सख्त निर्देश (Yogi Rudrabhishek Gorakhnath)
जनता दर्शन का सबसे अहम प्रशासनिक संदेश यह रहा कि मुख्यमंत्री ने जांच रिपोर्टिंग में लापरवाही को लेकर सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकरण में गलत जांच रिपोर्ट लगाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में हीलाहवाली या ढिलाई स्वीकार नहीं होगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी।
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जमीन कब्जे और राजस्व विवादों पर फोकस (Yogi Rudrabhishek Gorakhnath)
खास बात यह है कि जनता दर्शन में जमीन कब्जा, सीमांकन, पैमाइश, नामांतरण जैसी राजस्व प्रकृति की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों में विधिसम्मत और ठोस कार्रवाई पर जोर दिया ताकि पीड़ित पक्ष को वास्तविक राहत मिले और विवाद लंबे समय तक न खिंचे। इसके अलावा पुलिस से जुड़े मामलों में भी निष्पक्ष जांच और सही रिपोर्टिंग पर जोर देकर उन्होंने प्रशासनिक जवाबदेही को रेखांकित किया।
जनता दर्शन में दिखा मानवीय पहलू (Yogi Rudrabhishek Gorakhnath)
जनता दर्शन के दौरान कुछ फरियादियों के साथ आए छोटे बच्चों से मुख्यमंत्री ने बातचीत की, उन्हें स्नेह दिया और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया यह दृश्य भी मौजूद लोगों के बीच चर्चा में रहा। वहीं दूसरी ओर, यह संदेश भी गया कि शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों की परिस्थितियों को समझने और संवेदनशीलता के साथ मदद करने की अपेक्षा भी प्रशासन से की गई है।
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धार्मिक आस्था और प्रशासनिक सक्रियता का डबल मॉडल (Yogi Rudrabhishek Gorakhnath)
महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व पर एक तरफ मुख्यमंत्री का मंदिरों में पूजा-अर्चना का कार्यक्रम रहा, तो दूसरी तरफ जनता दर्शन में समस्याओं का समाधान कराने की पहल दिखाई दी। इसके अलावा, महाशिवरात्रि पर प्रदेश भर में श्रद्धालुओं की भीड़ और आयोजन देखते हुए शासन ने व्यवस्थाओं पर फोकस की बात भी कही जिसका असर स्थानीय प्रशासन की तैयारियों में भी दिखाई देता है।
जनता दर्शन को औपचारिकता नहीं, समाधान का माध्यम
इसी क्रम में मुख्यमंत्री का संदेश साफ रहा कि जनता दर्शन केवल मुलाकात भर नहीं है, बल्कि शिकायतों की जड़ तक पहुंचकर समाधान सुनिश्चित करने का माध्यम है। इसलिए अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे निस्तारण की गुणवत्ता, समयसीमा और पारदर्शिता तीनों पर समान ध्यान दें।
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अब जिम्मेदारी अधिकारियों पर (Yogi Rudrabhishek Gorakhnath)
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब संबंधित विभागों राजस्व, पुलिस, विकास, समाज कल्याण आदि की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे शिकायतों का फॉलो-अप ट्रैक करें, रिपोर्टिंग में तथ्यात्मकता रखें और पीड़ित को स्पष्ट अपडेट देते रहें। वहीं दूसरी ओर, जनता दर्शन जैसे मंच पर सीधे संवाद होने से यह भी सामने आता है कि किन क्षेत्रों में बार बार शिकायतें आती हैं जैसे भूमि विवाद, राजस्व प्रक्रियाएं, और योजनाओं की डिलीवरी जिस पर सिस्टम सुधार की जरूरत बनी रहती है। खास बात यह है कि गलत रिपोर्ट लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी प्रशासनिक तंत्र को क्वालिटी चेक की तरफ ले जाती है यानी केवल निस्तारण नहीं, बल्कि न्यायोचित निस्तारण।
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