Global Military Spending 2025: दुनिया एक बार फिर तेज़ी से सैन्यीकरण की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन की लड़ाई ने वैश्विक सुरक्षा समीकरण बदल दिए हैं। इसी बीच Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की नई रिपोर्ट ने दुनिया भर में बढ़ते रक्षा बजट को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं।
Global Military Spending 2025 अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च 2887 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। लगातार 11वें साल वैश्विक सैन्य खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दुनिया की जीडीपी का बड़ा हिस्सा हथियारों पर खर्च
SIPRI रिपोर्ट बताती है कि 2025 में दुनिया की कुल GDP का लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सा रक्षा और सैन्य जरूरतों पर खर्च किया गया।
Global Military Spending 2025 में सबसे ज्यादा योगदान अमेरिका, चीन और रूस का रहा। इन तीनों देशों ने मिलकर लगभग 1480 अरब डॉलर खर्च किए, जो दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 51 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में अधिकांश देश सुरक्षा और सैन्य ताकत को आर्थिक विकास से भी ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं।
भारत बना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश
Global Military Spending 2025 रिपोर्ट में भारत ने भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। भारत ने इस वर्ष अपने रक्षा बजट में 8.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी की और कुल 92.1 अरब डॉलर सैन्य क्षेत्र पर खर्च किए।
इसके साथ ही भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। भारत का फोकस आधुनिक हथियार, सीमा सुरक्षा, नौसेना विस्तार और स्वदेशी रक्षा तकनीक पर लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा तनाव तथा हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भारत के रक्षा बजट बढ़ने की बड़ी वजह है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध ने बदल दी वैश्विक तस्वीर
Global Military Spending 2025 में सबसे बड़ा असर रूस-यूक्रेन युद्ध का दिखाई दिया। युद्ध के चौथे वर्ष में भी दोनों देशों ने अपने सैन्य खर्च में भारी बढ़ोतरी की।
रूस ने अपना रक्षा बजट 190 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया, जो उसकी GDP का 7.5 प्रतिशत है। दूसरी ओर यूक्रेन ने 84.1 अरब डॉलर सैन्य खर्च किए, जो उसकी कुल GDP का करीब 40 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के कारण यूरोप में रक्षा बजट तेजी से बढ़ा है और कई देशों ने अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यूरोप और NATO देशों में रक्षा खर्च बढ़ा
SIPRI रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में यूरोप का कुल सैन्य खर्च 14 प्रतिशत बढ़कर 864 अरब डॉलर पहुंच गया। Global Military Spending 2025 में NATO देशों की भूमिका भी बेहद अहम रही। NATO के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 1581 अरब डॉलर खर्च किए, जो दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 55 प्रतिशत है।
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जर्मनी ने पहली बार शीत युद्ध के बाद अपनी GDP का 2 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रक्षा बजट में लगाया। वहीं स्पेन ने भी सैन्य खर्च में 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि की है।
चीन लगातार बढ़ा रहा सैन्य ताकत
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने भी अपने रक्षा बजट में बड़ी वृद्धि की है। Global Military Spending 2025 के तहत चीन ने 336 अरब डॉलर खर्च किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.4 प्रतिशत अधिक है। यह लगातार 31वां साल है जब चीन के सैन्य बजट में बढ़ोतरी हुई है।
चीन का फोकस नौसेना विस्तार, मिसाइल तकनीक, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा सिस्टम पर है। इसके चलते एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
जापान और ताइवान ने भी बढ़ाया बजट
एशिया और ओशिनिया क्षेत्र में 2009 के बाद सबसे तेज रक्षा खर्च वृद्धि दर्ज की गई। जापान ने अपना सैन्य बजट बढ़ाकर 62.2 अरब डॉलर कर दिया, जो 1958 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं ताइवान ने भी चीन के बढ़ते सैन्य अभ्यासों को देखते हुए रक्षा खर्च में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की। Global Military Spending 2025 में एशिया का कुल रक्षा बजट 681 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
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मध्य पूर्व में तनाव बरकरार
मध्य पूर्व में भी सैन्य खर्च लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। हालांकि इजराइल ने हमास के साथ संघर्ष कम होने के बाद अपने रक्षा खर्च में थोड़ी कटौती की है।
तुर्की ने अपने सैन्य अभियानों के कारण रक्षा बजट बढ़ाया, जबकि ईरान का सैन्य खर्च लगातार दूसरे वर्ष घटा है। विशेषज्ञों का कहना है कि Global Military Spending 2025 यह संकेत देता है कि दुनिया के अधिकांश क्षेत्र अब लंबे समय तक अस्थिरता और सुरक्षा संकट के दौर से गुजर सकते हैं।
हथियारों की होड़ या सुरक्षा की मजबूरी?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में बढ़ता सैन्य खर्च सिर्फ सुरक्षा रणनीति नहीं बल्कि भू-राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी बन चुका है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इतनी बड़ी रकम सामाजिक विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा से ध्यान हटाकर हथियारों की दौड़ में झोंकी जा रही है।
Global Military Spending 2025 की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति में सैन्य ताकत सबसे अहम भूमिका निभा सकती है। अब यह भविष्य तय करेगा कि यह बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाएगी या नए बड़े संघर्षों की ओर ले जाएगी।
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