Manipur Violence: मणिपुर में जारी तनाव और हिंसा के बीच एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कांगपोकपी जिले में चर्च कॉन्फ्रेंस से लौट रहे प्रतिनिधियों के काफिले पर अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने हमला कर दिया। इस हमले में तीन पादरियों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल है। वहीं, Manipur Violence को लेकर एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यह हमला उस समय हुआ जब चर्च से जुड़े प्रतिनिधि लम्का में आयोजित यूनाइटेड बैपटिस्ट चर्च कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के बाद वापस लौट रहे थे। हमलावरों ने रास्ते में घात लगाकर उनके वाहनों को निशाना बनाया। घटना के बाद कुकी-जो काउंसिल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस हमले की कड़ी निंदा की है।
चर्च प्रतिनिधियों के काफिले पर हुआ हमला
जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह करीब 11 बजे कांगपोकपी जिले के कोटजिम और कोटलेन इलाकों के बीच यह हमला हुआ। प्रतिनिधियों का काफिला चर्च सम्मेलन से लौट रहा था, तभी अज्ञात उग्रवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार जिन वाहनों पर हमला किया गया, उन पर Mission and Evangelist लिखा हुआ था। इसके बावजूद हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। प्रारंभिक जानकारी में कुछ उग्रवादी संगठनों के नाम सामने आए हैं, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना ने एक बार फिर Manipur Violence की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोग भी अब सुरक्षित नहीं माने जा रहे।
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हमले में तीन पादरियों की मौत
हमले में जिन धार्मिक नेताओं की मौत हुई है, उनकी पहचान रेव. वी. सिटलहौ, रेव. कैगौलुन ल्होवुम और पादरी पाओगौलन सिटलहौ के रूप में हुई है। तीनों चर्च और सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे और समुदाय में उनकी अच्छी पहचान मानी जाती थी।
बताया जा रहा है कि गोलीबारी इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में घायल हुए पांच अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज चल रहा है। प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।
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Kuki-Zo Council ने जताया गहरा दुख
हमले के बाद Kuki-Zo Council ने बयान जारी कर घटना की कड़ी निंदा की। परिषद ने इसे अमानवीय और क्रूर हमला बताया। बयान में कहा गया कि धार्मिक नेताओं को निशाना बनाना किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक है।
काउंसिल ने खास तौर पर रेव. वी. सिटलहौ की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कुकी और नागा समुदायों के बीच शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वे लगातार संवाद और शांति मिशन के जरिए दोनों समुदायों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे। परिषद ने कहा कि Manipur Violence के बीच ऐसे लोगों की हत्या शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा झटका है। संगठन ने सरकार से दोषियों की जल्द पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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शांति मिशन से जुड़े थे मृतक पादरी
स्थानीय लोगों के मुताबिक रेव. वी. सिटलहौ लंबे समय से चर्च और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयासों में लगे हुए थे। उन्होंने नागालैंड जॉइंट क्रिश्चियन फोरम और अन्य धार्मिक संगठनों के माध्यम से कई शांति मिशन चलाए थे।
माना जा रहा है कि मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष के बीच वे संवाद कायम करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में उनकी हत्या ने कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों को झकझोर दिया है। कई चर्च संगठनों ने इस हमले को मानवता पर हमला करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
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Manipur Violence पर फिर उठे सवाल
मणिपुर पिछले लंबे समय से जातीय हिंसा और उग्रवादी गतिविधियों से जूझ रहा है। राज्य के कई जिलों में अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं के कारण आम लोगों के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक संगठनों में भी भय का माहौल बना हुआ है।
इस ताजा हमले के बाद एक बार फिर Manipur Violence को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षा रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि धार्मिक नेताओं तक को निशाना बनाया जा रहा है तो हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा बहाल नहीं होगा और उग्रवादी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी, तब तक राज्य में स्थायी शांति कायम करना मुश्किल रहेगा।
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सरकार से तेज जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। Kuki-Zo Council ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने और हमलावरों को कड़ी सजा दिलाने की अपील की है। संगठन ने कहा कि धार्मिक नेताओं और शांति दूतों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है। इससे न केवल समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है बल्कि शांति प्रयासों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हुई हैं। इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, पूरे राज्य में Manipur Violence को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्क कर दी गई है।
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