Fuel Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की आंच अब भारत की आम जनता तक पहुंच चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में ईंधन की नई कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। Fuel Price Hike अब सिर्फ ट्रांसपोर्ट तक सीमित मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसका असर रसोई, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी तक दिखाई देने लगा है।
महानगरों में नई कीमतों ने बढ़ाई लोगों की चिंता
नई दरों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.81 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 106.68 रुपए और चेन्नई में 103.67 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में भी तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। Fuel Price Hike की वजह से निजी वाहन चलाने वालों के साथ-साथ टैक्सी और ऑटो चालकों की लागत भी तेजी से बढ़ गई है। मुंबई, जयपुर, लखनऊ और दिल्ली जैसे शहरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों ने नाराजगी जताई। कई लोगों का कहना है कि पहले से महंगे होते राशन, बिजली और स्कूल फीस के बीच अब ईंधन महंगा होने से घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
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दूध, गैस और CNG के बाद अब ईंधन ने बढ़ाई मुश्किलें
बीते कुछ दिनों में सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि कई जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ी हैं। दिल्ली और मुंबई में CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो तक बढ़ाए गए हैं। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग 1000 रुपए तक की वृद्धि हो चुकी है। वहीं अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि Fuel Price Hike का असर आने वाले दिनों में और ज्यादा देखने को मिल सकता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल, सब्जियां, राशन और दवाइयों तक की कीमतों में इजाफा हो सकता है। यानी महंगाई की यह लहर धीरे-धीरे हर घर तक पहुंच रही है।
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डीजल महंगा होने से बढ़ेगा मालभाड़ा
भारत में माल परिवहन का बड़ा हिस्सा डीजल आधारित ट्रकों और वाहनों पर निर्भर करता है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर मालभाड़े पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट कंपनियां पहले ही किराया बढ़ाने के संकेत दे चुकी हैं। Fuel Price Hike के बाद दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, अनाज और दैनिक उपयोग की चीजें महंगी हो सकती हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो किराए में और इजाफा करना पड़ेगा।
किसानों और खेती की लागत पर भी असर
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर खेती-किसानी पर भी साफ दिखाई देगा। ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और कृषि उपकरणों में डीजल का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। ऐसे में Fuel Price Hike किसानों की लागत बढ़ाने वाला बड़ा कारण बन सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डीजल लगातार महंगा होता रहा तो आने वाले सीजन में फसलों की लागत बढ़ेगी और इसका असर बाजार में खाद्यान्न कीमतों पर भी दिखाई देगा। यानी खेती से लेकर थाली तक महंगाई का असर महसूस किया जा सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। पश्चिम एशिया के होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। युद्ध और तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। इसी वजह से Fuel Price Hike देखने को मिला है।
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विपक्ष ने सरकार को घेरा, सियासत भी तेज
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई का बोझ जनता पर डाला जा रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह फैसला जरूरी हो गया था। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।
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क्या आने वाले दिनों में और बढ़ेंगे दाम?
ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ तो Fuel Price Hike आगे भी जारी रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में तेल कंपनियां भविष्य में फिर कीमतें बढ़ा सकती हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कुछ सप्ताह भारत के लिए बेहद अहम होंगे। अगर वैश्विक हालात सुधरे तो कीमतों में राहत मिल सकती है, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने पर महंगाई और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
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आम आदमी के लिए बढ़ती चुनौती
देश में बढ़ती महंगाई अब मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने रोजमर्रा की जिंदगी का खर्च बढ़ा दिया है। Fuel Price Hike का असर अब सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घर की रसोई, खेती, ट्रांसपोर्ट और कारोबार तक पहुंच चुका है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द कोई राहत देने वाला कदम उठाएगी, ताकि महंगाई की इस मार से कुछ राहत मिल सके।
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