Uniform Civil Code Bill 2026: असम विधानसभा ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए Uniform Civil Code Bill 2026 को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के पास होने के बाद असम देश का तीसरा राज्य बन गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। राज्य सरकार का दावा है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
126 सदस्यीय विधानसभा में इस बिल को भारी बहुमत से पारित किया गया। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के 102 विधायकों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि विपक्षी दलों ने बिल का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। इसके बावजूद सरकार ने बहुमत के दम पर विधेयक को पास करा लिया।
विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर बनेगा एक समान कानून
Uniform Civil Code Bill 2026 का उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग कानूनों की जगह एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं को न्याय मिलेगा और कानूनी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
Uniform Civil Code Bill 2026 कानून के तहत बहुविवाह पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्टर कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति इसका पालन नहीं करता है तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बिल में कई मामलों में जुर्माना और जेल की सजा का भी प्रावधान रखा गया है।
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हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
विधानसभा में बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि Uniform Civil Code की अवधारणा नई नहीं है, बल्कि इसकी मांग सबसे पहले कांग्रेस नेताओं ने ही की थी। उन्होंने दावा किया कि 1925 में कांग्रेस ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया था और बाद में जवाहरलाल नेहरू ने भी इस विचार का समर्थन किया था।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अब संविधान की भावना के बजाय धार्मिक राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है और असम सरकार उसी दिशा में काम कर रही है। सरमा ने यह भी कहा कि विपक्ष केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहा है और समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
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आदिवासी समुदाय को कानून से बाहर रखा गया
सरकार ने Uniform Civil Code Bill 2026 कानून के दायरे से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आदिवासी समुदायों की अपनी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति-रिवाज हैं, जिन्हें सरकार सम्मान देना चाहती है।
उन्होंने कहा कि कई आदिवासी समाजों में पहले से ही महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलता है और वहां बहुविवाह जैसी प्रथाएं नहीं हैं। इसी कारण सरकार ने फैसला लिया कि उन पर Uniform Civil Code Bill लागू नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे सांस्कृतिक विविधता का सम्मान बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे कानून में असमानता मान रहे हैं।
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विपक्ष ने उठाए कई सवाल
विपक्षी दलों ने इस कानून को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि इतना बड़ा सामाजिक और कानूनी बदलाव बिना व्यापक चर्चा और जनसुनवाई के लागू नहीं किया जाना चाहिए था।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि Uniform Civil Code Bill समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है और इससे संवैधानिक संतुलन प्रभावित होगा। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं की सुरक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए बेहद जरूरी है।
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महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार का बड़ा दावा
सरकार का दावा है कि Uniform Civil Code Bill 2026 महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा। खासतौर पर तलाक, संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में महिलाओं को अधिक सुरक्षा और कानूनी स्पष्टता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि कई धार्मिक कानूनों में महिलाओं के साथ असमान व्यवहार होता है और यही वजह है कि समान नागरिक संहिता समय की जरूरत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
कानूनी और राजनीतिक बहस तेज
असम में Uniform Civil Code Bill पारित होने के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञ भी इस कानून पर अपनी राय दे रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान व्यवस्था लागू करना संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है। वहीं कुछ लोग इसे भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के खिलाफ मानते हैं। आने वाले दिनों में इस कानून को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले को अदालत तक ले जा सकते हैं।
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देश की राजनीति में फिर चर्चा में आया Uniform Civil Code
असम में Uniform Civil Code Bill पास होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। भाजपा लंबे समय से देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने की वकालत करती रही है। अब असम के इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी इस विषय पर राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Uniform Civil Code देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का बड़ा मुद्दा बना रहेगा। असम सरकार का यह कदम भविष्य की राष्ट्रीय बहस की दिशा तय कर सकता है।
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