Ritabrata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (TMC) के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले बागी गुट को विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता दे दी है। इसके साथ ही ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा भी मिल गया है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है और आने वाले समय में इसका असर प्रदेश की सत्ता और विपक्ष दोनों पर पड़ सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने बागी गुट को दी मान्यता
पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष Rabindranath Bose ने बागी गुट की ओर से प्रस्तुत दावों और समर्थन पत्रों की समीक्षा के बाद उन्हें विधायक दल के रूप में मान्यता प्रदान की। जानकारी के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मिले थे और उन्होंने दावा किया था कि उनके साथ बहुमत में विधायक मौजूद हैं तथा वही पार्टी का वास्तविक समूह हैं।
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बागी गुट की ओर से 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र भी सौंपा गया था। इसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने नए विधायक दल को मान्यता देते हुए Ritabrata Banerjee को विपक्ष का नेता घोषित कर दिया। इसके अलावा अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बंगाल की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा प्रभावित हो सकती है। विधानसभा में किसी भी अलग गुट को दलबदल विरोधी कानून से संरक्षण पाने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।
चूंकि TMC के कुल विधायकों की संख्या 80 बताई जा रही है, ऐसे में दो-तिहाई का आंकड़ा 54 के आसपास बैठता है। बागी गुट का दावा है कि उसके पास 58 से अधिक विधायकों का समर्थन है, जिसके चलते उसे कानूनी और संसदीय आधार पर मान्यता मिल सकी।
ममता बनर्जी के लिए बढ़ी चुनौती
इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से ही संगठन के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।
अब जब बड़ी संख्या में विधायक बागी गुट के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, तो इससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
धरने और बैठकों से दूर रहे कई वरिष्ठ नेता
दिलचस्प बात यह रही कि हाल के दिनों में आयोजित कई महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रमों में बागी गुट के विधायक शामिल नहीं हुए। वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले कई वरिष्ठ नेता भी विधानसभा में हुई बैठक से दूरी बनाए रहे।
इससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर मतभेद केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संगठन के अलग-अलग स्तरों पर भी असंतोष मौजूद हो सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पार्टी नेतृत्व की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Ritabrata Banerjee ने ममता को बताया अपना नेता
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच ऋतब्रत बनर्जी ने एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि उनका समूह विधानसभा में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगा और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत टकराव नहीं है। Ritabrata Banerjee ने कहा कि उनकी नेता आज भी ममता बनर्जी ही हैं और उन्हें उम्मीद है कि वह राज्य के हित में मार्गदर्शन देती रहेंगी। इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में नई बहस और नए समीकरण पैदा कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी गुट को मान्यता मिलने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि सत्तारूढ़ दल इस चुनौती से कैसे निपटता है और विपक्ष की नई भूमिका राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है। फिलहाल इतना तय है कि बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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