Ghaziabad Pickle Factory Raid: Food safety officials destroying 3400 kg of rotten pickle found in unhygienic buffalo shed-based factories.
Ghaziabad Pickle Factory Raid: गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने एक ऐसे कारोबार का पर्दाफाश किया है, जिसने दिल्ली-एनसीआर के लाखों उपभोक्ताओं की सेहत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खोड़ा क्षेत्र में चल रही दो अचार निर्माण इकाइयों पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने पाया कि भैंसों के तबेले के बीच अचार तैयार किया जा रहा था और उसी वातावरण में खाद्य सामग्री को स्टोर भी किया जा रहा था। जांच में हजारों किलो सड़ा-गला अचार बरामद हुआ, जिसे मौके पर ही नष्ट करा दिया गया।
Ghaziabad Pickle Factory Raid मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह अचार दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और आसपास के इलाकों के बाजारों तक पहुंचाया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
DM के निर्देश पर चला विशेष अभियान
जानकारी के अनुसार गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने खोड़ा क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ इकाइयों में बेहद खराब गुणवत्ता का अचार तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा है।
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इन्हीं शिकायतों के आधार पर अधिकारियों ने पहले शनि बाजार क्षेत्र स्थित एक अचार फैक्ट्री में छापा मारा। यहां पहुंचते ही टीम को कई अनियमितताएं दिखाई दीं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बड़ी मात्रा में अचार खराब हो चुका था, लेकिन उसे अभी भी भंडारित किया गया था।
पहली फैक्ट्री में मिला हजारों किलो खराब अचार
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने पवन सिंह नामक संचालक की इकाई का निरीक्षण किया। यहां लगभग 20 ड्रमों में रखा करीब 1000 किलो आम और नींबू का अचार खराब हालत में मिला। अचार की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि उसे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त माना गया।
खाद्य सुरक्षा टीम ने मौके पर ही पूरे स्टॉक को नष्ट कराया। इसके अलावा लगभग 180 किलो मिक्स अचार और 8800 किलो नमक भी जब्त किया गया। अधिकारियों ने नमक और अन्य कच्चे माल के नमूने भी जांच के लिए भेजे हैं।
दूसरी यूनिट में मिला और भी बड़ा गड़बड़झाला
पहली कार्रवाई के बाद टीम मास्टर पार्क क्षेत्र में स्थित दूसरी यूनिट पर पहुंची, जिसे स्थानीय स्तर पर “राहुल अचार वाले” के नाम से जाना जाता है। यहां हालात और भी चिंताजनक पाए गए।
निरीक्षण के दौरान लगभग 2000 किलो नींबू का अचार और 400 किलो मिक्स अचार सड़ी-गली अवस्था में मिला। अधिकारियों के अनुसार अचार से तेज दुर्गंध आ रही थी और उसे ऐसे वातावरण में रखा गया था जहां साफ-सफाई के न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था।
स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरा स्टॉक तत्काल नष्ट करा दिया गया। विभाग ने फैक्ट्री के संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है।
Ghaziabad Pickle Factory Raid मामले में तबेले के बीच बन रहा था खाद्य पदार्थ
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जिन परिसरों में अचार तैयार किया जा रहा था, वहीं भैंसों का तबेला भी संचालित था। खाद्य सामग्री, मसाले और तैयार अचार पशुओं के आसपास रखे गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का वातावरण खाद्य पदार्थों को बैक्टीरिया, फंगस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों से संक्रमित कर सकता है। ऐसे उत्पादों का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग, पेट संबंधी संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से यह मामला अब केवल अनियमितता का नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर खतरे का विषय बन गया है।
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सेहत के साथ खिलवाड़ पर सख्त रुख
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी खाद्य उत्पाद को तैयार करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई निर्माता स्वच्छता नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का कहना है कि अचार, मसाले और अन्य खाद्य उत्पाद सीधे लोगों की थाली तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिन इकाइयों में कार्रवाई की गई है, वहां से लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
रिटायर्ड पुलिस अधिकारी का नाम भी आया सामने
प्राथमिक जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस के एक सेवानिवृत्त दरोगा का नाम भी चर्चा में आया है। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से किसी की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन इकाइयों का संचालन कौन कर रहा था, उत्पाद कहां-कहां सप्लाई किए जा रहे थे और क्या लाइसेंस एवं अन्य आवश्यक अनुमतियां नियमों के अनुसार प्राप्त की गई थीं।
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Ghaziabad Pickle Factory Raid मामले से उठे बड़े सवाल
यह कार्रवाई एक बार फिर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरी बाजारों में खाद्य उत्पादों की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन कुछ कारोबारी मुनाफे के लिए गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े उपभोक्ता क्षेत्र में यदि अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार खाद्य सामग्री खुलेआम बिक रही है तो नियमित निगरानी और सख्त जांच की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
उपभोक्ताओं को भी रहना होगा सतर्क
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को भी ब्रांड, पैकेजिंग, निर्माण स्थल और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। बेहद सस्ते या बिना उचित लेबल वाले खाद्य उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए।
गाजियाबाद में सामने आया Ghaziabad Pickle Factory Raid का यह मामला प्रशासन के लिए चेतावनी है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। वहीं उपभोक्ताओं के लिए यह संदेश है कि भोजन से जुड़ी चीजों में सतर्कता बरतना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
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