E-Registration System Protest in Sector-33 Noida while burning an effigy and raising slogans against the new registration policy.
E-Registration System Protest: नोएडा में लागू की जा रही E-Registration System Protest को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। सेक्टर-33 स्थित नोएडा बार एसोसिएशन द्वारा शुरू की गई हड़ताल अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुकी है। आंदोलन के सातवें दिन अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं ने एकजुट होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रविन्द्र जायसवाल का प्रतीकात्मक पुतला भी फूंका गया।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-पंजीकरण प्रणाली पारंपरिक पंजीकरण व्यवस्था से जुड़े हजारों लोगों के रोजगार और आजीविका पर सीधा असर डाल सकती है। इसी कारण E-Registration System Protest लगातार व्यापक होता जा रहा है।
अध्यक्ष प्रवीन डेढ़ा के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
नोएडा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीन डेढ़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और ई-पंजीकरण व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार तकनीकी बदलाव के नाम पर ऐसी व्यवस्था लागू कर रही है, जिससे वर्षों से पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े लोगों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उनका कहना था कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे जुड़े सभी हितधारकों से चर्चा करना आवश्यक है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्तमान E-Registration System Protest केवल वकीलों का आंदोलन नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज है जो पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से अपना जीवनयापन करते हैं।
ई-पंजीकरण व्यवस्था को लेकर क्या हैं मुख्य आपत्तियां?
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों का कहना है कि ई-पंजीकरण प्रणाली लागू होने से दस्तावेजों की तैयारी, सत्यापन और पंजीकरण से जुड़े कई पारंपरिक कार्य प्रभावित होंगे। उनका दावा है कि इससे हजारों लोगों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उनका यह भी कहना है कि डिजिटल व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने से पहले उसकी व्यवहारिकता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए। कई अधिवक्ताओं ने चिंता जताई कि ग्रामीण और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले नागरिकों को भी इससे कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण E-Registration System Protest के दौरान सरकार से पुनर्विचार की मांग की जा रही है।
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बैनामा लेखक और स्टाम्प विक्रेता भी आंदोलन में शामिल
इस आंदोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि केवल अधिवक्ता ही नहीं, बल्कि बैनामा लेखक और स्टाम्प विक्रेता भी इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। उनका कहना है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था से उनके व्यवसाय पर भी सीधा असर पड़ने की आशंका है।
प्रदर्शन में शामिल स्टाम्प विक्रेताओं ने कहा कि वर्षों से स्थापित व्यवस्था को अचानक बदलने से हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने सरकार से चरणबद्ध तरीके से सुधार लागू करने की मांग की।
आंदोलनकारियों का मानना है कि यदि सरकार संबंधित पक्षों से संवाद स्थापित करे तो व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है। यही मांग E-Registration System Protest का प्रमुख आधार बनी हुई है।
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सरकार से संवाद की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे तकनीकी विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे प्रभावित वर्गों की राय लेना आवश्यक है। उनका कहना है कि सरकार को अधिवक्ताओं, स्टाम्प विक्रेताओं, बैनामा लेखकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ औपचारिक बैठक करनी चाहिए।
आंदोलनकारियों ने यह भी मांग की कि ई-पंजीकरण व्यवस्था को फिलहाल स्थगित किया जाए और व्यापक समीक्षा के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाए। E-Registration System Protest के दौरान कई वक्ताओं ने कहा कि संवाद के अभाव में असंतोष बढ़ रहा है, जिसे समय रहते दूर करना जरूरी है।
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सात दिन से ठप है कामकाज
हड़ताल के कारण पंजीकरण से जुड़े कई कार्य प्रभावित हुए हैं। बार एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सात दिनों से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की भागीदारी यह संकेत दे रही है कि मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में इससे जुड़े वर्गों के बीच चिंता का विषय बन चुका है।
संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प
नोएडा बार एसोसिएशन ने साफ शब्दों में कहा है कि आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। सभी सदस्यों ने एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। भविष्य की रणनीति को लेकर जल्द ही संगठन की बैठक भी आयोजित की जाएगी।
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आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजरें सरकार और बार एसोसिएशन के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित होता है तो समाधान की संभावना बन सकती है। लेकिन यदि गतिरोध जारी रहा तो E-Registration System Protest आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
नोएडा में चल रहा यह आंदोलन अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रोजगार, पारंपरिक व्यवस्था और तकनीकी बदलाव के बीच संतुलन तलाशने की बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और आंदोलनकारियों की रणनीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।
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