Muzaffarnagar Bonded Labour Case: Police and labour officials rescue workers from a disposable plate factory in Muzaffarnagar after alleged bonded labour and abuse.
Muzaffarnagar Bonded Labour : में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की एक दोना-पत्तल बनाने वाली फैक्ट्री से कई मजदूरों को मुक्त कराया गया है। पुलिस के अनुसार, तितावी थाना क्षेत्र के मढ़ी गांव में स्थित फैक्ट्री पर प्रशासन, श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के बाद मजदूरों को परिसर से बाहर निकाला गया और उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। विस्तृत मीडिया रिपोर्टों में 13 मजदूरों को मुक्त कराने की बात कही गई है, जबकि समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट में यह संख्या 12 बताई गई है।
Muzaffarnagar Bonded Labour सामने आने के बाद फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान पर मजदूरों को बंधक बनाने, वेतन नहीं देने और जबरन काम कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। ये सभी फिलहाल आरोप हैं और इनकी अंतिम पुष्टि पुलिस जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, फैक्ट्री संचालक फरार बताया गया है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। मामले में शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान नाम के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
एक मजदूर के भागकर पहुंचने के बाद खुला मामला
Muzaffarnagar Bonded Labour Case का खुलासा उस समय हुआ, जब फैक्ट्री में काम करने वाला एक मजदूर कथित रूप से परिसर से बाहर निकलने में सफल रहा। उसने पुलिस के पास पहुंचकर फैक्ट्री के अंदर मजदूरों की स्थिति और उनके साथ हो रहे कथित व्यवहार की जानकारी दी। इसके बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग की टीम बनाई गई तथा फैक्ट्री परिसर में छापेमारी की गई।

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Muzaffarnagar Bonded Labour Case में मुक्त कराए गए मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अच्छे वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का वादा कर फैक्ट्री में बुलाया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, मजदूरों को प्रतिमाह 8 हजार से 12 हजार रुपये वेतन देने की बात कही गई थी। आरोप है कि फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन, आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए गए तथा उन्हें बाहर नहीं जाने दिया गया।
मजदूरों ने लगाए मारपीट और भोजन नहीं देने के आरोप
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में मजदूरों ने पुलिस और मीडिया को बताया कि उन्हें कथित रूप से नियमित मजदूरी नहीं दी जाती थी। आरोप है कि कई बार उन्हें लंबे समय तक भूखा रखा गया और दिनभर में केवल एक रोटी तथा नमक दिया जाता था। एक मजदूर ने यह भी दावा किया कि भोजन के नाम पर बेहद खराब गुणवत्ता की रोटी दी जाती थी। इन आरोपों की जांच पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
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Muzaffarnagar Bonded Labour Case में मजदूरों के शरीर पर चोट और यातना के निशान मिलने की बात अधिकारियों ने कही है। भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुक्त कराए गए लोगों के शरीर पर चोटों के स्पष्ट निशान दिखाई दिए। वहीं मजदूरों ने आरोप लगाया कि काम करने से इनकार करने, भोजन मांगने या बाहर जाने की कोशिश करने पर उन्हें डंडों और बेल्ट से पीटा जाता था।
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में कुछ मजदूरों ने नुकीली वस्तु से हमला किए जाने और कुत्तों से डराने के आरोप भी लगाए हैं। इन गंभीर दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, मजदूरों के बयान और फैक्ट्री से मिले सामान के आधार पर आगे की जांच शुरू की है।
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पिटबुल कुत्तों से डराने का आरोप
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में यह आरोप भी सामने आया है कि फैक्ट्री में दो पिटबुल कुत्ते रखे गए थे। मजदूरों के अनुसार, एक कुत्ता गेट के अंदर और दूसरा बाहर रखा जाता था। उनका कहना है कि कुत्तों और मारपीट के डर से कोई भी मजदूर परिसर से भागने का साहस नहीं कर पाता था। हालांकि कुत्तों का इस्तेमाल मजदूरों पर हमला कराने के लिए किया गया था या केवल सुरक्षा के लिए रखा गया था, इसकी जांच पुलिस कर रही है।
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में मजदूर कितने समय से फैक्ट्री में रह रहे थे, इसे लेकर भी रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में लगभग दो वर्षों तक बंधक बनाए जाने का दावा किया गया है, जबकि एक विस्तृत रिपोर्ट में करीब दस महीने का उल्लेख है। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी एक अवधि को अंतिम और प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
अलग-अलग राज्यों और नेपाल से लाए गए थे मजदूर
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में मुक्त कराए गए मजदूर उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों के बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में नेपाल के एक मजदूर के भी फैक्ट्री में होने की जानकारी दी गई है। मुक्त कराए गए लोगों में दो नाबालिगों के शामिल होने की बात भी सामने आई है, जिनकी उम्र 16 और 17 वर्ष बताई गई है।
Muzaffarnagar Bonded Labour Case से आगरा के एक मजदूर का संबंध होने की बात सोशल मीडिया और स्थानीय विवरणों में कही जा रही है, लेकिन उपलब्ध प्रमुख पुलिस-आधारित रिपोर्टों में आगरा निवासी मजदूर की पहचान स्पष्ट रूप से पुष्ट नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को आधिकारिक पुष्टि मिलने तक तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
पुलिस ने शुरू की फरार संचालक की तलाश
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में पुलिस ने फैक्ट्री संचालक की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित की हैं। अधिकारियों के अनुसार, मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और मेडिकल रिपोर्ट को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। फैक्ट्री में बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, वेतन भुगतान, पहचान दस्तावेज रखने और कथित शारीरिक उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।
Muzaffarnagar Bonded Labour Case में पुलिस के सामने यह जिम्मेदारी भी है कि मजदूरों द्वारा लगाए गए प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच की जाए। इसके साथ ही यह पता लगाया जाना जरूरी है कि फैक्ट्री का पंजीकरण, श्रम विभाग की अनुमति और कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड नियमानुसार थे या नहीं। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।
Muzaffarnagar Bonded Labour Case को लेकर सोशल मीडिया पर “ये योगी की पुलिस है, पाताल से भी निकाल लेती है” जैसी प्रतिक्रियाएं प्रसारित हो रही हैं। हालांकि समाचार रिपोर्ट में ऐसी राजनीतिक या प्रचारात्मक पंक्ति को तथ्यात्मक शीर्षक की तरह इस्तेमाल करने के बजाय पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग की संयुक्त कार्रवाई का प्रमाणित विवरण देना अधिक उपयुक्त होगा।
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