Ram Mandir Trust CEO selection process begins in Ayodhya as committee prepares to appoint a new administrative head for temple management.
Ram Mandir CEO: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। मंदिर की व्यवस्थाओं को पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से Ram Mandir CEO की नियुक्ति प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। ट्रस्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय चयन समिति जल्द बैठक कर आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, चयन मानदंड और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम निर्णय लेगी।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ेगी। ऐसे में केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि आधुनिक प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी प्रशासन भी उतना ही आवश्यक होगा। इसी सोच के साथ Ram Mandir CEO के पद को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन सदस्यीय समिति करेगी योग्य उम्मीदवारों का चयन
जानकारी के अनुसार Ram Mandir CEO के चयन के लिए गठित समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक सुरेश काशीनाथ हावरे शामिल हैं। समिति अगले दो से तीन दिनों में बैठक कर भर्ती प्रक्रिया का रोडमैप तैयार करेगी।
Read: मेरठ में न्याय की मांग पर बवाल, लाठीचार्ज से लेकर SSP वीडियो तक क्यों बढ़ा विवाद?
बैठक में यह तय किया जाएगा कि आवेदन कब आमंत्रित किए जाएंगे, चयन प्रक्रिया कितने चरणों में होगी और अंतिम पैनल में कितने उम्मीदवारों के नाम शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा चयनित अधिकारी के वेतन, आवास, वाहन और अन्य सुविधाओं पर भी चर्चा होगी।
महासचिव के पास रहेगा अंतिम अधिकार
चयन समिति के सदस्य और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक सुरेश हावरे ने बताया कि समिति केवल योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार करेगी। अंतिम नियुक्ति का अधिकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के पास रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति किसी एक नाम की घोषणा नहीं करेगी, बल्कि इंटरव्यू और मूल्यांकन के बाद उपयुक्त उम्मीदवारों की सूची महासचिव को सौंपेगी। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
Management और Spirituality दोनों की होगी परीक्षा
इस बार Ram Mandir CEO के चयन में केवल प्रशासनिक अनुभव ही पर्याप्त नहीं होगा। चयन समिति ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करेगी, जिनके पास आधुनिक प्रबंधन के साथ-साथ धर्म, आध्यात्म और मंदिर व्यवस्था की गहरी समझ भी हो।
Read: ₹710 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं की सौगात, सीएम योगी ने बुंदेलखंड को दिया विकास का बड़ा संदेश
सुरेश हावरे के अनुसार उम्मीदवार का दृष्टिकोण केवल कार्यालय संचालन तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसे मंदिर की परंपराओं, धार्मिक मर्यादाओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं का भी सम्मान करना आना चाहिए। इसी आधार पर इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों की योग्यता का मूल्यांकन किया जाएगा।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर रहेगा विशेष जोर
हाल के विवादों के बाद ट्रस्ट किसी भी तरह की आशंका से बचना चाहता है। इसलिए Ram Mandir CEO की नियुक्ति पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होगी।
बताया गया है कि आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन किस माध्यम से लिए जाएंगे, इसका निर्णय समिति की पहली बैठक में किया जाएगा। इसके अलावा पात्रता, अनुभव, आयु सीमा और आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े दिशा-निर्देश भी उसी बैठक के बाद जारी किए जा सकते हैं।
समिति का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो चयन प्रक्रिया में कई चरण रखे जाएंगे, जिनमें दस्तावेजों की जांच, प्रारंभिक स्क्रीनिंग, विस्तृत इंटरव्यू और अंतिम मूल्यांकन शामिल हो सकता है।
Read: महिला आरक्षण और परिसीमन पर बदले अखिलेश यादव के सुर, 2027 चुनाव से पहले नई सियासी रणनीति के संकेत
क्या होंगे CEO के प्रमुख दायित्व?
नियुक्त होने वाला Ram Mandir CEO अयोध्या में रहकर मंदिर की संपूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय और प्रबंधकीय व्यवस्था की निगरानी करेगा। वह ट्रस्ट के महासचिव को सीधे रिपोर्ट करेगा।
CEO की जिम्मेदारियों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का बेहतर संचालन, कर्मचारियों का प्रबंधन, दान और चढ़ावे से संबंधित वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा, रखरखाव, प्रशासनिक समन्वय और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बनाए रखना शामिल होगा।
इसके अलावा मंदिर परिसर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक प्रबंधन तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।
वेतन, आवास और वाहन की मिलेगी सुविधा
सूत्रों के अनुसार Ram Mandir CEO को आकर्षक वेतन के साथ सरकारी स्तर की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें अयोध्या में आवास, आधिकारिक वाहन और आवश्यक प्रशासनिक संसाधन शामिल होंगे। हालांकि वेतनमान और अन्य सुविधाओं का अंतिम निर्णय चयन समिति की बैठक के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा।
कौन हैं सुरेश काशीनाथ हावरे?
चयन समिति के सदस्य सुरेश काशीनाथ हावरे देश के जाने-माने परमाणु वैज्ञानिक रह चुके हैं। उन्होंने लगभग 27 वर्षों तक भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अलावा वे शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट के प्रमुख भी रह चुके हैं।
वर्तमान में वे रायपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) के अध्यक्ष तथा श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सदस्य हैं। मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन पर उनका अनुभव काफी व्यापक माना जाता है। उन्होंने Temple Management नामक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें धार्मिक संस्थाओं के आधुनिक संचालन पर विस्तार से चर्चा की गई है।
राम मंदिर प्रशासन को नई दिशा देने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। भविष्य में यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में केवल धार्मिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि प्रोफेशनल मैनेजमेंट सिस्टम की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इसी कारण Ram Mandir CEO की नियुक्ति को मंदिर प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता आधारित रहती है, तो इससे मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, प्रशासनिक दक्षता और श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूती मिलेगी। आने वाले दिनों में समिति की बैठक के बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
Follow Us: TV TODAY BHARAT Live | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram | YOUTUBE
