Indian Judiciary: CJI Surya Kant addressing the gathering after inaugurating the new district court parking facility in Chandigarh.
Indian Judiciary: भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को चंडीगढ़ दौरे के दौरान न्यायपालिका के आधुनिकीकरण, डिजिटल बदलाव और न्याय तक आम लोगों की आसान पहुंच को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में नई बहुस्तरीय पार्किंग का उद्घाटन करने पहुंचे CJI ने कहा कि Indian Judiciary आज तकनीक के उपयोग के मामले में दुनिया की अग्रणी न्यायिक व्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों ने न्यायिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया है।
कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया सहित न्यायपालिका और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। नई पार्किंग सुविधा का उद्घाटन करते हुए CJI ने कहा कि यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी और इसके पूरा होने से अदालत परिसर में आने वाले वकीलों, वादकारियों तथा आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की बुनियादी सुविधाओं का विकास न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बेहद आवश्यक है।
वर्षों पुरानी पार्किंग समस्या का हुआ समाधान
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालतों में केवल न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां आने वाले लोगों के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। नई पार्किंग परियोजना के पूरा होने से जिला अदालत परिसर में वर्षों से चली आ रही पार्किंग की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी। इससे प्रतिदिन अदालत पहुंचने वाले हजारों लोगों को सुविधाजनक और व्यवस्थित पार्किंग उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न्यायपालिका की कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है और नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करता है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पार्किंग पर भी जताई उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पार्किंग समस्या को लेकर सवाल पूछा गया तो CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह भी एक गंभीर मुद्दा है और उन्हें उम्मीद है कि इसका समाधान जल्द निकलेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से चर्चा की जा चुकी है और प्रशासन का भी ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि जब वह अगली बार चंडीगढ़ आएंगे, तब तक हाईकोर्ट परिसर में पार्किंग की समस्या के समाधान की दिशा में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी।
लंबित मामलों पर कही महत्वपूर्ण बात
देश में लंबित मामलों की संख्या को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अक्सर पांच करोड़ से अधिक लंबित मामलों का आंकड़ा सामने रखा जाता है, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक स्थिति को समझना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जो न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में हैं, जहां नोटिस जारी होने, जवाब दाखिल होने या अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने का इंतजार रहता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लंबित मामलों का बोझ न्यायपालिका के सामने बड़ी चुनौती है। इसे कम करने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग, गुणवत्तापूर्ण न्यायाधीशों की नियुक्तियां और बेहतर न्यायिक प्रबंधन पर लगातार काम किया जा रहा है।
Technology से आसान हुआ न्याय तक पहुंचना
CJI सूर्यकांत ने कहा कि Indian Judiciary ने डिजिटल बदलाव को तेजी से अपनाया है। आज ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन केस स्टेटस और डिजिटल रिकॉर्ड जैसी सुविधाओं ने न्याय व्यवस्था को नई दिशा दी है।
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उन्होंने कहा कि अब किसी व्यक्ति को केवल अदालत तक पहुंचने के लिए लंबी यात्रा करने की आवश्यकता नहीं है। कोई भी नागरिक अपने शहर या गांव से ऑनलाइन याचिका दाखिल कर सकता है, स्थानीय वकील के माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकता है और इंटरनेट के जरिए अपने केस की अगली तारीख व स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इससे दूर-दराज क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और सामाजिक रूप से वंचित लोगों के लिए न्याय तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुई है।
AI का होगा जिम्मेदारी से इस्तेमाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर CJI ने कहा कि न्यायपालिका पहले से AI आधारित तकनीकों का सीमित उपयोग कर रही है और आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि AI केवल एक सहायक तकनीक होगी, अंतिम निर्णय हमेशा न्यायाधीश के स्वतंत्र विवेक और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी तैयार किए हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है। उनका कहना था कि तकनीक का उद्देश्य न्यायाधीशों की जगह लेना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
हिंदी और स्थानीय भाषाओं में सुनवाई पर क्या बोले CJI
हाईकोर्टों में अंग्रेजी के बजाय हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में न्यायिक कार्यवाही शुरू करने के सवाल पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह विषय संबंधित हाईकोर्ट और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। जहां दोनों पक्षों के बीच सहमति बनेगी, वहां स्थानीय भाषा में कार्यवाही शुरू करने पर निर्णय लिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से न्याय को अधिक सुलभ बनाना एक महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन इसके लिए संस्थागत सहमति और आवश्यक व्यवस्थाओं का होना भी जरूरी है।
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न्यायपालिका के आधुनिकीकरण पर लगातार काम
अपने संबोधन के अंत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य केवल मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सुलभ और भरोसेमंद न्याय उपलब्ध कराना है। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और न्यायपालिका के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि Indian Judiciary आने वाले वर्षों में तकनीक, पारदर्शिता और आधुनिक प्रबंधन के दम पर और अधिक मजबूत होगी। न्यायपालिका का डिजिटल परिवर्तन केवल अदालतों की कार्यशैली नहीं बदल रहा, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच को पहले से कहीं अधिक सरल, तेज और प्रभावी बना रहा है।
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