FPI Selling March 2026: विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से बाजार में दबाव, 17 महीने का रिकॉर्ड टूटने के करीब
Sensex Crash: बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में आई तेज गिरावट का असर केवल निवेशकों के पोर्टफोलियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की सबसे बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्य पर भी साफ दिखाई दिया। Sensex Crash के दौरान बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में से 9 के संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब ₹2.74 लाख करोड़ की कमी आ गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निजी क्षेत्र के अग्रणी बैंक HDFC Bank पर पड़ा, जबकि Hindustan Unilever Limited (HUL) एकमात्र ऐसी कंपनी रही, जिसने बाजार की कमजोरी के बावजूद अपने मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज की।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाया। यही कारण रहा कि पूरे सप्ताह Sensex Crash निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना रहा।
सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज हुई बड़ी गिरावट
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान बीएसई सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी लगभग 2.67 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी भी 566.85 अंक यानी करीब 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ सप्ताह का कारोबार समाप्त करने में सफल रहा।
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विश्लेषकों का कहना है कि बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव अधिक रहा। विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और कुछ आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिसका सीधा असर बाजार पूंजीकरण पर पड़ा। Sensex Crash की वजह से निवेशकों की संपत्ति में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
HDFC Bank को सबसे बड़ा नुकसान
बीते सप्ताह सबसे अधिक नुकसान HDFC Bank को झेलना पड़ा। बैंक का बाजार पूंजीकरण करीब ₹1,18,383.91 करोड़ घटकर ₹11,43,985.90 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक के शेयर में लगभग 9.40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ने के कारण बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिली। यही वजह रही कि Sensex Crash के दौरान HDFC Bank सबसे अधिक प्रभावित कंपनी बनकर सामने आया।
Reliance Industries समेत कई दिग्गज कंपनियों को भी झटका
देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी Reliance Industries भी बाजार की इस कमजोरी से अछूती नहीं रही। कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹65,429.82 करोड़ घटकर ₹17,29,661.44 करोड़ रह गया।
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इसी तरह State Bank of India (SBI) के मार्केट कैप में ₹26,814.94 करोड़ की गिरावट दर्ज हुई और यह घटकर ₹9,36,953.84 करोड़ रह गया। Bajaj Finance का बाजार मूल्य भी ₹26,802.74 करोड़ कम होकर ₹6,30,471.54 करोड़ पर पहुंच गया।
इसके अलावा कई अन्य बड़ी कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ा—
- LIC के मार्केट कैप में ₹15,116.74 करोड़ की कमी
- ICICI Bank में ₹6,223.84 करोड़ की गिरावट
- Bharti Airtel के बाजार मूल्य में ₹6,021.64 करोड़ की कमी
- TCS का मार्केट कैप ₹5,191.95 करोड़ घटा
- Larsen & Toubro (L&T) के बाजार मूल्य में ₹4,092.79 करोड़ की गिरावट
इन आंकड़ों से साफ है कि Sensex Crash का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला।
Hindustan Unilever बनी अपवाद
जहां अधिकांश बड़ी कंपनियां बाजार की गिरावट से प्रभावित हुईं, वहीं Hindustan Unilever Limited (HUL) ने विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूती दिखाई।
कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹152.73 करोड़ बढ़कर ₹5,03,928.59 करोड़ पहुंच गया। इस तरह HUL टॉप-10 कंपनियों में एकमात्र ऐसी कंपनी रही जिसने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि एफएमसीजी सेक्टर को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर कई निवेशक ऐसे शेयरों की ओर रुख करते हैं, जिसका लाभ HUL को मिला।
कौन रही देश की सबसे मूल्यवान कंपनी?
हालांकि Sensex Crash के बावजूद देश की सबसे मूल्यवान कंपनी का स्थान नहीं बदला। Reliance Industries अब भी पहले स्थान पर बनी हुई है।
इसके बाद क्रमशः—
- Bharti Airtel
- HDFC Bank
- ICICI Bank
- State Bank of India
- Tata Consultancy Services (TCS)
- Bajaj Finance
- Life Insurance Corporation (LIC)
- Larsen & Toubro (L&T)
- Hindustan Unilever Limited (HUL)
इन कंपनियों का बाजार मूल्य भले प्रभावित हुआ हो, लेकिन निवेशकों के लिए इनका दीर्घकालिक महत्व अभी भी बरकरार माना जा रहा है।
आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार जानकारों के अनुसार हालिया Sensex Crash के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। सबसे पहले वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
दूसरी ओर, तिमाही नतीजों का सीजन जारी होने के कारण निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। कई कंपनियों के अपेक्षा से कमजोर परिणामों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
साथ ही ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया।
निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेश के रुझान, कंपनियों के वित्तीय परिणामों और वैश्विक संकेतों पर रहेगी।
हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों को बाजार की हर गिरावट को घबराहट की बजाय अवसर के रूप में देखने की सलाह दी जा रही है। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
फिलहाल Sensex Crash ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ता है। ऐसे में निवेशकों के लिए सोच-समझकर निर्णय लेना, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना और बाजार की हर चाल पर नजर रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
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