Nepal Flood rescue operation after devastating flash floods in Bhotekoshi
Nepal Flood के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने रसुवा समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। सड़क, पुल, घर और दूसरी महत्वपूर्ण संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस संकट के बीच भारत ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की और बाढ़ में हुई जनहानि पर दुख जताया। पीएम मोदी ने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है और दोनों देशों की टीमें राहत एवं बचाव अभियान के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
Nepal Flood के बीच भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
Nepal Flood के बाद प्रभावित इलाकों तक राहत और बचाव पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। कई जगह सड़क संपर्क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण जमीन के रास्ते राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है। भारत की ओर से फिलहाल हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
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भारतीय और नेपाली अधिकारी राहत एवं बचाव अभियान को लेकर लगातार संपर्क में हैं। नेपाल के लिए भारत की मदद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच भौगोलिक और मानवीय संपर्क बेहद मजबूत है। सीमा से लगे इलाकों में किसी भी प्राकृतिक आपदा का असर दोनों देशों पर पड़ सकता है।
नेपाल को किस तरह की मदद की जरूरत?
Nepal Flood से प्रभावित इलाकों में इस समय सबसे ज्यादा जरूरत राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने की है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षित बचाव दल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा प्रभावित लोगों के लिए मेडिकल किट, जरूरी दवाएं, प्राथमिक उपचार का सामान, साफ पीने का पानी और भोजन जैसी आवश्यक चीजों की जरूरत हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क और बिजली व्यवस्था प्रभावित रहने की स्थिति में टेंट, कंबल, सोलर लाइट और सैनिटेशन किट भी राहत कार्यों में उपयोगी हो सकते हैं।
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हालांकि, भारत की ओर से अभी किसी विशेष राहत सामग्री या टीम की विस्तृत सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर भारत ने हर संभव मानवीय सहायता देने की बात कही है।
105 भारतीय नागरिक भी लापता
नेपाल में आई Nepal Flood का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक करीब 400 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे।
ऐसे में भारत की प्राथमिकताओं में अपने नागरिकों की जानकारी जुटाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना भी शामिल है। भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
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भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिक सहायता और जानकारी के लिए भारतीय दूतावास के आपातकालीन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। दूतावास ने +977 9851316807 और +977 9709107500 नंबर जारी किए हैं। सरकार की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी आपात स्थिति में आधिकारिक माध्यमों से जानकारी लें और अफवाहों पर भरोसा न करें।
बाढ़ की वजह क्या रही?
भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव के पीछे की वजह को लेकर अभी जांच जारी है। शुरुआती रिपोर्टों में तिब्बत की तरफ से अचानक पानी आने की बात सामने आई है। कुछ विशेषज्ञों ने हिमस्खलन या ऊपरी क्षेत्र में पानी जमा होने जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा की है, लेकिन घटना के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। बाढ़ का पानी भोटेकोशी और आगे के नदी तंत्र में तेजी से बढ़ा, जिससे कई निचले इलाकों में नुकसान हुआ। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर रही हैं।
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भारत-नेपाल सहयोग पर बढ़ा जोर
Nepal Flood के बीच प्रधानमंत्री मोदी और बलेंद्र शाह की बातचीत को दोनों देशों के बीच आपदा के समय सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह नेपाल को जरूरत के मुताबिक मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। लापता लोगों की तलाश, प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा आने वाले समय में सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रहने वाली है। स्थिति को देखते हुए भारत और नेपाल की एजेंसियों के बीच समन्वय लगातार जारी रहने की उम्मीद है।
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