Chinmoy Krishna Das attends mother Sandhya Rani Dhar last rites on parole.(PC- IANS)
Chinmoy Krishna Das Mother Death: बांग्लादेश में जेल में बंद हिंदू नेता और सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास की मां संध्या रानी धर का निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहीं संध्या रानी धर ने गुरुवार सुबह चटगांव के हाटहजारी इलाके स्थित पुंडरीक धाम में अंतिम सांस ली। वह करीब दो महीने से कैंसर समेत कई बीमारियों से जूझ रही थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
मां की तबीयत बिगड़ने के बाद परिवार की इच्छा थी कि चिन्मय कृष्ण दास जेल से बाहर आकर अपनी मां से आखिरी बार मिल सकें। परिवार ने इसके लिए पैरोल का अनुरोध भी किया था, लेकिन मां के जीवित रहते यह अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद संध्या रानी धर का निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद परिवार ने दोबारा पैरोल के लिए आवेदन किया, जिसे मंजूरी दे दी गई।
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मां की आखिरी इच्छा रह गई अधूरी
संध्या रानी धर की बीमारी लंबे समय से चल रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, वह करीब दो महीने से अस्पताल में इलाज करा रही थीं। अपनी इच्छा के अनुसार उन्हें मंगलवार को अस्पताल से हाटहजारी के पुंडरीक धाम लाया गया था। परिवार ने बुधवार को चिन्मय कृष्ण दास को मां से मिलाने के लिए पैरोल का अनुरोध किया था।
हालांकि, उस समय प्रशासन की ओर से बताया गया कि बीमार रिश्तेदार से मिलने के लिए पैरोल देने का कानूनी प्रावधान उपलब्ध नहीं था। मां के निधन के बाद परिस्थितियां बदल गईं। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दोबारा आवेदन किया गया और प्रशासन ने पांच घंटे की पैरोल मंजूर कर दी।
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मौत के बाद मिली 5 घंटे की पैरोल
Chinmoy Krishna Das Mother Death मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अब उन्हें मिली पांच घंटे की पैरोल को लेकर हो रही है। चटगांव जिला प्रशासन ने परिवार के अनुरोध पर उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी। प्रशासन के मुताबिक, उन्हें तय समय के भीतर अंतिम संस्कार में शामिल होकर वापस चटगांव सेंट्रल जेल लौटना था।
रिपोर्टों के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास को गुरुवार शाम जेल से पैरोल पर बाहर निकाला गया। वह हाटहजारी स्थित पुंडरीक धाम पहुंचे और मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा जेल ले जाया गया।
नवंबर 2024 से जेल में हैं चिन्मय कृष्ण दास
चिन्मय कृष्ण दास नवंबर 2024 से जेल में हैं। उन्हें 25 नवंबर 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था। उन पर अलग-अलग मामले दर्ज हैं, जिनमें राजद्रोह से जुड़ा मामला भी शामिल है। बाद में एक वकील की मौत से जुड़े हत्या के मामले समेत अन्य मामलों में भी उनका नाम सामने आया।
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चिन्मय कृष्ण दास पहले इस्कॉन से जुड़े रहे हैं और बाद में Sammilito Sanatani Jagaran Jote के प्रवक्ता के तौर पर सक्रिय रहे। वर्ष 2024 में उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर कई कार्यक्रमों और रैलियों में हिस्सा लिया था।
मां की मौत ने फिर खड़े किए कई सवाल
Chinmoy Krishna Das Mother Death की खबर सामने आने के बाद बांग्लादेश में मानवाधिकार, न्यायिक प्रक्रिया और बंदियों के मानवीय अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। परिवार का कहना था कि मां की गंभीर बीमारी के दौरान उनका बेटा उनसे आखिरी मुलाकात नहीं कर सका। इसके बाद मौत के पश्चात ही उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिली।
यह मामला इसलिए भी भावनात्मक बन गया है क्योंकि एक तरफ मां अपने बेटे को आखिरी बार देखना चाहती थीं, वहीं दूसरी तरफ बेटा कानूनी हिरासत में होने के कारण उनके पास नहीं पहुंच सका। मां की मृत्यु के बाद मिली सीमित पैरोल ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
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अंतिम संस्कार में शामिल हुए, फिर लौटे जेल
पांच घंटे की पैरोल मिलने के बाद चिन्मय कृष्ण दास अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अंतिम संस्कार उनकी मां की इच्छा के अनुसार पुंडरीक धाम में किया गया। धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद उन्हें निर्धारित समय के भीतर वापस जेल ले जाया गया।
चिन्मय कृष्ण दास की मां के निधन से जुड़े इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में उनके मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब उनकी कानूनी स्थिति और लंबित मामलों की अगली कार्रवाई पर भी लोगों की नजर बनी हुई है। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया को उसके अंतिम निर्णय तक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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