India Semiconductor Manufacturing and Semicon 2.0 chip production in India
India Semiconductor Manufacturing कहानी अब केवल भविष्य की योजना नहीं रह गई है। देश में सेमीकंडक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट अब निर्माण और कमर्शियल प्रोडक्शन के चरण में पहुंच रहे हैं। 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में SEMICON India 2026 के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सेमीकंडक्टर सफर को नीति और प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर कमर्शियल उत्पादन तक पहुंचने की बात कही। इसी के साथ ₹1,27,500 करोड़ के Semicon 2.0 ने भारत की चिप रणनीति को अगला बड़ा आधार दिया है।
हालांकि भारत को चीन की जगह दुनिया का “ग्लोबल बॉस” कहना अभी एक भविष्य की महत्वाकांक्षा के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल देश का लक्ष्य सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है, ताकि डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनों, सामग्री और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विकसित हो सके।
India Semiconductor Manufacturing में आया बड़ा बदलाव
भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर को मजबूत करने की शुरुआत Semicon India2026 Programme से हुई थी। दिसंबर 2021 में मंजूर हुए इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹76,000 करोड़ था। इसके तहत फैब, पैकेजिंग, टेस्टिंग और चिप डिजाइन जैसी क्षमताएं विकसित करने पर जोर दिया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक Semicon 1.0 के तहत 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें कुल निवेश ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा है।
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अब तस्वीर इसलिए बदली है क्योंकि इन परियोजनाओं में से कई कमर्शियल प्रोडक्शन तक पहुंच चुकी हैं। SEMICON India 2026 में सरकार ने बताया कि Micron, Kaynes और CG Semi ने कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। इसके अलावा मोहाली में CDIL Semiconductor और सूरत में Suchi Semicon की नई कमर्शियल प्रोडक्शन लाइनों का भी उद्घाटन किया गया। इससे कुल पांच ऑपरेशनल कमर्शियल सेमीकंडक्टर ATMP यूनिट्स हो गई हैं।
मोबाइल से सेमीकंडक्टर तक पहुंची भारत की मैन्युफैक्चरिंग चेन
भारत की India Semiconductor Manufacturing रणनीति को समझने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ना भी महत्वपूर्ण है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014-15 में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन करीब ₹1.9 लाख करोड़ था, जो 2024-25 में लगभग ₹12 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट करीब ₹38,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹3.3 लाख करोड़ हुआ।
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मोबाइल फोन निर्माण में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 में देश की कुल मोबाइल मांग का करीब 75 फीसदी आयात किया जाता था, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर 0.02 फीसदी बताया गया। यानी भारत ने मोबाइल असेंबली और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में अपनी क्षमता काफी बढ़ाई है। यही आधार आगे सेमीकंडक्टर जैसी ज्यादा जटिल इंडस्ट्री के विकास में मदद कर सकता है।
Semicon 2.0 में ₹1.27 लाख करोड़ का बड़ा दांव
जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने Semicon 2.0 को ₹1,27,500 करोड़ के कुल बजट परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इसका उद्देश्य केवल नई फैक्ट्रियां लगाना नहीं, बल्कि भारत में सेमीकंडक्टर की पूरी इकोसिस्टम तैयार करना है।
Semicon 2.0 को छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है। इनमें चिप डिजाइन, मशीन और सामग्री, नए फैब, एडवांस पैकेजिंग, एप्लाइड रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट डेवलपमेंट शामिल हैं। इसका मतलब है कि सरकार चिप बनने के आखिरी चरण पर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े शुरुआती और तकनीकी हिस्सों पर भी निवेश बढ़ाना चाहती है।
चिप डिजाइन और टैलेंट पर भी जोर(SEMICON India 2026)
India Semiconductor Manufacturing को आगे बढ़ाने के लिए केवल बड़ी फैक्ट्रियां पर्याप्त नहीं हैं। इस सेक्टर में डिजाइन इंजीनियर, रिसर्चर, पैकेजिंग विशेषज्ञ और अत्याधुनिक उपकरणों को संभालने वाले प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार 1 लाख से ज्यादा इंजीनियरों को 500 संगठनों के जरिए एडवांस चिप-डिजाइन टूल्स तक पहुंच दी गई है। इनमें अकादमिक संस्थान और स्टार्टअप भी शामिल हैं। देश में 300 से ज्यादा चिप डिजाइन विकसित किए जा चुके हैं और 24 चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है।
AI के दौर में चिप क्यों है इतनी अहम?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, 5G-6G, डिफेंस और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों की बढ़ती जरूरत ने सेमीकंडक्टर को रणनीतिक उद्योग बना दिया है। AI सिस्टम के लिए हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर और दूसरी तरह की चिप्स की जरूरत होती है। इसलिए India Semiconductor Manufacturing का विस्तार केवल मोबाइल या कंप्यूटर इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा।
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भारत की कोशिश अब AI और सेमीकंडक्टर दोनों क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की है। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू चिप क्षमता से सप्लाई चेन में मजबूती आएगी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार तथा निवेश के नए अवसर बन सकते हैं।
क्या भारत सच में चीन को पीछे छोड़ देगा?
भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में शुरुआती महत्वपूर्ण कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन वैश्विक चिप मैन्युफैक्चरिंग में चीन और अन्य बड़े देशों की मौजूदा क्षमता को देखते हुए भारत के लिए “ग्लोबल बॉस” बनने का दावा अभी भविष्य की बात है। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत ने डिजाइन, पैकेजिंग और कुछ मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में तेजी से विस्तार किया है।
SEMICON India 2026 में सामने आई प्रगति यह संकेत देती है कि India Semiconductor Manufacturing अब नीति दस्तावेजों से निकलकर वास्तविक उत्पादन की दिशा में बढ़ रही है। आगे चुनौती इस क्षमता को बड़े पैमाने पर बढ़ाने, घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करने और वैश्विक कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करने की होगी।
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