Prakash Singh IPS during his police service and ULFA conflict journey
Prakash Singh IPS का नाम भारतीय पुलिस सेवा के उन अधिकारियों में लिया जाता है, जिनके करियर का बड़ा हिस्सा देश के संवेदनशील इलाकों में बीता। असम से लेकर पंजाब, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड तक उन्होंने उग्रवाद और आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया। असम में उनकी पोस्टिंग ऐसे समय हुई थी, जब ULFA यानी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम की गतिविधियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थीं।
Prakash Singh IPS की संघर्ष यात्रा केवल पुलिस ऑपरेशन तक सीमित नहीं रही। सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पुलिस सुधारों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का 2006 का फैसला भारतीय पुलिस व्यवस्था में सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में गिना जाता है।
असम में ULFA की चुनौती के बीच मिली बड़ी जिम्मेदारी
Prakash Singh IPS वर्ष 1991 में असम पुलिस के DGP बने। यह वह दौर था जब ULFA की गतिविधियों के कारण राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव था। आधिकारिक जीवनी विवरण के अनुसार, उन्हें ऐसे समय असम पुलिस की कमान दी गई थी, जब ULFA चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। उनके कार्यकाल में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई।
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असम की जिम्मेदारी Prakash Singh IPS के लिए सामान्य प्रशासनिक पोस्टिंग नहीं थी। सामने उग्रवाद की चुनौती थी और दूसरी तरफ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी। उनके कार्यकाल की चर्चा इसी संदर्भ में होती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था इस तरह तैयार की गई कि चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।
ULFA के खिलाफ संघर्ष में क्या थी रणनीति?
Prakash Singh IPS के करियर से जुड़े संस्मरणों में असम का दौर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उनकी व्यापक सेवा यात्रा पर उपलब्ध विवरण बताता है कि उन्होंने देश के कई संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने का अनुभव हासिल किया।
असम के बाद उनका अनुभव उत्तर प्रदेश और BSF में भी काम आया। अलग-अलग क्षेत्रों में चुनौतियां अलग थीं। कहीं उग्रवाद था तो कहीं सीमा सुरक्षा और आतंकवाद का दबाव। इसी वजह से Prakash Singh IPS का करियर पुलिस नेतृत्व और आंतरिक सुरक्षा के कई पहलुओं को समेटता है।
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उत्तर प्रदेश में भी संभाली पुलिस की कमान
असम के बाद Prakash Singh IPS ने उत्तर प्रदेश पुलिस के DGP के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। आधिकारिक जीवनी संबंधी विवरण के मुताबिक, वह 1991 से 1993 के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रमुख रहे। इस दौरान राज्य के तराई क्षेत्र में आतंकवाद और अपराध से जुड़ी चुनौतियां अहम थीं।
उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। Prakash Singh IPS के अनुभव में तराई क्षेत्र का यह दौर भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
BSF के DG भी रहे Prakash Singh IPS
Prakash Singh IPS ने केवल राज्य पुलिस में ही शीर्ष पद नहीं संभाला। वह Border Security Force यानी BSF के महानिदेशक भी रहे। उपलब्ध आधिकारिक जीवनी विवरण के अनुसार, उन्होंने 1993 से 1994 के दौरान BSF की कमान संभाली। इससे पहले वह पंजाब फ्रंटियर में BSF के वरिष्ठ पद पर भी काम कर चुके थे।
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पंजाब में उनका कार्यकाल उस दौर से जुड़ा था, जब आतंकवाद गंभीर सुरक्षा चुनौती था। BSF की भूमिका सीमा सुरक्षा के साथ-साथ आतंकवाद से जुड़े अभियानों में भी महत्वपूर्ण थी। इस अनुभव ने Prakash Singh IPS की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी भूमिका को और व्यापक बनाया।
पुलिस सुधारों की लड़ाई ने बदली पहचान
सेवानिवृत्ति के बाद Prakash Singh IPS ने पुलिस सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। वर्ष 1996 में दायर उनकी PIL पर 22 सितंबर 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया। कोर्ट ने पुलिस व्यवस्था में संरचनात्मक बदलावों से संबंधित कई निर्देश जारी किए।
इन निर्देशों में State Security Commission का गठन, DGP और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के लिए न्यूनतम कार्यकाल, जांच और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों को अलग करने की दिशा, Police Establishment Board और Police Complaints Authority जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
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आज भी क्यों चर्चा में हैं Prakash Singh IPS?
Prakash Singh IPS की कहानी को केवल एक पूर्व पुलिस अधिकारी के करियर के तौर पर नहीं देखा जाता। उनका अनुभव उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में पुलिसिंग से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिस सुधारों तक फैला है। Indian Police Foundation भी उन्हें देश में पुलिस सुधारों के प्रमुख वास्तुकारों में गिनता है।
उनकी किताब ‘Unforgettable Chapters: Memoirs of a Top Cop’ में भी पुलिस सेवा के दौरान मिले अनुभवों का उल्लेख है। 2025 में उनकी इस पुस्तक पर आयोजित चर्चा में असम, उत्तर प्रदेश और BSF में उनके कार्यकाल के अनुभवों पर बात हुई थी।
Prakash Singh IPS की संघर्ष यात्रा इस वजह से भी महत्वपूर्ण है कि इसमें पुलिस सेवा के दो अलग-अलग पहलू दिखाई देते हैं। एक तरफ संवेदनशील इलाकों में उग्रवाद और आतंकवाद से मुकाबला, दूसरी तरफ पुलिस व्यवस्था को संस्थागत रूप से बेहतर बनाने की कोशिश। असम में ULFA के दौर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की उनकी यात्रा इसी लंबे अनुभव की कहानी बताती है।
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“2” पर Prakash Singh IPS: ULFA से मुकाबले की पूरी कहानी, असम से पुलिस सुधार तक ऐसे चली संघर्ष यात्रा के विचार