Pargat Singh appointed Punjab Congress chief after Raja Warring resignation
Punjab Congress Leadership Change: पंजाब कांग्रेस एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। 2 अक्टूबर 2026 को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस ने जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। यह बदलाव 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ है।
पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलना कोई नई घटना नहीं है। 2002 के बाद से संगठन की कमान कई नेताओं के हाथों में रही है। इस दौरान कुछ नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टियों का रुख किया। कुछ नेता पार्टी में बने रहे, जबकि कुछ का सक्रिय राजनीति में प्रभाव कम हुआ। ऐसे में मौजूदा Punjab Congress Leadership Change को केवल एक पद परिवर्तन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
2002 के बाद बदले कई प्रदेश अध्यक्ष
2002 के बाद पंजाब कांग्रेस की कमान हरविंदर सिंह हंसपाल, शमशेर सिंह ढिल्लों, मोहिंदर सिंह कायपी, कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, सुनील जाखड़, नवजोत सिंह सिद्धू और राजा वड़िंग जैसे नेताओं के पास रही। अमरिंदर सिंह इस अवधि में दो बार प्रदेश अध्यक्ष बने। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक 2002 से 2022 तक ही कई बार प्रदेश नेतृत्व बदला।
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राजा वड़िंग ने अप्रैल 2022 में प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला था। उनका कार्यकाल करीब साढ़े चार साल चला। अब उनके इस्तीफे के बाद परगट सिंह को यह जिम्मेदारी मिली है। कांग्रेस के लिए यह Punjab Congress Leadership Change ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी है।
पांच पूर्व अध्यक्षों का अलग रहा राजनीतिक सफर
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षों का बाद का राजनीतिक सफर एक जैसा नहीं रहा। मोहिंदर सिंह कायपी ने 2024 में कांग्रेस छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थामा। सुनील जाखड़ ने भी 2022 में कांग्रेस छोड़ दी और बाद में भाजपा में शामिल हुए। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2021 में कांग्रेस से अलग होकर पंजाब लोक कांग्रेस बनाई। बाद में उनकी पार्टी भाजपा में शामिल हो गई।
हरविंदर सिंह हंसपाल आम आदमी पार्टी से भी जुड़े। दिसंबर 2024 में उनका निधन हो गया। वहीं शमशेर सिंह ढिल्लों कांग्रेस में बने रहे। प्रताप सिंह बाजवा भी कांग्रेस में सक्रिय रहे हैं। इस तरह पिछले करीब ढाई दशक में प्रदेश अध्यक्षों के राजनीतिक रास्ते अलग-अलग रहे हैं।
वड़िंग ने खुद दिया इस्तीफा, राहुल गांधी से की मुलाकात
राजा वड़िंग ने 2 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। इसी मुलाकात के दौरान उन्होंने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंपा। वड़िंग ने स्पष्ट किया कि उनसे इस्तीफा नहीं मांगा गया था। उन्होंने खुद पद छोड़ने का फैसला किया। वड़िंग ने यह भी कहा कि वह कांग्रेस छोड़ने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने पंजाब की राजनीति और संगठन से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी के साथ चर्चा की।
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उन्होंने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए। वड़िंग ने यह भी कहा कि आगे पार्टी को जहां उनकी जरूरत होगी, वह वहां काम करेंगे। वह लुधियाना से लोकसभा सांसद के तौर पर अपनीजिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
सचिन पायलट को लेकर वड़िंग ने क्या कहा?
इस्तीफे के बाद वड़िंग ने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि शायद पायलट ने तय किया हो कि अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का समय आ गया है। हालांकि वड़िंग ने साथ ही यह भी कहा कि उनके पास इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई। यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि नेतृत्व परिवर्तन से पहले सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से बातचीत की थी। पार्टी ने सितंबर में उन्हें पंजाब मामलों का प्रभारी बनाया था। इससे पहले यह जिम्मेदारी भूपेश बघेल के पास थी।
अब परगट सिंह के सामने क्या चुनौती है?
राजा वड़िंग के बाद परगट सिंह को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। परगट सिंह जालंधर कैंट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 में यह सीट जीती। वह पंजाब सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
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राजनीति में आने से पहले परगट सिंह का लंबा हॉकी करियर रहा है। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे हैं। उन्होंने 1988, 1992 और 1996 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1992 और 1996 में उन्होंने टीम की कप्तानी की। उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री मिला।
अब उनका सबसे बड़ा संगठनात्मक काम अलग-अलग धड़ों के नेताओं को साथ लेकर चलना होगा। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से आंतरिक मतभेद चर्चा में रहे हैं। वड़िंग के कार्यकाल में भी अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सामने आते रहे। ऐसे में परगट सिंह के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी।
2027 चुनाव से पहले क्यों अहम है बदलाव?
Punjab Congress Leadership Change का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष को चुनावी संगठन तैयार करने के लिए सीमित समय मिलेगा। कांग्रेस के सामने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के साथ वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय बनाने की चुनौती है।
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पार्टी को उम्मीदवारों, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर भी काम करना होगा। परगट सिंह की नियुक्ति के साथ कांग्रेस ने नेतृत्व का नया चेहरा सामने रखा है। अब उनके सामने संगठन को चुनावी मोड में लाने का काम है। वहीं राजा वड़िंग के लिए अगला सवाल उनकी पार्टी के भीतर भूमिका को लेकर है।
वड़िंग का अगला कदम क्या होगा?
अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद वड़िंग ने कांग्रेस में बने रहने की बात साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी को उनकी जहां जरूरत होगी, वह वहां मौजूद रहेंगे। इसका मतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी खत्म होने के बावजूद उनकी सक्रिय राजनीति जारी रहने की संभावना है। लुधियाना के सांसद के तौर पर उनकी भूमिका भी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में उनका फोकस संसद, पंजाब की राजनीति और पार्टी संगठन में अपनी भूमिका पर रह सकता है।
फिलहाल Punjab Congress Leadership Change का सबसे बड़ा बदलाव परगट सिंह की नियुक्ति है। एक तरफ नया प्रदेश अध्यक्ष संगठन को संभालने की तैयारी कर रहा है। दूसरी तरफ वड़िंग पद छोड़ने के बाद भी कांग्रेस में बने रहने का संकेत दे चुके हैं। 2027 के चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में यह बदलाव पार्टी के संगठनात्मक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
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