Retail Inflation Forecast: देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले जून महीने में देश की खुदरा महंगाई दर यानी Retail Inflation Forecast बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो इसका सीधा असर माल ढुलाई, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों से लेकर घरेलू उपयोग की चीजें और महंगी हो सकती हैं।
11 दिनों में पेट्रोल-डीजल में बड़ी बढ़ोतरी
15 मई से शुरू हुई 11 दिनों की अवधि में पेट्रोल की कीमतों में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 7.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी ने बाजार में महंगाई को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
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आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार Fuel Price Hike का असर केवल वाहनों के ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे सप्लाई चेन सिस्टम को प्रभावित करता है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, फल, अनाज, दूध और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगते हैं।
इसके अलावा सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने से भी बाजार में लागत का दबाव बढ़ा है। सरकार का उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना है, लेकिन इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई दे सकता है।
जून में बढ़ सकती है खुदरा महंगाई
EY India के मुख्य नीति सलाहकार DK Srivastava का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में औसतन 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई में लगभग 0.75 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने अनुमान जताया कि मई 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति 4 से 4.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि जून में यह बढ़कर 4.5 से 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उनका मानना है कि यह महंगाई मुख्य रूप से लागत आधारित होगी, इसलिए रेपो रेट में बदलाव का असर सीमित रह सकता है।
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हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि Retail Inflation Forecast लगातार 5 प्रतिशत से ऊपर जाता है और महंगाई में तेजी बनी रहती है तो भारतीय रिजर्व बैंक को भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार करना पड़ सकता है।
RBI की MPC बैठक पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 5 जून को होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आरबीआई स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
India Ratings and Research की निदेशक Megha Arora ने कहा कि जून में खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, लेकिन इसके आरबीआई के 6 प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के भीतर रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना सकता है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।
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थोक महंगाई भी बढ़ी, बाजार पर बढ़ा दबाव
देश में केवल खुदरा महंगाई ही नहीं बल्कि थोक महंगाई भी तेजी से बढ़ रही है। अप्रैल महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति 42 महीने के उच्च स्तर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई 3.48 प्रतिशत रही।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में तेजी जारी रही तो आने वाले महीनों में इसका व्यापक असर बाजार और आम लोगों की खरीद क्षमता पर दिखाई देगा।
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Barclays India की मुख्य अर्थशास्त्री Aastha Gudwani ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण परिवहन लागत और कच्चे माल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
आम आदमी पर सबसे ज्यादा असर
महंगाई का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से रोजमर्रा के खर्च बढ़ जाते हैं। घर का बजट बिगड़ने लगता है और बचत पर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में Fuel Price Hike जारी रहता है तो रसोई गैस, खाद्य सामग्री, परिवहन और अन्य सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है। इससे आम लोगों की आर्थिक परेशानियां और बढ़ेंगी।
CRISIL की प्रमुख अर्थशास्त्री Dipti Deshpande ने चालू वित्त वर्ष में औसत मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं ICRA Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री Aditi Nayar ने कहा कि जून में ईंधन कीमतों का असर व्यापक रूप से दिखाई देगा और आगे चलकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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