UP Youth Skill Development: CM Yogi Adityanath addressing skilled youth at World Youth Skills Day 2026 event in Lucknow and presenting Uttar Pradesh’s employment and ITI training plan
प्रशिक्षण से नियुक्ति तक
UP Youth Skill Development को केवल प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार अब इसे सीधे रोजगार, उद्योग और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लखनऊ में आयोजित World Youth Skills Day 2026 समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस मॉडल की रूपरेखा सामने रखी, उसका मुख्य संदेश था-युवाओं को बाजार की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए और प्रशिक्षण के बाद नौकरी के लिए भटकने की नौबत न आए।
लखनऊ में कौशल का उत्सव
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 15 जुलाई 2026 को आयोजित कार्यक्रम में UP Youth Skill Development से जुड़े प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं, सफल उद्यमियों, उत्कृष्ट राजकीय ITIs और प्रशिक्षण संस्थाओं को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने विभागीय उपलब्धियों पर आधारित Kaushalam Booklet का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में कौशल सारथी और कौशल सेतु जैसे डिजिटल मॉड्यूल लॉन्च किए गए तथा उद्योगों के साथ समझौते भी किए गए।

सर्टिफिकेट नहीं, रोजगार परिणाम बनेगा पैमाना
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण नया एंगल यह रहा कि UP Youth Skill Development की सफलता अब केवल प्रशिक्षित युवाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी नौकरी, आय और उद्यमिता से मापी जाएगी। प्रस्तावित Industry Linked Skilling व्यवस्था में प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को स्थानीय उद्योगों और बदलते रोजगार बाजार की वास्तविक मांग के अनुसार तैयार करने पर जोर दिया गया है।
यानी किसी जिले में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाएं हैं तो वहीं उससे जुड़े कौशल विकसित किए जाएंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, रक्षा उत्पादन या पर्यटन की क्षमता वाले जिलों में प्रशिक्षण भी उन्हीं क्षेत्रों को ध्यान में रखकर दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षण और उपलब्ध रोजगार के बीच का अंतर कम किया जा सकेगा।
नौ लाख सरकारी नौकरियों का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में UP Youth Skill Development और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश के नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। Government Jobs in UP से जुड़े इस आंकड़े को मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किया है। यह सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा है और इसे स्वतंत्र रोजगार सर्वेक्षण का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार सरकारी भर्ती के साथ निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और स्थानीय उद्योगों में भी अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि युवा केवल सरकारी नौकरी को रोजगार का एकमात्र विकल्प न मानें, बल्कि तकनीकी दक्षता प्राप्त कर उद्योगों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र में भी अपना भविष्य तैयार करें।
MSME बना रोजगार की बड़ी धुरी
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि UP Youth Skill Development के विस्तार में प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार MSME Employment के माध्यम से सवा तीन करोड़ से अधिक युवाओं और कारीगरों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। इस संख्या में संगठित नौकरी के साथ स्वरोजगार, पारिवारिक इकाइयां, कारीगरी और लघु उद्यमों से जुड़ी आजीविकाएं शामिल हो सकती हैं।
सरकार का फोकस पारंपरिक कारीगरों को केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है। उन्हें आधुनिक मशीनों, पैकेजिंग, डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग और बाजार तक पहुंच का प्रशिक्षण देकर स्थानीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।
ITI में बदल रही तकनीकी पढ़ाई
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में UP Youth Skill Development के अंतर्गत अब पारंपरिक ट्रेड के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण देने की बात कही गई है। इस Future Ready ITI मॉडल का उद्देश्य युवाओं को उन क्षेत्रों के लिए तैयार करना है, जिनमें आने वाले वर्षों में प्रशिक्षित कार्यबल की मांग बढ़ने की संभावना है।
प्रदेश के 2026-27 बजट दस्तावेज में भी सरकारी ITIs में AI और मशीन लर्निंग पाठ्यक्रम, नए ट्रेड तथा उभरती तकनीकों के लिए प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि ITI की पारंपरिक छवि को बदलकर उन्हें आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है।
प्लंबिंग से सेमीकंडक्टर तक
नई व्यवस्था में UP Youth Skill Development का दायरा रोजमर्रा की सेवाओं से लेकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग तक फैलाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री के अनुसार स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स में प्लंबिंग जैसे रोजगारपरक कार्यों से लेकर Semiconductor Manufacturing Training तक उपलब्ध कराया जा रहा है। यह बदलाव उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन और युवाओं को रोजगार के नए विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
यह मॉडल उन युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जो लंबी शैक्षणिक डिग्री के बजाय कम अवधि में व्यावहारिक प्रशिक्षण लेकर नौकरी या स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक उपकरणों, योग्य प्रशिक्षकों और नियमित प्लेसमेंट पर निर्भर करेगी।
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हर जिले में उद्योग और रोजगार का एक परिसर
सरकार की योजना के अनुसार UP Youth Skill Development को स्थानीय औद्योगिक विकास से जोड़ने के लिए प्रत्येक जिले में सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर Employment and Industrial Zone स्थापित किया जाएगा। इन जोन में MSME इकाइयों, प्रशिक्षण संस्थानों, रोजगार सेवाओं, अप्रेंटिसशिप और उद्यमिता सहायता को एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की परिकल्पना है।
फरवरी 2026 में सामने आई विस्तृत योजना के अनुसार इन जोन को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाना है। प्रत्येक जिले में कम से कम 50 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयां, फ्लैटेड फैक्ट्री, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग सुविधा, डिजाइन सेंटर, टूल रूम और प्रशिक्षण केंद्र बनाने का प्रस्ताव है।
योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण
प्रस्तावित परिसरों में UP Youth Skill Development के तहत युवाओं की रुचि, शैक्षणिक स्तर और योग्यता का आकलन कर प्रशिक्षण देने की योजना है। इन World Class Skilling Centres में प्रशिक्षण के साथ इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, स्वरोजगार मार्गदर्शन, बैंक ऋण की जानकारी और उद्योगों में वेतन आधारित रोजगार की व्यवस्था जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इस मॉडल का सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि युवाओं को अलग-अलग विभागों और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रशिक्षण, रोजगार पंजीकरण, उद्यमिता मार्गदर्शन और औद्योगिक संपर्क एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से नौकरी तक पहुंचने की प्रक्रिया सरल हो सकती है।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता
कार्यक्रम में UP Youth Skill Development व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए कौशल सारथी और कौशल सेतु मॉड्यूल लॉन्च किए गए। Kaushal Sarathi के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्रों का वर्षवार विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जबकि कौशल सेतु प्रशिक्षण प्रदाताओं के पंजीकरण और चयन प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने के लिए तैयार किया गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या, पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों की उपस्थिति और प्लेसमेंट से जुड़े आंकड़ों की निगरानी बेहतर हो सकती है। इससे कमजोर प्रदर्शन करने वाले केंद्रों की पहचान और उद्योगों की मांग के अनुसार पाठ्यक्रमों में बदलाव करना भी आसान होगा।
साझा भविष्य के लिए साझा अवसर
यूनेस्को ने विश्व युवा कौशल दिवस 2026 की थीम Skills for a Shared Future निर्धारित की है। इस वैश्विक विचार को UP Youth Skill Development से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साझा भविष्य तभी संभव है, जब युवाओं को अवसर भी समान रूप से उपलब्ध हों। यूनेस्को के अनुसार तकनीकी कौशल के साथ डिजिटल, AI, ग्रीन, सामाजिक और मानवीय दक्षताओं का संतुलन भविष्य के रोजगार के लिए जरूरी होगा।
इस लिहाज से उत्तर प्रदेश की चुनौती केवल अधिक प्रशिक्षण केंद्र खोलने की नहीं, बल्कि ग्रामीण, गरीब, महिला और वंचित वर्ग के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुंचाने की भी है। अवसरों की वास्तविक साझेदारी तभी होगी, जब छोटे जिलों के युवाओं को भी महानगरों जैसी तकनीक और प्रशिक्षक उपलब्ध हों।
युवाओं के दम पर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा कार्यबल को सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि UP Youth Skill Development वर्ष 2029-30 तक प्रदेश को One Trillion Dollar Economy बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का मानना है कि कौशल, नवाचार, MSME, स्टार्टअप और नई औद्योगिक इकाइयों का विस्तार आर्थिक विकास के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकता है।
हालांकि इस लक्ष्य की दिशा में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के प्लेसमेंट, शुरुआती वेतन, नौकरी की स्थिरता और महिला भागीदारी जैसे आंकड़े भी सार्वजनिक करना आवश्यक होगा। इससे यह आकलन किया जा सकेगा कि प्रशिक्षण योजनाएं वास्तव में युवाओं की आय और जीवन स्तर में कितना बदलाव ला रही हैं।
कौशल से आत्मनिर्भरता की नई पहचान
विश्व युवा कौशल दिवस पर सामने आया UP Youth Skill Development मॉडल प्रमाणपत्र बांटने वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर प्रशिक्षण, उद्योग और रोजगार के बीच सीधा संबंध बनाने का प्रयास है। यदि हर जिले में प्रस्तावित जोन समय पर बनते हैं और प्रशिक्षण के बाद वास्तविक नियुक्तियां होती हैं, तो यह Direct Employment Model उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
कौशल को सम्मान और युवा को आत्मनिर्भर बनाने का नारा तभी जमीन पर सफल माना जाएगा, जब प्रशिक्षण केंद्र से निकलने वाले युवा के हाथ में केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उसकी योग्यता के अनुरूप नौकरी, बेहतर आय या अपना उद्यम शुरू करने का मजबूत अवसर भी हो।
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