President Droupadi Murmu: जगदलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम इस बार ऐतिहासिक बन गया। देश की President Droupadi Murmu की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। पारंपरिक मांदर की गूंज, लोक नृत्यों की लय और आदिवासी आस्थाओं के बीच President Droupadi Murmu ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली आत्मा उसकी जनजातीय संस्कृति में बसती है। President Droupadi Murmu मां दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की और बस्तर की परंपराओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत का अनमोल हिस्सा बताया।
जनजातीय परंपराओं का उत्सव है बस्तर पंडुम
President Droupadi Murmu ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान का महोत्सव है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है। President Droupadi Murmu कहा कि जिन समाजों ने अपनी परंपराओं को सहेज कर रखा, वही समय के साथ मजबूत बने। बस्तर की जनजातीय संस्कृति प्रकृति के साथ संतुलन, सामूहिकता और भाईचारे का संदेश देती है। आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब आदिवासी जीवन शैली पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।

सरकार की योजनाओं से बदल रही तस्वीर
President Droupadi Murmu ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय उत्थान के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। पीएम जनमन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान और नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं। President Droupadi Murmu कहा कि विकास का मतलब केवल इमारतें बनना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आना है।
माओवाद से शांति की ओर बढ़ता बस्तर
President Droupadi Murmu ने बस्तर में हो रहे सामाजिक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी हिंसा और डर के लिए जाना जाता था, वहां अब शांति और विश्वास का माहौल बन रहा है। माओवाद से प्रभावित कई लोग मुख्यधारा में लौट रहे हैं। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर खुल रहे हैं। सड़क, पुल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं गांवों तक पहुंच रही हैं। यह बदलाव लोकतंत्र की ताकत और जनता के भरोसे का प्रमाण है।
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हजारों कलाकारों ने दिखाई सांस्कृतिक छटा
बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। President Droupadi Murmu ने कहा कि इतनी बड़ी भागीदारी यह दिखाती है कि समाज अपनी पहचान को लेकर कितना सजग है। मंच पर गोंडी, हल्बी, धुरवा और भतरी लोक परंपराओं की अद्भुत प्रस्तुतियां हुईं। मांदर, मोहरी और तुडबुड़ी की धुनों पर कलाकारों ने जो नृत्य पेश किए, उन्होंने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।

महिलाओं की भूमिका को सराहा
President Droupadi Murmu ने विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बस्तर की महिलाएं परिवार ही नहीं, समाज की भी रीढ़ हैं। खेती, वनोपज संग्रह, हस्तशिल्प और परंपराओं को सहेजने में उनका योगदान अतुलनीय है। सरकार की योजनाओं से महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। यह सशक्तिकरण पूरे समाज को आगे बढ़ाएगा।
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शिक्षा और युवाओं पर विशेष जोर
President Droupadi Murmu ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा और कौशल को अपनाएं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों के लिए नए अवसर खोल रही है। बस्तर में एकलव्य विद्यालय, डिजिटल क्लास और कौशल केंद्र युवाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बस्तर के युवा देश के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएंगे।
संस्कृति और आधुनिकता का संतुलन जरूरी
President Droupadi Murmu ने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब वह संस्कृति के साथ चले। यदि हम अपनी जड़ों को भूल गए तो प्रगति अधूरी रह जाएगी। बस्तर पंडुम इस संतुलन का सुंदर उदाहरण है, जहां आधुनिक मंच पर प्राचीन परंपराएं जीवित दिखती हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी भाषा, लोककला और रीति-रिवाजों को सहेज कर रखें।

बस्तर को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की संस्कृति में वह ताकत है जो इसे विश्व मंच पर अलग पहचान दिला सकती है। यहां का हस्तशिल्प, लोक संगीत और परंपराएं पर्यटन की बड़ी संभावना रखती हैं। यदि इन्हें सही दिशा मिले तो बस्तर आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से देश का अग्रणी क्षेत्र बन सकता है। इस अवसर पर राज्य सरकार के मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। पूरे जगदलपुर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। राष्ट्रपति ने आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों, स्वयंसेवकों और प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत दस्तावेज है।
भविष्य के लिए संदेश
President Droupadi Murmu ने अपने संबोधन का समापन इस विश्वास के साथ किया कि बस्तर की धरती आने वाले समय में शांति, विकास और सांस्कृतिक उत्थान का आदर्श केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने सदियों से जो मूल्य बचाए हैं, वही नए भारत की मजबूत नींव बनेंगे। बस्तर पंडुम इस यात्रा का सबसे सुंदर पड़ाव है।
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