Lucknow Coaching Fire site at Purania in Aliganj after a deadly blaze
लखनऊ, 22 जून 2026: अलीगंज के पुरनिया क्षेत्र में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भवन के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर जांच शुरू हो गई है। Lucknow Coaching Fire की शुरुआती जांच में निकास व्यवस्था, फायर एनओसी, भवन के स्वीकृत उपयोग और अंदर चल रही गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत होने की सूचना है, जिनमें अधिकतर युवा बताए गए हैं।
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रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां
Lucknow Coaching Fire जिस तीन मंजिला इमारत में हुआ, वहां कोचिंग या प्रशिक्षण केंद्र के साथ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह इमारत उत्तर लखनऊ के एक रिहायशी क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि भवन का स्वीकृत मानचित्र किस उपयोग के लिए था और उसमें व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति ली गई थी या नहीं।

इसके अलावा, Lucknow Coaching Fire की जांच करने वाली टीम भवन स्वामी, संस्थान संचालकों और संबंधित विभागों से दस्तावेज मांग सकती है। इसमें भवन का स्वीकृत नक्शा, व्यावसायिक पंजीकरण, बिजली सुरक्षा प्रमाणपत्र और अग्निशमन विभाग से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा।
फायर एनओसी की स्थिति जांच के दायरे में
शुरुआती जानकारी में दावा किया गया है कि Lucknow Coaching Fire वाली इमारत के लिए फायर एनओसी का आवेदन नहीं किया गया था। हालांकि, इस दावे की अंतिम आधिकारिक पुष्टि विस्तृत जांच रिपोर्ट और अग्निशमन विभाग के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही होगी। यह भी जांचना आवश्यक है कि भवन की ऊंचाई, क्षेत्रफल और उपयोग की श्रेणी के अनुसार कौन-कौन से अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र अनिवार्य थे।
वहीं दूसरी ओर, Lucknow Coaching Fire से पहले भी राजधानी में कोचिंग संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2025 की एक फायर सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट में शहर के कम से कम 17 कोचिंग संस्थानों में अपर्याप्त सुरक्षा इंतजाम मिलने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में कुछ भवनों में केवल एक निकास मार्ग, खराब उपकरण और लंबित सुरक्षा सुधारों का उल्लेख किया गया था।

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खास बात यह है कि Lucknow Coaching Fire से कुछ दिन पहले किए गए शहरव्यापी फायर ऑडिट में भी पार्किंग स्थलों के गलत इस्तेमाल और भवन मानचित्र से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आने की सूचना थी। इससे सवाल उठता है कि नियमित निरीक्षण के दौरान पुरनिया की इस इमारत की स्थिति की जांच हुई थी या नहीं।
बाहर निकलने का बताया जा रहा एक रास्ता
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, Lucknow Coaching Fire के समय भवन में मौजूद छात्रों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित तरीके से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया था। आग और धुआं तेजी से फैलने के कारण कई लोग ऊपरी हिस्सों में फंस गए। कुछ छात्रों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनी से नीचे छलांग लगा दी।
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इसी क्रम में, Lucknow Coaching Fire की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इमारत में मुख्य सीढ़ियों के अलावा कोई अलग आपातकालीन निकास था या नहीं। यदि केवल एक ही रास्ता उपलब्ध था, तो आग या धुआं उस मार्ग तक पहुंचते ही लोगों का बाहर निकलना लगभग असंभव हो सकता था। अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में अलग निकास, आपातकालीन संकेत, अलार्म, अग्निशमन उपकरण और धुआं बाहर निकालने की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
साथ ही, Lucknow Coaching Fire में ऊंचाई से कूदने वाले कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार दो युवाओं को कूदने के कारण पीठ में चोट आई। हालांकि, घायलों की अंतिम संख्या और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की पुष्टि संबंधित अस्पतालों तथा प्रशासन की आधिकारिक सूची से ही होगी।

आग फैलने के कारण की जांच जारी
Lucknow Coaching Fire किस स्थान से शुरू हुआ और आग ने पूरी इमारत को इतनी तेजी से कैसे अपनी चपेट में लिया, इसका तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है। कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में बिजली के शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है, लेकिन फोरेंसिक और अग्निशमन विभाग की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले इसे हादसे का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।
इसके अलावा, Lucknow Coaching Fire में इमारत के अंदर इस्तेमाल की गई वायरिंग, बिजली का लोड, ज्वलनशील सामग्री, फर्नीचर और सजावटी पैनलों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग को तेजी से फैलने में किस सामग्री या तकनीकी खामी की भूमिका रही।
विभागों की भूमिका पर भी सवाल
Lucknow Coaching Fire के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भवन में सुरक्षा संबंधी कमियां थीं, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। भवन के उपयोग की निगरानी स्थानीय विकास प्राधिकरण और नगर निकाय के दायरे में आती है, जबकि अग्नि सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण फायर विभाग करता है। बिजली व्यवस्था से जुड़े मामलों में विद्युत सुरक्षा विभाग की भूमिका भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
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वहीं, Lucknow Coaching Fire की निष्पक्ष जांच के लिए यह जरूरी होगा कि केवल भवन मालिक या संस्थान संचालक तक जिम्मेदारी सीमित न रहे। यदि किसी सरकारी निरीक्षण, अनुमति या कार्रवाई में लापरवाही मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर तय की जानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
फिलहाल Lucknow Coaching Fire को लेकर कई सूचनाएं प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही हैं। इनमें फायर एनओसी का अभाव, सीमित निकास व्यवस्था और रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक संचालन जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, प्रशासनिक जांच पूरी होने तक इन सभी बिंदुओं को प्रारंभिक तथ्य या जांच का विषय माना जाना चाहिए।
अंततः, Lucknow Coaching Fire की जांच रिपोर्ट यह बताएगी कि हादसा केवल तकनीकी खराबी का परिणाम था या सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने नुकसान को बढ़ाया। साथ ही, रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित विभागों ने पहले कोई निरीक्षण, नोटिस या कार्रवाई की थी या नहीं।
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