LUCC Scam Investigation: उत्तराखंड में चर्चित LUCC यानी लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। करोड़ों रुपये के इस कथित वित्तीय घोटाले में जांच एजेंसियों ने कई बड़े खुलासों के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। इसी बीच ‘महाभारत’ सीरियल में अश्वथामा का किरदार निभाने वाले अभिनेता से जुड़े MyFledge Education कंपनी के एक निदेशक के फरार होने की खबर ने मामले को और सुर्खियों में ला दिया है।
इस पूरे मामले में LUCC Scam Investigation अब उत्तराखंड पुलिस की प्राथमिकता बन चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निवेशकों के साथ हुई कथित धोखाधड़ी की तह तक पहुंचने के लिए कई राज्यों में कार्रवाई जारी है। उत्तराखंड के अपराध एवं कानून व्यवस्था के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ हाई लेवल समीक्षा बैठक की और जांच में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
सात मामलों की समीक्षा, पुलिस ने कसा शिकंजा
बैठक के दौरान LUCC और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज सात अलग-अलग मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निवेशकों की शिकायतों पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पुलिस के अनुसार, LUCC Scam Investigation के दौरान यह सामने आया है कि उत्तराखंड में इस संस्था की लगभग 35 शाखाएं सक्रिय थीं। इन शाखाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से निवेश कराया गया। अब जब भुगतान और रकम वापसी में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं, तो कई पीड़ितों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले में शामिल कुछ आरोपी देश छोड़कर भागने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए पुलिस ने लुक आउट सर्कुलर जारी करने और रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इंटरपोल से भी सहयोग लेने की तैयारी की जा रही है।
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मुख्य आरोपी पर पुलिस की नजर
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले प्रमुख आरोपियों में शबाब हुसैन का नाम भी शामिल है। पुलिस का दावा है कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं। LUCC Scam Investigation में जुटी टीमों को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ आरोपी पहले से अलग-अलग मामलों में जेल में बंद हैं।
एडीजी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद आरोपियों को वारंट बी के जरिए उत्तराखंड लाया जाए ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। पुलिस को उम्मीद है कि इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
निवेशकों की रकम वापसी पर फोकस
जांच एजेंसियों का सबसे बड़ा फोकस अब निवेशकों की रकम वापस दिलाने पर है। पुलिस ने अवैध संपत्तियों की पहचान करने और उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि अगर आरोपियों की संपत्तियां कुर्क की जाती हैं तो उससे निवेशकों को राहत मिल सकती है।
LUCC Scam Investigation के तहत पुलिस बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई भी कर रही है। इसके अलावा कंपनी से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड हासिल करने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से भी संपर्क किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले में वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। कई खातों और ट्रांजेक्शनों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेशकों की रकम आखिर कहां और कैसे ट्रांसफर की गई।
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ED और आयकर विभाग भी होंगे शामिल
इस हाई प्रोफाइल मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को भी रिपोर्ट भेजने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगर वित्तीय अनियमितताओं और मनी ट्रेल की जांच केंद्रीय एजेंसियों के जरिए होती है तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस ने UPID Act 2005 और BUDS Act 2019 के तहत भी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इन कानूनों का इस्तेमाल अवैध निवेश योजनाओं और लोगों से धोखाधड़ी के मामलों में किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि LUCC Scam Investigation आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है क्योंकि इसमें कई राज्यों के कनेक्शन सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि जांच एजेंसियां बेहद सतर्कता के साथ सबूत जुटाने में लगी हैं।
निवेशकों में बढ़ी चिंता
घोटाले की खबर सामने आने के बाद हजारों निवेशकों में चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की बचत इस संस्था में निवेश की थी। अब उन्हें अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद पुलिस कार्रवाई से ही है।
उत्तराखंड पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि LUCC Scam Investigation का उद्देश्य सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना भी है। जांच एजेंसियां अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक डिटेल्स, मोबाइल डेटा और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की भी जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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