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Home - Supreme Court: घरेलू कामगारों का न्यूनतम वेतन, राहत या जोखिम? सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

National

Supreme Court: घरेलू कामगारों का न्यूनतम वेतन, राहत या जोखिम? सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

न्यूनतम वेतन पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, घरेलू कामगारों के रोजगार पर सवाल

Last updated: जनवरी 29, 2026 6:17 अपराह्न
Monika Published जनवरी 29, 2026
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Domestic Workers Minimum Wages: Supreme Court of India hearing on domestic workers minimum wage and labour rights
घरेलू कामगारों के न्यूनतम वेतन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है।Source: Supreme Court Proceedings | Reported by Desk Team
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Highlights
  • CJI की चिंता: वेतन तय हुआ तो घरेलू कामगार रखना बंद कर सकते हैं लोग
  • घरेलू कामगारों के अधिकार बनाम रोजगार, सुप्रीम कोर्ट ने जताई आशंका
  • न्यूनतम वेतन से फायदा या नुकसान? सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पहलुओं पर ध्यान दिलाया
  • संवैधानिक अधिकारों पर बहस, लेकिन रोजगार पर असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सतर्क
  • घरेलू कामगारों का वेतन तय करने पर सुप्रीम कोर्ट ने चेताया, नतीजे हो सकते हैं उलटे

Domestic Workers Minimum Wages: नई दिल्ली में Supreme Court of India में घरेलू कामगारों के न्यूनतम वेतन को लेकर सुनवाई के दौरान CJI ने गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 14, 15 और 16 के उल्लंघन का तर्क देना आसान है, लेकिन इसके दूरगामी नतीजों पर विचार जरूरी है। खास बात यह है कि अदालत को आशंका है कि न्यूनतम वेतन तय होने पर कई परिवार घरेलू कामगार रखना बंद कर सकते हैं, जिससे सबसे अधिक नुकसान उन्हीं कामगारों को हो सकता है।

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क्या है मामला

घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन तय करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कम वेतन, अनौपचारिक कार्य-स्थितियां और सामाजिक सुरक्षा की कमी उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में वेतन और काम के घंटे तय करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने से असमानता बनी रहती है।

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CJI की चिंता क्यों अहम है

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि यदि बिना व्यापक सामाजिक-आर्थिक अध्ययन के न्यूनतम वेतन लागू किया गया, तो इसके नतीजे खतरनाक हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि घरेलू कामगारों का रोजगार निजी घरों से जुड़ा है, जहां औपचारिक उद्योगों जैसी संरचना नहीं होती। ऐसे में अचानक सख्त नियम कई परिवारों को घरेलू कामगार रखने से पीछे हटा सकते हैं।

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न्यूनतम वेतन समर्थन और आशंकाएं (Domestic Workers Minimum Wages)

समर्थन में तर्क:

  • घरेलू कामगारों को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार।
  • न्यूनतम आय से शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार।
  • शोषण और मनमाने वेतन पर रोक।

आशंकाएं:

छोटे शहरों और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव।

रोजगार के अवसर घटने का खतरा।

आंशिक काम (पार्ट-टाइम) बढ़ने से आय अस्थिर होना।

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संविधान और व्यावहारिकता के बीच संतुलन (Domestic Workers Minimum Wages)

इसी क्रम में, अदालत ने यह संकेत दिया कि केवल संवैधानिक प्रावधानों का हवाला पर्याप्त नहीं है; नीति-निर्माण में जमीनी हकीकत भी उतनी ही जरूरी है। घरेलू कामगारों का काम निजी स्पेस में होता है, जहां निरीक्षण और अनुपालन की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। साथ ही, महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी और प्रवासी श्रमिकों की मौजूदगी नीति को और संवेदनशील बनाती है।

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राज्यों की भूमिका और संभावित मॉडल (Domestic Workers Minimum Wages)

कुछ राज्यों में घरेलू कामगारों के लिए रजिस्ट्रेशन, पहचान-पत्र और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शुरू की गई हैं। खास बात यह है कि विशेषज्ञ चरणबद्ध मॉडल की वकालत कर रहे हैं,

  • न्यूनतम वेतन के बजाय वेज-बैंड या घंटे आधारित मानक।
  • नियोक्ता और कामगार दोनों के लिए कर/सब्सिडी प्रोत्साहन।
  • सामाजिक सुरक्षा (बीमा, पेंशन) को प्राथमिकता।

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रोजगार पर असर का आकलन जरूरी

अदालत की टिप्पणी का केंद्रीय बिंदु यही है कि नीति का अंतिम लक्ष्य कामगारों का कल्याण होना चाहिए, न कि अनजाने में रोजगार घटाना। इसके अलावा, शहरों और कस्बों की आर्थिक क्षमता अलग-अलग है; एक समान वेतन दर हर जगह उपयुक्त नहीं हो सकती। Domestic Workers Minimum Wages

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आगे का रास्ता

वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि सरकारों को सभी हितधारकों कामगार संघ, नियोक्ता, नीति-विशेषज्ञ से संवाद कर संतुलित समाधान निकालना चाहिए। साथ ही, डेटा-आधारित अध्ययन और पायलट प्रोजेक्ट से नीति के प्रभाव को परखा जा सकता है। घरेलू कामगारों के न्यूनतम वेतन का मुद्दा राहत और जोखिम दोनों से जुड़ा है। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की चिंता इस बहस को भावनाओं से निकालकर व्यावहारिकता की जमीन पर लाती है। टिकाऊ समाधान वही होगा जो कामगारों की सुरक्षा बढ़ाए और रोजगार के अवसरों को भी सुरक्षित रखे।

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