Economic Survey 2026: गणतंत्र दिवस, पद्म पुरस्कार 2026 और प्रयोगशालाओं के बीच संसद परिसर में आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर सामान्य प्रतिक्रिया सामने आई है। नई दिल्ली में 29 जनवरी 2026 को कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवीं बार आर्थिक सर्वेक्षण और बजट पेश करने जा रही हैं, लेकिन सरकार और जनता की नजरों में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण और लोगों के आर्थिक सर्वेक्षण की अलग-अलग तस्वीरें दिखाई जा रही हैं। यह बयान संसद सत्र के दौरान आर्थिक बहस के संदर्भ में आया।
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आर्थिक सर्वे को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया
इसके अलावा, इमरान प्रतापगढ़ी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार के दस्तावेज़ों में आर्थिक हालात की जो तस्वीर पेश की जाती है, वह आम लोगों के अनुभव से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अपनी रोजमर्रा की चुनौतियों को अलग तरह से महसूस कर रही है, जबकि आधिकारिक आंकड़े दूसरी कहानी बताते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकार की ओर से आर्थिक सर्वे को नीतिगत दिशा और भविष्य की योजना का आधार बताया जाता रहा है। हर साल यह दस्तावेज़ संसद में बजट से पहले पेश किया जाता है।
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वित्त मंत्री का रिकॉर्ड और राजनीतिक बहस
खास बात यह है कि निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार आर्थिक सर्वे और बजट पेश करने जा रही हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इसी क्रम में विपक्ष इसे उपलब्धि मानने के साथ-साथ जवाबदेही से भी जोड़ रहा है। इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि उनकी पार्टी आर्थिक आंकड़ों के साथ जमीनी सच्चाई पर भी चर्चा चाहती है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्तिगत टिप्पणी या आरोप से बचते हुए अपनी बात राजनीतिक आलोचना के दायरे में रखी।
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आर्थिक सर्वे की भूमिका और महत्व (Economic Survey 2026)
साथ ही यह समझना जरूरी है कि आर्थिक सर्वे किसी भी सरकार का आधिकारिक दस्तावेज़ होता है, जिसमें बीते वित्त वर्ष की स्थिति और आने वाले साल की संभावनाओं का आकलन किया जाता है। इसमें विकास दर, रोजगार, महंगाई और राजकोषीय स्थिति जैसे विषय शामिल होते हैं। इसी क्रम में सरकार का कहना रहता है कि नीतिगत फैसले इन्हीं आंकड़ों के आधार पर लिए जाते हैं। वहीं विपक्ष का तर्क होता है कि आंकड़ों के साथ आम लोगों की स्थिति को भी समान महत्व मिलना चाहिए।
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जनता बनाम सरकार का नजरिया (Economic Survey 2026)
इसके अलावा, इमरान प्रतापगढ़ी के बयान ने लोगों का आर्थिक सर्वे शब्द को चर्चा में ला दिया है। उनके मुताबिक आम नागरिक अपनी आय, खर्च और रोजगार की स्थिति से खुद ही अर्थव्यवस्था का आकलन करता है। वहीं दूसरी ओर, सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक नीतियों का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन आंकड़ों में उसका संकेत जरूर मिलता है। यही वजह है कि आर्थिक सर्वे को नीति निर्धारण का अहम दस्तावेज़ माना जाता है।
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राजनीतिक बयान और संसदीय परंपरा (Economic Survey 2026)
खास बात यह है कि बजट सत्र से पहले इस तरह की प्रतिक्रियाएं भारतीय संसदीय परंपरा का हिस्सा रही हैं। हर साल विपक्ष आर्थिक सर्वे और बजट पर सवाल उठाता है, जबकि सत्ता पक्ष अपने कामकाज का बचाव करता है। इसी क्रम में यह बयान भी एक राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जिसे संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा मिल रही है।
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सरकार की ओर से अब तक की स्थिति (Economic Survey 2026)
साथ ही, सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। आमतौर पर आर्थिक सर्वे पेश होने के बाद ही विस्तृत चर्चा होती है, जिसमें सभी दल अपने-अपने तर्क रखते हैं। वहीं दूसरी ओर, बजट से पहले इस तरह के बयान यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में आर्थिक मुद्दों पर बहस तेज रहने वाली है।
कुल मिलाकर, इमरान प्रतापगढ़ी का बयान आर्थिक सर्वे को लेकर राजनीतिक मतभेद को दर्शाता है। एक तरफ सरकार आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर अपनी नीतियों को सही ठहराती है, तो दूसरी ओर विपक्ष आम जनता के अनुभव को केंद्र में रखकर सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में आर्थिक सर्वे और बजट पर संसद में व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
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