Noida software Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 इलाके में एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर टेक्नीशियन की दर्दनाक मौत ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के मूल्यों पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। यह हादसा 16-17 जनवरी की रात उस समय हुआ, जब युवक की कार एक खुले नाले की बाउंड्री तोड़ते हुए पानी में जा गिरी। पीड़ित की पहचान युवराज मेहता के रूप में हुई है। परिवार का आरोप है कि वह करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं पहुंची।

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राहुल गांधी का बयान, समाज के आईने में हादसा
इस दर्दनाक घटना पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि यह हादसा भारत में फैल रही ‘लालच और अन्य जीवों के प्रति असम्मान की संस्कृति’ का सीधा परिणाम है। राहुल गांधी ने कहा कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जो पानी पीने को मजबूर हैं और जिस जर्जर बुनियादी ढांचे के बीच रह रहे हैं, वह सब इसी लालच का नतीजा है। युवराज मेहता की मौत इसी मानसिकता की कीमत है।
‘दूसरों के दर्द पर हमारी प्रतिक्रिया तय करेगी भविष्य’
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि किसी समाज की असली पहचान इस बात से होती है कि वह दूसरों के दुख और पीड़ा पर कैसे प्रतिक्रिया देता है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करेंगे, तो अंततः वही व्यवहार हमारे साथ भी होगा।’ यह टिप्पणी केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि सामाजिक आत्ममंथन का आह्वान मानी जा रही है।
कैसे हुआ हादसा, लापरवाही या व्यवस्था की चूक?
पुलिस के अनुसार, हादसा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक चौराहे के पास हुआ, जो नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। रात के समय सड़क पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं थे। कार अनियंत्रित होकर सीधे खुले नाले में गिर गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले भी खतरनाक माना जाता रहा है, लेकिन सुधार के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई होती रही।
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परिवार के आरोप, समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जान
मृतक के परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल समय पर सक्रिय होते, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। परिवार के अनुसार, युवक पानी में फंसा हुआ था और मदद के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन मौके पर समुचित रेस्क्यू व्यवस्था नहीं पहुंची।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले कई राज
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘एंटीमॉर्टम डूबने से दम घुटना और उसके बाद कार्डियक अरेस्ट’ बताया गया है। यह रिपोर्ट परिवार के उस दावे को बल देती है कि युवक की मौत तुरंत नहीं हुई थी, बल्कि वह कुछ समय तक जीवित रहा। इससे प्रशासनिक लापरवाही के आरोप और भी गहरे हो गए हैं।
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प्रशासनिक कार्रवाई, अफसर हटाए गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नोएडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एम. लोकेश को उनके पद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई संकेत देती है कि सरकार इस मामले को केवल एक हादसा मानकर टालना नहीं चाहती।
बिल्डर की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
इस मामले में पुलिस ने रियल एस्टेट कंपनी एमजेड विजटाउन प्लानर्स के CEO अभय सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, जिससे यह हादसा हुआ। कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस उन्हें दोबारा अदालत में पेश करेगी।
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SIT का गठन, पांच दिन में रिपोर्ट का वादा
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT प्रमुख भानु भास्कर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जांच शुरू हो चुकी है और पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। SIT यह जांच करेगी कि हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है और कहां-कहां नियमों की अनदेखी हुई।
विपक्ष बनाम सरकार, राजनीति भी तेज
इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे सरकार की नाकामी और संवेदनहीनता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राहुल गांधी का बयान इस बहस को और धार देने वाला साबित हुआ है।
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बड़ा सवाल, क्या बदलेगी व्यवस्था?
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि शहरी भारत की अव्यवस्थित विकास नीति, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। सवाल यह है कि क्या SIT की रिपोर्ट और कुछ अफसरों की कार्रवाई से व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आएगा, या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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एक मौत, कई सवाल
युवराज मेहता की मौत ने समाज, सरकार और सिस्टम तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी के शब्दों में, यह तय करना अब हम सब पर है कि हम किस तरह का समाज बनाना चाहते हैं। अगर इस घटना से सबक लिया गया, तो शायद यह मौत व्यर्थ नहीं जाएगी। लेकिन अगर इसे भी भुला दिया गया, तो ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।
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