Uttarakhand rural roads construction : उत्तराखण्ड के दूरदराज़ इलाकों में सड़क पहुंचने का मतलब है बाज़ार से जुड़ाव, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच, और सबसे बढ़कर एक सुरक्षित जीवन। इसी कड़ी को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने राज्य की 184 नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 1700 करोड़ रुपये की बड़ी मंज़ूरी दे दी है। ये सड़कें कुल 1228 किलोमीटर लंबाई को कवर करेंगी, जो पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में एक बड़ा बदलाव साबित होंगी।
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लेकिन इस विकास यात्रा की दूसरी तस्वीर भी है हाल ही की प्राकृतिक आपदाएं, जिन्होंने उत्तराखण्ड को गहरी चोट दी। प्रदेश की 946 सड़कें और 15 पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनके पुनर्निर्माण के लिए राज्य को लगभग 650 करोड़ रुपये की तत्काल आवश्यकता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उत्तराखण्ड एक सीमित संसाधनों वाला पर्वतीय राज्य है और ऐसी आपदाएँ यहां के विकास को वर्षों पीछे धकेल देती हैं। सड़कें टूटती हैं तो गांवों का शहरों से संपर्क टूटता है, मेडिकल इमरजेंसी में जान बचाना कठिन हो जाता है, और किसानों की उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती।
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उन्होंने पीएमजीएसवाई से जुड़े विषयों पर केंद्र का विशेष सहयोग मांगा और बताया कि 5900 घर, जो हाल की आपदा में क्षतिग्रस्त हुए, उनकी मरम्मत के लिए भी धनराशि अत्यंत जरूरत है। उत्तराखण्ड के 90% किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। खेती पहले ही सीमित ज़मीन पर होती है, ऊपर से जंगली जानवरों की बढ़ती दखलंदाजी किसानों की रातों की नींद उड़ाए हुए है।
मुख्यमंत्री ने इस संकट को विस्तार से बताते हुए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY–DPER) में फसल सुरक्षा के लिए घेराबंदी को शामिल करने पर केंद्र का आभार जताया। साथ ही अगले 5 वर्षों तक प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपये का अलग बजट उपलब्ध कराने का निवेदन किया, जिससे इस समस्या को स्थाई समाधान मिल सके।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखण्ड की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि राज्य की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। घेराबंदी कार्यों के लिए अग्रिम धनराशि जल्द जारी करने का आश्वासन भी दिया गया है, जिससे फसलों की सुरक्षा पर तेजी से काम हो सके। मुख्यमंत्री ने PM–RKVY योजना के अंतर्गत नमामि गंगे क्लीन अभियान के लिए स्वीकृत 98 करोड़ रुपये की जल्द रिलीज़ का अनुरोध भी रखा।
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इन मंजूरियों और चर्चाओं का सीधा मतलब है,
- पहाड़ी गांवों तक बेहतर सड़क नेटवर्क
- किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी कृषि
- आपदा के बाद टूटी संरचनाओं का त्वरित पुनर्निर्माण
- राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति
उत्तराखण्ड में सड़कें सिर्फ यात्रा नहीं बदलतीं, बल्कि पूरी की पूरी जीवनशैली बदल देती हैं। केंद्र की यह मंजूरी उसी बदलाव की नई शुरुआत है।
