School Chalo Abhiyan 2026: CM Yogi Adityanath launches School Chalo Abhiyan 2026 phase two and development projects worth over ₹613 crore in Saharanpur |PHOTO: YOGI PAGE
School Chalo Abhiyan 2026 के दूसरे चरण का शुभारंभ बुधवार, 1 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर से किया। कार्यक्रम के माध्यम से Saharanpur Development, UP Education, Student Enrollment, Quality Education और Public Infrastructure को एक साथ गति देने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने इस्माइलपुर स्थित सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय से अभियान की शुरुआत की। इसके साथ ही सहारनपुर में ₹613 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
विद्यार्थियों को पुस्तकें, बैग और स्टेशनरी किट वितरित
School Chalo Abhiyan 2026 के शुभारंभ अवसर पर विद्यार्थियों को School Kits, Textbook Distribution, Stationery Support, Headmaster Awards और Child Welfare से जुड़ी सुविधाओं का लाभ मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को पाठ्य पुस्तकें, स्कूल बैग और स्टेशनरी किट वितरित कीं। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले प्रधानाध्यापकों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था कि बच्चों का केवल विद्यालय में प्रवेश ही नहीं, बल्कि उन्हें आवश्यक शैक्षिक सामग्री और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता है।

स्कूल से बाहर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य
School Chalo Abhiyan 2026 के दूसरे चरण में Universal Enrollment, Out-of-School Children, Dropout Students, Parent Awareness और Community Participation पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह चरण 1 जुलाई से 15 जुलाई तक चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान शिक्षक, जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, स्कूल प्रबंधन समितियां और स्थानीय नागरिक घर-घर जाकर ऐसे बच्चों की पहचान करेंगे, जो कभी विद्यालय नहीं गए या बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अभियान को सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए जन-आंदोलन बनाने की अपील की है।
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ऑपरेशन कायाकल्प से बदली परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर
School Chalo Abhiyan 2026 के साथ सरकार ने Operation Kayakalp, School Infrastructure, Clean Drinking Water, Mid-Day Meal और Separate Toilets की उपलब्धियों को भी सामने रखा। मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद के केवल 36 प्रतिशत विद्यालय ही आवश्यक सुविधाओं से संतृप्त थे। कई विद्यालयों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय, रसोईघर और चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत बालकों और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पेयजल, फर्नीचर और मिड-डे मील की समुचित व्यवस्था विकसित की गई।
स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी से आधुनिक शिक्षा
School Chalo Abhiyan 2026 अब परंपरागत पढ़ाई के साथ Smart Class, Digital Library, ICT Lab, Teacher Tablet और बेहतर Learning Environment पर भी केंद्रित है। मुख्यमंत्री ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं। शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराने का उद्देश्य शिक्षण व्यवस्था को तकनीक से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बच्चों के बीच डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता का अंतर कम हो तथा विद्यार्थियों को गतिविधि आधारित और रुचिकर शिक्षा मिल सके।
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60 लाख से अधिक नामांकन, ड्रॉपआउट दर में गिरावट का दावा
School Chalo Abhiyan 2026 की प्रगति बताते हुए मुख्यमंत्री ने Enrollment Growth, Dropout Rate, Basic Education, Government Schools और Education Reform से जुड़े आंकड़े साझा किए। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 60 लाख से अधिक नए बच्चों का नामांकन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पहले 19 से 20 प्रतिशत तक रहने वाली ड्रॉपआउट दर अब घटकर लगभग 3 से 4 प्रतिशत रह गई है। इन आंकड़ों को सरकार ने विद्यालयों में सुविधाओं, जागरूकता और नामांकन अभियानों का परिणाम बताया है।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता
School Chalo Abhiyan 2026 में Inclusive Education, Divyang Students, Escort Allowance, Girls Stipend और Assistive Devices को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कार्यक्रम में साझा जानकारी के अनुसार गत वर्ष 13,000 से अधिक गंभीर एवं बहु-दिव्यांग बच्चों को ₹6,000 प्रतिवर्ष की दर से एस्कॉर्ट अलाउंस दिया गया। इसके साथ ही 23,000 से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को ₹2,000 प्रतिवर्ष का स्टाइपेंड उपलब्ध कराया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण भी दिए गए हैं, जिससे वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
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शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर ₹18,000
School Chalo Abhiyan 2026 की सफलता में Shiksha Mitra, Honorarium Hike, Teacher Support, Rural Education और Health Insurance की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी गई है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों का मासिक मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 तथा अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 कर दिया है। कार्यक्रम में शिक्षा से जुड़े शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों के लिए ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। इससे ग्रामीण विद्यालयों में कार्यरत शिक्षा कर्मियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
₹613 करोड़ की परियोजनाओं से सहारनपुर के विकास को गति
School Chalo Abhiyan 2026 के कार्यक्रम को Development Projects, Air Connectivity, Regional Growth, Public Investment और Viksit Uttar Pradesh के संकल्प से भी जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने सहारनपुर में ₹613 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार सहारनपुर एयर कनेक्टिविटी की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है और भविष्य में लोगों को हवाई यात्रा के लिए दिल्ली या दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
वुड कार्विंग को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से पहचान
School Chalo Abhiyan 2026 के मंच से ODOP, Wood Carving, Export Growth, Local Artisans और Global Market पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहारनपुर के कारीगरों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद वुड कार्विंग की परंपरा को जीवित रखा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के माध्यम से इस कला को वैश्विक पहचान मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार सहारनपुर से वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात ₹600 करोड़ से अधिक हो चुका है। इससे स्थानीय कारीगरों, छोटे उद्योगों और निर्यात इकाइयों के लिए रोजगार तथा व्यापार के नए अवसर बन रहे हैं।
हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी
School Chalo Abhiyan 2026 का अंतिम उद्देश्य Education for All, Zero Dropout, Child Development, Social Responsibility और Nation Building को वास्तविकता में बदलना है। अच्छी शिक्षा बच्चे को केवल पढ़ना-लिखना नहीं सिखाती, बल्कि उसे आत्मविश्वासी, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाती है। अभियान की सफलता तभी संभव होगी, जब शिक्षक विद्यालय को रुचिकर बनाएंगे, माता-पिता बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे और समाज स्कूल से बाहर प्रत्येक बच्चे की पहचान कर उसे कक्षा तक पहुंचाएगा। शिक्षा से वंचित बच्चा केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की क्षति है।
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