Dr Tomar Political Journey: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं, जो अचानक सुर्खियों में नहीं आते, बल्कि वर्षों की संगठनात्मक मेहनत, जमीनी सक्रियता और राजनीतिक संघर्ष के दम पर अपनी पहचान बनाते हैं। Somendra Tomar उन्हीं नेताओं में गिने जाते हैं। बागपत जिले के छोटे से गांव खैला से निकलकर छात्र राजनीति, संगठन और विधानसभा तक पहुंचने वाला उनका सफर आज भाजपा की राजनीति में एक मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
Dr Tomar Political Journey सिर्फ चुनावी जीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक धैर्य और निरंतरता का उदाहरण है, जिसमें एक नेता संगठन से जुड़कर धीरे-धीरे अपनी जगह बनाता है। वर्तमान में योगी सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. सोमेंद्र तोमर का राजनीतिक सफर करीब दो दशक पहले विश्वविद्यालय कैंपस से शुरू हुआ था।
छात्र राजनीति से मिली पहली पहचान
Somendra Tomar ने अपनी राजनीतिक शुरुआत छात्र जीवन से की। मेरठ स्थित Chaudhary Charan Singh University में पढ़ाई के दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। फिजिक्स विषय में एम.फिल और पीएचडी करने वाले सोमेंद्र तोमर उस दौर में छात्र राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा बन गए थे।
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साल 2003 में वे CCSU छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। उस समय विश्वविद्यालय राजनीति को पश्चिमी यूपी की मुख्यधारा राजनीति की प्रयोगशाला माना जाता था। छात्रसंघ चुनावों में जीत किसी भी युवा नेता के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाती थी। यही वह दौर था जब Dr Tomar Political Journey ने नई दिशा पकड़ी।
ABVP और RSS से मिला संगठनात्मक अनुभव
Somendra Tomar की राजनीतिक पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रही है। Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad के साथ काम करते हुए उन्होंने युवाओं के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार किया।
छात्र राजनीति के बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा में सक्रिय हुए और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में युवाओं के बीच संगठन को मजबूत करने का काम किया। भाजपा संगठन के भीतर उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल ने उन्हें धीरे-धीरे पार्टी नेतृत्व की नजरों में मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने की वजह से ही उनकी जमीनी पकड़ मजबूत हुई। यही कारण है कि आज भी वे कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रिय दिखाई देते हैं।
2012 में टिकट नहीं मिला, लेकिन नहीं छोड़ा संगठन
Dr Tomar Political Journey का सबसे अहम मोड़ साल 2012 माना जाता है। उस समय भाजपा ने मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से उन्हें चुनाव लड़ाने की तैयारी की थी, लेकिन अंतिम समय में टिकट बदल दिया गया।
राजनीति में कई बार टिकट कटने के बाद नेता संगठन से दूरी बना लेते हैं, लेकिन सोमेंद्र तोमर ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पार्टी के साथ बने रहकर संगठनात्मक काम जारी रखा। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत साबित हुई।
वे लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे और पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे। इसका फायदा उन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में मिला।
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2017 में पहली बार पहुंचे विधानसभा
साल 2017 में भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और मेरठ दक्षिण सीट से उम्मीदवार बनाया। इस बार उन्होंने जीत दर्ज करते हुए पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
उनकी जीत को पश्चिमी यूपी में भाजपा के मजबूत संगठन और युवा नेतृत्व के उभरने के रूप में देखा गया। विधायक बनने के बाद उन्होंने क्षेत्रीय विकास, बिजली व्यवस्था और जनसंपर्क पर खास ध्यान दिया।
इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की। लगातार दूसरी जीत ने भाजपा में उनकी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत कर दिया।
योगी सरकार में बढ़ा सियासी कद
2022 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद Yogi Adityanath सरकार में उन्हें ऊर्जा राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं।
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अब 2026 में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें प्रमोट करते हुए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी है। इसे पश्चिमी यूपी में उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में मजबूत पकड़, कार्यकर्ताओं से संवाद और लगातार सक्रियता की वजह से ही वे भाजपा नेतृत्व का भरोसा जीतने में सफल रहे हैं।
शिक्षा और सादगी बनी पहचान
Somendra Tomar मूल रूप से बागपत जिले के खैला गांव के निवासी हैं, जबकि वर्तमान में उनका निवास मेरठ के शास्त्रीनगर क्षेत्र में है। राजनीति के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में रहती है।
फिजिक्स में पीएचडी करने वाले Somendra Tomar को पढ़े-लिखे और शांत स्वभाव वाले नेताओं में गिना जाता है। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की है, जो संगठन और कार्यकर्ताओं दोनों के साथ संतुलन बनाकर चलते हैं।
दो दशक का सफर बना नई पहचान
करीब 20 साल पहले विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुई राजनीति आज उत्तर प्रदेश की सत्ता के गलियारों तक पहुंच चुकी है। Dr Tomar Political Journey इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में धैर्य, संगठन और लगातार मेहनत कितनी अहम होती है।
खैला गांव से निकले एक छात्र नेता का योगी सरकार में मंत्री पद तक पहुंचना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कहानी बन चुका है। आने वाले समय में भाजपा संगठन और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और भी अहम मानी जा रही है।
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