IAS Ramesh Ranjan: उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों एक ऐसे विवाद से हिल गई है, जिसने सत्ता, सिस्टम और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिरोजाबाद के पूर्व जिलाधिकारी Ramesh Ranjan और तहसीलदार Rakhi Sharma के बीच उभरे कथित ‘आईफोन रिश्वत कांड’ ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच IAS Ramesh Ranjan अब यूपी की सबसे चर्चित प्रशासनिक कहानी बन चुकी है।
योगी सरकार द्वारा 38 आईएएस अधिकारियों के तबादलों की सूची जारी किए जाने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी मामले की हो रही है। सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए Ramesh Ranjan को फिरोजाबाद के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व परिषद भेज दिया है। इससे पहले शिकायत करने वाली तहसीलदार को भी फील्ड से हटाया जा चुका था।
कैसे शुरू हुआ IAS Ramesh Ranjan?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब Rakhi Sharma ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनसे करीब 1.75 लाख रुपये का iPhone 15 Pro Max और एक Apple Watch रिश्वत के रूप में मांगा गया।
राखी शर्मा का आरोप था कि यह मांग सीधे तौर पर नहीं बल्कि ओएसडी के माध्यम से रखी गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई सामान्य ‘गिफ्ट’ नहीं था, बल्कि प्रशासनिक दबाव के तहत मांगा गया सामान था। इसी आरोप के बाद IAS Ramesh Ranjan ने तूल पकड़ लिया और मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।
Read More: लखनऊ में राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा की हुंकार, सामाजिक समानता पर जोर, विरोधियों को सख्त संदेश
देर रात खुला शोरूम, खरीदारी का दावा
तहसीलदार ने अपने आरोपों में एक और चौंकाने वाला दावा किया। उनके मुताबिक 4 नवंबर 2025 की रात आगरा के एक शोरूम को खासतौर पर देर रात तक खुलवाया गया ताकि यह महंगे गैजेट्स खरीदे जा सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि खरीदारी का बिल उनके पास मौजूद है और फोन में अभी भी जिलाधिकारी से जुड़ा सिम कार्ड इस्तेमाल हो रहा है। इस बयान के बाद IAS Ramesh Ranjan ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
मानसिक उत्पीड़न और सैलरी रोकने के आरोप
यह विवाद केवल कथित रिश्वत तक सीमित नहीं रहा। Rakhi Sharma ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने एक विवादित जांच रिपोर्ट को नियमों के खिलाफ पेश करने से इनकार किया, तो उनके साथ मानसिक उत्पीड़न शुरू हो गया।
ALSO READ: 22 मई से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी
उन्होंने दावा किया कि उनकी आठ महीने की सैलरी रोक दी गई, छुट्टियां नहीं दी गईं और लगातार दबाव बनाया गया। इन आरोपों ने IAS Ramesh Ranjan को एक प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़ाकर उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दे में बदल दिया।
जिलाधिकारी का जवाब: आरोपों को बताया झूठा
दूसरी ओर, Ramesh Ranjan ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि यह आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि तहसीलदार पर विभागीय कार्रवाई की संभावना थी, जिसके चलते उन्होंने इस तरह के आरोप लगाए। उनके अनुसार, यह मामला व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का है, जिसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया है। फिर भी, IAS Ramesh Ranjan ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि शासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सरकार की कार्रवाई और तबादले का फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया। Rakhi Sharma को पहले ही राजस्व परिषद से संबद्ध किया जा चुका था, जबकि अब Ramesh Ranjan को भी उसी दिशा में भेज दिया गया है।
READ MORE: Ghaziabad Fire Incident से मचा हड़कंप, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं 20 से ज्यादा दमकल गाड़ियां
उनकी जगह Santosh Kumar Sharma को फिरोजाबाद का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। यह कदम यह दिखाता है कि सरकार इस विवाद को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।
प्रशासनिक तंत्र में ‘पावर स्ट्रगल’ की झलक
विशेषज्ञों का मानना है कि IAS Ramesh Ranjan केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र के भीतर चल रहे पावर स्ट्रगल की भी झलक देता है।
यूपी की ब्यूरोक्रेसी में इस तरह के टकराव पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला सार्वजनिक हो जाने के कारण इसका प्रभाव ज्यादा व्यापक हो गया है। यह विवाद यह भी दिखाता है कि जब प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के बीच टकराव होता है, तो उसका असर पूरे सिस्टम पर पड़ता है।
READ MORE: हरदोई में PM मोदी के स्वागत की भव्य तैयारी, 700 कूलर और 30 LED स्क्रीन से सजेगा मेगा मंच
जांच जारी, आगे क्या?
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त स्तर पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक IAS Ramesh Ranjan चर्चा का विषय बनी रहेगी। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह मामला केवल एक ट्रांसफर या आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है।
IAS Ramesh Ranjan ने यह दिखा दिया है कि छोटे दिखने वाले आरोप भी किस तरह बड़े प्रशासनिक संकट का रूप ले सकते हैं। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी है, जो तय करेगा कि इस विवाद का असली सच क्या है।
Follow Us: | TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram | YOUTUBE
