Live-in Relationship Rights: लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम फैसले में Allahabad High Court ने ट्रांसजेंडर और समलैंगिक जोड़ों को कानूनी सुरक्षा दी है। अदालत ने साफ कहा कि दो वयस्क अगर अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं, तो परिवार या समाज को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है।
यह मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र से संबंधित है। यहाँ दो वयस्कों ने आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का निर्णय लिया था। हालांकि, उनके इस फैसले से परिवार के सदस्य नाराज थे और उन्हें लगातार धमकियां दे रहे थे। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि स्थानीय पुलिस से गुहार लगाने के बावजूद उन्हें कोई ठोस सुरक्षा नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
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पुलिस से नहीं मिली मदद
याचिकाकर्ताओं ने पहले स्थानीय पुलिस से सुरक्षा मांगी। लेकिन उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं मिली। इसके बाद दोनों ने अदालत की शरण ली। उन्होंने अपनी जान और संपत्ति को खतरा बताया।
अदालत में पेश याचिका में कहा गया कि वे अपनी इच्छा से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। किसी के दबाव में नहीं हैं। इसके बावजूद परिवार लगातार हस्तक्षेप कर रहा है।
Allahabad High Court ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Vivek Kumar Singh ने की। उन्होंने कहा कि हर वयस्क को अपने जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार संविधान से मिला है।यह स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत संरक्षित है।
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अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के निजी जीवन में दखल देना गलत है। परिवार या समाज किसी की पसंद पर रोक नहीं लगा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
Allahabad High Court ने अपने आदेश में Navtej Singh Johar v. Union of India फैसले का भी जिक्र किया। इस फैसले में समलैंगिक संबंधों को कानूनी मान्यता दी गई थी।
अदालत ने कहा कि दो वयस्कों के बीच सहमति से बना संबंध कानून का उल्लंघन नहीं है। ऐसे रिश्ते संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत सुरक्षित हैं।
साथ रहने का अधिकार
Allahabad High Court ने यह भी कहा कि शादी जरूरी नहीं है। अगर दो वयस्क साथ रहना चाहते हैं, तो यह उनका निजी फैसला है। इस फैसले में Akanksha v. State of Uttar Pradesh का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि दो वयस्कों का बिना विवाह के भी साथ रहना उनके मौलिक अधिकारों के दायरे में आता है।
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पुलिस को दिए निर्देश
Allahabad High Court ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं। अगर याचिकाकर्ताओं को किसी तरह की परेशानी होती है, तो उन्हें तुरंत सुरक्षा दी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस बिना वजह कोई कार्रवाई न करे। अगर उम्र से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं, तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

यह भी स्पष्ट किया कि यदि उम्र को लेकर कोई संशय हो, तो पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत उम्र सत्यापन (Age Verification) परीक्षण कर सकती है।
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परिवार को चेतावनी
Live-in Relationship Rights में अदालत ने साफ कहा कि परिवार को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। वयस्क अपने फैसले खुद ले सकते हैं। किसी को भी उनकी निजी जिंदगी में बाधा डालने की अनुमति नहीं है।
Live-in Relationship Rights आदेश व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मजबूत करता है। साथ ही यह भी बताता है कि कानून सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
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सामाजिक संदेश
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महत्वपूर्ण है। इससे ट्रांसजेंडर और समलैंगिक समुदाय को राहत मिलेगी। उन्हें अब कानूनी संरक्षण मिलेगा।
यह फैसला समाज में जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा। लोगों को यह समझने का मौका मिलेगा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
Allahabad High Court का यह Live-in Relationship Rights निर्णय स्पष्ट करता है कि वयस्कों को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार है। आने वाले समय में ऐसे फैसले सामाजिक बदलाव की दिशा तय कर सकते हैं।
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