Merchant Navy Tragedy: Family members mourn the death of Merchant Navy sailor Shiv Anand Chaurasia from Deoria after a deadly attack on an oil tanker.
Merchant Navy Tragedy ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक परिवार की खुशियां छीन ली हैं। परिवार की उम्मीदों का केंद्र रहे शिव आनंद चौरसिया की विदेशी समुद्री जहाज पर तैनाती के दौरान हुई मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। जिस बेटे की नौकरी लगने के बाद घर में आर्थिक स्थिरता और बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी थी, वही अब हमेशा के लिए परिवार से दूर हो गया।
देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी शिव आनंद चौरसिया मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे और सिंगापुर से संचालित एक ऑयल टैंकर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुए एक हमले के दौरान उनकी जान चली गई। घटना की सूचना जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
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6 लाख रुपये का कर्ज लेकर बनाया था समुद्री पासपोर्ट
शिव आनंद के पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि बेटे को मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के लिए परिवार ने काफी संघर्ष किया था। करीब नौ महीने पहले उसे नौकरी मिली थी और आवश्यक दस्तावेजों तथा सीडीसी (Continuous Discharge Certificate) बनवाने के लिए परिवार ने लगभग 6 लाख रुपये का कर्ज लिया था।
परिवार को उम्मीद थी कि शिव आनंद की नौकरी से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और घर की जिम्मेदारियां आसानी से पूरी हो सकेंगी। लेकिन Merchant Navy Tragedy ने परिवार के सारे सपनों को एक झटके में तोड़ दिया।
पहली समुद्री यात्रा ही बन गई अंतिम सफर
परिजनों के अनुसार, शिव आनंद पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय ऑयल शिप पर नियुक्त हुए थे। सिंगापुर से जॉइनिंग के बाद वह बेहद उत्साहित थे और परिवार को लगातार अपने अनुभव साझा कर रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि उनकी पहली समुद्री यात्रा ही उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी।
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गांव के लोगों का कहना है कि शिव आनंद मेहनती और जिम्मेदार स्वभाव के थे। उन्होंने अपने दम पर परिवार को बेहतर जीवन देने का सपना देखा था। उनकी असामयिक मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
परिवार की उम्मीदों का सहारा था शिव आनंद
Merchant Navy Tragedy का सबसे बड़ा असर उस परिवार पर पड़ा है जिसकी आर्थिक जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह शिव आनंद के कंधों पर थी। पिता खेती और पशुपालन से जुड़े हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार की आय सीमित थी और शिव आनंद की नौकरी लगने के बाद ही आर्थिक राहत मिलने लगी थी।
शिव आनंद अपने माता-पिता के अलावा पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे। उनके पांच वर्षीय बेटे राजवीर और दो वर्षीय बेटी वानिका को अभी शायद यह भी समझ नहीं है कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे।
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पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल
घर में मातम का माहौल है। शिव आनंद की पत्नी सुशीला बार-बार बेहोश हो रही हैं। मां कलावती देवी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार लगातार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि शिव आनंद बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। यही वजह है कि उनकी मौत की खबर सुनकर आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग शोक व्यक्त करने पहुंचे।
मर्चेंट नेवी में बढ़ रही चुनौतियों पर उठे सवाल
इस Merchant Navy Tragedy के बाद समुद्री क्षेत्र में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
मर्चेंट नेवी में कार्यरत हजारों भारतीय युवा विदेशों में जहाजों पर काम करते हैं। वे अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए कठिन परिस्थितियों में सेवाएं देते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों और संबंधित एजेंसियों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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गांव में शोक, लोगों ने दी श्रद्धांजलि
सुरौली गांव में हर व्यक्ति शिव आनंद को याद कर रहा है। स्थानीय लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिवार को हर संभव सहयोग का भरोसा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिव आनंद ने कम समय में अपनी मेहनत और व्यवहार से सभी का दिल जीत लिया था। उनकी मौत ने केवल एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है। लोग इसे एक अपूरणीय क्षति मान रहे हैं।
परिवार को न्याय और सहायता की उम्मीद
परिजन चाहते हैं कि सरकार इस मामले में आवश्यक कदम उठाए और परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। साथ ही घटना की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Merchant Navy Tragedy के रूप में सामने आई यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिक कितनी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। शिव आनंद का सपना अपने परिवार को बेहतर जीवन देना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज उनका परिवार केवल उनकी यादों के सहारे जीवन आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
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