Shiksha Mitra Salary Hike: उत्तर प्रदेश की सरकार ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए उनके मासिक मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का फैसला किया है। CM Yogi आदित्यनाथ ने विधानसभा में घोषणा की कि अब शिक्षा मित्रों को 18 हजार रुपये और अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे इन कर्मियों के लिए इसे बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
महंगाई को देखते हुए लिया गया निर्णय
CM Yogi ने सदन में कहा कि सरकार ने यह फैसला महंगाई और बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद शिक्षा मित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये किया गया था। उससे पहले उन्हें बहुत कम राशि मिलती थी। अब एक साथ 8 हजार रुपये की वृद्धि कर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
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सरकार ने यह भी घोषणा की कि शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सके।
डेढ़ लाख से अधिक कर्मियों को राहत
राज्य में करीब 1.42 लाख शिक्षा मित्र और 28 हजार से अधिक अनुदेशक कार्यरत हैं। Shiksha Mitra Salary Hike फैसले से लगभग डेढ़ लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा मित्र संविदा के आधार पर कार्य करते हैं और उन्हें साल में 11 महीने का मानदेय मिलता है। ऐसे में यह बढ़ोतरी उनके लिए आर्थिक संबल साबित होगी।
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राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार का Shiksha Mitra Salary Hike निर्णय महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह कर्मियों के हित में उठाया गया है।
नौ साल बाद बढ़ा मानदेय
शिक्षा मित्रों के मानदेय में पिछली बड़ी बढ़ोतरी 2017 में हुई थी। उससे पहले उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। 2001 में नियुक्ति के समय उन्हें मात्र 1500 रुपये मिलते थे, जो बाद में बढ़कर 2250 और फिर 2400 रुपये हुआ। अलग-अलग सरकारों के दौरान यह राशि धीरे-धीरे बढ़कर 3000 रुपये तक पहुंची।

2014 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा दिया गया और वेतन में बड़ी वृद्धि हुई। लेकिन 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनका समायोजन रद्द कर दिया गया और वे पुनः शिक्षा मित्र के पद पर लौट आए। उस समय मानदेय 3500 रुपये निर्धारित किया गया था। बाद में राज्य सरकार ने इसे 10 हजार रुपये किया, जो अब तक लागू था।
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स्थानांतरण और अन्य सुविधाओं पर भी संकेत
सरकार ने शिक्षा मित्रों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करने का भी संकेत दिया है। इससे लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्य कर रहे कर्मियों को राहत मिल सकती है। स्वास्थ्य बीमा सुविधा और वेतन वृद्धि को मिलाकर देखा जाए तो सरकार ने इस वर्ग के लिए बहुआयामी कदम उठाए हैं।
उच्च शिक्षा और नवाचार पर भी जोर
CM Yogi ने विधानसभा में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों की ओर से 5000 से अधिक पेटेंट फाइल किए गए हैं, जिनमें 300 से अधिक को मंजूरी मिल चुकी है। यह राज्य में शोध और नवाचार की बढ़ती संस्कृति को दर्शाता है।
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उन्होंने बताया कि पहले निजी विश्वविद्यालयों को स्वीकृति देने में पारदर्शिता की कमी थी और कई मंडलों में एक भी विश्वविद्यालय नहीं था। अब सरकार ने नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की दिशा में काम तेज किया है। मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय की स्थापना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में संतुलित विकास के लिए नए संस्थान खोले जा रहे हैं।
शिक्षा में प्रतिस्पर्धा और विस्तार की नीति
सरकार निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों को भी प्रोत्साहित कर रही है ताकि शिक्षा के क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्देश्य केवल संस्थान खोलना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
Shiksha Mitra Salary Hike और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का फैसला राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यह कदम जहां एक ओर लाखों कर्मियों को आर्थिक राहत देगा, वहीं शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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