Kasganj Police Custody Case: Court orders FIR against Sahawar SHO Govind Ballabh over illegal detention allegations
Kasganj Police Custody Case: कासगंज जिले से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने सहावर थाना प्रभारी गोविंद बल्लभ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश अवैध हिरासत, अभिलेखों में कथित हेरफेर और गलत सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने जैसे गंभीर आरोपों के आधार पर दिया गया है।
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, इसलिए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
दो दिन से अधिक थाने में रखा गया आरोपी
Kasganj Police Custody Case थाना सहावर में दर्ज अपराध संख्या 141/2026 से जुड़ा हुआ है। न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार संजय यादव नामक व्यक्ति को 30 अप्रैल 2026 तक दो दिनों से अधिक समय तक थाने में रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उसकी हिरासत को लेकर कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और न ही उसकी उपस्थिति का संतोषजनक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि यदि व्यक्ति कानूनी रूप से गिरफ्तार नहीं था, तो उसे इतने लंबे समय तक थाने में रखने का आधार क्या था। इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर पुलिस पक्ष की ओर से नहीं दिया जा सका।
CCTV फुटेज ने खोली कई परतें
Kasganj Police Custody मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक कासगंज से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि संजय यादव लगातार थाने के परिसर में मौजूद था।
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रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि हिरासत के दौरान आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर विभागीय जांच भी प्रारंभ कर दी गई है। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग ने पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य की भूमिका निभाई और अदालत के निर्णय को प्रभावित किया।
जीडी एंट्री पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान Kasganj Police Custody Case में 30 अप्रैल 2026 की जनरल डायरी (जीडी) एंट्री संख्या 42 न्यायालय के विशेष ध्यान का केंद्र बनी। इस प्रविष्टि में दावा किया गया था कि संजय यादव थाने के बाहर हंगामा कर रहा था।
हालांकि जब सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई तो उसमें संजय यादव उसी समय थाने के भीतर मौजूद दिखाई दिया। इस विरोधाभास ने पुलिस रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में भी यह स्वीकार किया गया कि संबंधित जीडी प्रविष्टि तथ्यात्मक रूप से गलत और मनगढ़ंत प्रतीत होती है।
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किन धाराओं में FIR के आदेश?
उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद Kasganj Police Custody Case में सीजेएम न्यायालय ने थाना प्रभारी गोविंद बल्लभ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127(2), 336, 337 और 344 के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के शासन में किसी भी सरकारी अधिकारी को नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। यदि किसी नागरिक की स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है और सरकारी अभिलेखों में गलत तथ्य दर्ज किए गए हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
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पूरे विभाग में खलबली
पुलिस विभाग के लिए भी बड़ा संदेश यह मामला केवल एक व्यक्ति की कथित अवैध हिरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है। अदालत का आदेश यह संकेत देता है कि तकनीकी साक्ष्य, विशेषकर सीसीटीवी फुटेज, अब न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल न्यायालय ने आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक कासगंज को भेजकर एफआईआर दर्ज कराने और आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में इस Kasganj Police Custody Case की जांच और उससे जुड़े निष्कर्ष पुलिस प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकते हैं।
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