CJP Protest Delhi Police: Delhi Police personnel deployed behind barricades during the CJP Protest near Jantar Mantar in New Delhi on July 20, 2026.
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026: CJP Protest Delhi Police अब केवल दिल्ली की सड़कों, बैरिकेड और पुलिस कार्रवाई तक सीमित मामला नहीं रह गया है। Delhi Police ने दावा किया है कि प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं फैलाने वाले 400 से अधिक पाकिस्तान-संचालित सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन अकाउंट्स से फर्जी वीडियो, एडिटेड तस्वीरें और गलत सूचनाएं किए जा रहे थे।
प्रदर्शन के साथ खुला डिजिटल मोर्चा
CJP Protest को लेकर सामने आया यह खुलासा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि Social Media Handles के माध्यम से किसी वास्तविक घटना की तस्वीर कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बदली जा सकती है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि चिन्हित अकाउंट्स प्रदर्शन से संबंधित पुरानी तस्वीरों,पोस्हुटोंए वीडियो और अपुष्ट संदेशों को नए घटनाक्रम से जोड़कर वायरल करने का प्रयास कर रहे थे।
AI कंटेंट से भ्रम फैलाने का आरोप
जांच के दौरान CJP Protest से संबंधित कई पोस्ट में AI Deepfake के इस्तेमाल का संदेह सामने आने का दावा किया गया है। सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, कुछ अकाउंट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए वीडियो, डीपफेक क्लिप, एडिटेड फोटो और मनगढ़ंत पोस्ट शेयर कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि ऐसे कंटेंट का उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना और तनावपूर्ण माहौल को प्रभावित करना था।
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400 से अधिक अकाउंट ब्लॉक
CJP Protest की डिजिटल निगरानी के दौरान Pakistan-Linked Accounts की पहचान दिल्ली पुलिस ने अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से किए जाने की बात कही है। पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक 400 से अधिक ऐसे हैंडल चिन्हित कर ब्लॉक किए जा चुके हैं। हालांकि प्रत्येक अकाउंट की गतिविधि और उसके संचालक से जुड़ी विस्तृत जांच अभी जारी है।
ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा कनेक्शन
दिल्ली पुलिस का दावा है कि CJP Protest से संबंधित गलत जानकारी साझा करने वाले कुछ अकाउंट्स Operation Sindoor के दौरान भी सक्रिय रहे थे। आरोप है कि उस समय भी इन हैंडल्स से वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों को बदलकर पेश किया गया और तस्वीरों तथा वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था।
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20 जुलाई को हुआ था संसद चलो मार्च
बीस जुलाई 2026 को हुए CJP Protest के तहत प्रदर्शनकारियों ने Sansad Chalo March का आह्वान किया था। बड़ी संख्या में युवा और छात्र जंतर-मंतर तथा मध्य दिल्ली के दूसरे क्षेत्रों में पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जवाबदेही तय करने और तत्काल सुधार लागू करने की मांग कर रहे थे।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव
दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP Protest के दौरान कुछ लोगों ने Police Barricades पार करने का प्रयास किया। पुलिस ने आरोप लगाया कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया और हिंसा भड़काई। हालात नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग किया गया। ये विवरण पुलिस की FIR और आधिकारिक दावों पर आधारित हैं।
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15 FIR दर्ज होने का दावा
दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, CJP Protest से जुड़ी घटनाओं में अब तक 15 FIRs दर्ज की गई हैं। ये मामले हिंसा, पुलिसकर्मियों पर हमले, सरकारी काम में बाधा, गैरकानूनी जमावड़ा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों से जुड़े बताए गए हैं। कुछ मामलों में भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराएं भी लगाई गई हैं।
घायलों की संख्या पर पुलिस का बयान
पुलिस सूत्रों ने CJP Protest में लगभग 130 पुलिसकर्मियों और 65 Students Injured होने की जानकारी दी है। एक अन्य रिपोर्ट में 129 पुलिसकर्मियों और लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात कही गई थी। अलग-अलग समय पर सामने आए इन आंकड़ों में अंतर है, इसलिए अंतिम संख्या आधिकारिक चिकित्सा और जांच रिकॉर्ड के बाद ही स्पष्ट होगी।
जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था
प्रदर्शन के दौरान CJP Protest स्थल और आसपास के इलाकों में Security Deployment बढ़ाया गया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, लगभग 10,000 लोगों की मौजूदगी के बीच कानून-व्यवस्था संभालने के लिए करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। जंतर-मंतर और संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग भी की गई थी।
फेशियल रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल
पुलिस का कहना है कि CJP Protest में शामिल संदिग्ध या पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान के लिए Facial Recognition System कैमरों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले 2,000 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
CJP ने भी पुलिस पर लगाए आरोप
दूसरी ओर, CJP Protest के प्रतिनिधियों ने Police Action को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और वॉलंटियर्स के साथ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। CJP प्रतिनिधियों ने उपलब्ध वीडियो और तस्वीरों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।
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महिलाओं से बदसलूकी का आरोप
CJP प्रतिनिधियों का कहना है कि CJP Protest के दौरान Excessive Force का इस्तेमाल करते हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को घसीटा गया और महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी हुई। दिल्ली पुलिस ने हिंसा और सुरक्षा उल्लंघन को कार्रवाई की वजह बताया है। दोनों पक्षों के आरोप जांच का विषय हैं और उन्हें अंतिम या प्रमाणित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फेक न्यूज से बड़ा खतरा
पूरे घटनाक्रम में CJP Protest का सबसे महत्वपूर्ण पहलू Fake News Alert बनकर उभरा है। किसी प्रदर्शन के दौरान एडिटेड वीडियो या पुरानी तस्वीर को नई घटना बताकर साझा करने से न केवल जनता भ्रमित हो सकती है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए वीडियो का स्रोत, तारीख, स्थान और मूल बयान जांचना जरूरी है।
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शेयर करने से पहले करें सत्यापन
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि CJP Protest से जुड़ी किसी पोस्ट को शेयर करने से पहले Fact Check जरूर करें। अनजान अकाउंट, बिना तारीख वाले वीडियो, अधूरी क्लिप और सनसनीखेज कैप्शन वाली पोस्ट पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। पुलिस अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से वायरल दावों की जांच और खंडन जारी रखने की बात कह रही है।
जांच पूरी होने तक दावों को तथ्य न मानें
फिलहाल CJP Protest को लेकर Official Investigation जारी है। पाकिस्तान-संचालित अकाउंट्स, हिंसा में शामिल लोगों, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आरोपों से संबंधित अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। पाठकों को पुलिस और CJP के बयानों को संबंधित पक्षों के आधिकारिक दावों के रूप में देखना चाहिए, न कि न्यायिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में।
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