Sonam Wangchuk Hunger Strike at Jantar Mantar demanding education reforms and accountability
Sonam Wangchuk Hunger Strike एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
यह आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले चल रहा है, जिसकी शुरुआत 20 जून को हुई थी। संगठन का आरोप है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन से जुड़े और तब से लगातार भूख हड़ताल पर हैं।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग
सोनम वांगचुक का कहना है कि केवल किसी एक अधिकारी के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था में जवाबदेही तय करना आवश्यक है। उनके अनुसार यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं होगी, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था किसी भी देश की नींव होती है। यदि परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो इसका असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर क्षेत्रों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
वांगचुक का मानना है कि यदि योग्य उम्मीदवारों की जगह अनुचित तरीके से चयन होने लगे, तो इसका असर समाज के हर वर्ग पर दिखाई देगा।
सरकार से बातचीत और सुधार की अपील
भूख हड़ताल के दौरान वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और संस्थागत सुधारों के माध्यम से ही संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे तो समाधान निकाला जा सकता है। उनका मानना है कि शिक्षा सुधार केवल विरोध का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील
Sonam Wangchuk Hunger Strike के दौरान उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। उनका कहना है कि शिक्षा किसी एक दल का विषय नहीं बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज के विभिन्न वर्ग, छात्र, अभिभावक, शिक्षाविद और जनप्रतिनिधि एक मंच पर आकर शिक्षा सुधार की मांग करेंगे तो इस दिशा में सकारात्मक बदलाव संभव होगा।
संसद में शिक्षा सुधार पर चर्चा की मांग
सोनम वांगचुक ने सुझाव दिया कि संसद के आगामी मानसून सत्र में शिक्षा प्रणाली पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रियाओं और मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्रों को भी चर्चा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि केवल तात्कालिक फैसलों से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करनी होगी ताकि भविष्य में परीक्षा संबंधी विवादों की पुनरावृत्ति न हो।
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परीक्षा प्रणाली पर उठते रहे हैं सवाल
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता, पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल उठते रहे हैं। इन घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के बीच चिंता पैदा की है। कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच भी हुई है।
इसी पृष्ठभूमि में Sonam Wangchuk Hunger Strike को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाना है।
आंदोलन का आगे क्या होगा?
फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन भी खत्म नहीं हुआ है। आंदोलन से जुड़े लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहरा रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या आने वाले दिनों में आंदोलनकारियों तथा सरकार के बीच किसी स्तर पर संवाद शुरू होता है। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर नई पहल देखने को मिल सकती है, जो लाखों छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
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