Bihar Flood 2026 showing overflowing Kosi River and flood-affected villages in North Bihar
Bihar Flood 2026: देश के कई हिस्सों में इस साल सामान्य से कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति देखने को मिल रही है, लेकिन Bihar Flood 2026 ने एक बार फिर उत्तर बिहार के लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल के तराई और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कोसी, गंडक, बागमती, महानंदा और कमला बलान जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि कुछ स्थानों पर वे चेतावनी स्तर पार कर चुकी हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा है और तटबंधों की निगरानी तेज कर दी गई है।
उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। इस बार भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
Bihar Flood 2026: पूरे देश में कम बारिश के बावजूद बिहार में बाढ़ क्यों?
सवाल यह है कि जब देश के कई राज्यों में मानसून कमजोर है, तो बिहार में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ रहा है? इसकी सबसे बड़ी वजह नेपाल है। उत्तर बिहार की अधिकांश प्रमुख नदियां नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से निकलती हैं। वहां भारी वर्षा होने पर बड़ी मात्रा में पानी इन नदियों के जरिए बिहार में प्रवेश करता है।
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नेपाल में बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी छोड़े जाने से कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान और महानंदा जैसी नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। यही कारण है कि बिहार में स्थानीय बारिश कम होने के बावजूद बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है।
उत्तर बिहार के करोड़ों लोगों पर मंडरा रहा खतरा
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार का लगभग 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र किसी न किसी रूप में बाढ़ प्रभावित माना जाता है। उत्तर बिहार की लगभग 76 प्रतिशत आबादी हर वर्ष बाढ़ के खतरे के बीच जीवन बिताती है।
सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, भागलपुर, बेगूसराय और खगड़िया सहित कई जिले हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो करोड़ों लोगों का जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
Bihar Flood 2026: किन जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर?
जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार कई नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।
- सुपौल में कोसी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
- खगड़िया में कोसी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
- मुजफ्फरपुर में बागमती नदी खतरे के स्तर पर पहुंच गई है।
- पश्चिम चंपारण और गोपालगंज में गंडक नदी लाल निशान के ऊपर दर्ज की गई है।
इसके अलावा कटिहार में महानंदा, सीतामढ़ी में बागमती, वैशाली में गंडक, मधुबनी में कमला बलान और पूर्णिया में महानंदा चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही हैं।
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नेपाल की बारिश और गाद बनी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञ बताते हैं कि उत्तर बिहार की नदियों में केवल पानी ही नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में गाद भी आती है। यही गाद नदी की धारा को उथला बना देती है, जिससे पानी तेजी से फैलता है और लंबे समय तक जलभराव बना रहता है।
कोसी नदी को वर्षों से बिहार का शोक कहा जाता है क्योंकि इसने समय-समय पर अपना मार्ग बदलकर भारी तबाही मचाई है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा होने पर इसका प्रभाव सबसे पहले बिहार के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है।
बाढ़ से बचाव पर हजारों करोड़ खर्च, फिर भी चुनौती बरकरार
राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में तटबंधों की मरम्मत, नदी प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षात्मक कार्यों पर लगभग 4,788 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसके बावजूद हर साल तटबंधों पर दबाव बढ़ता है और कई स्थानों पर कटाव तथा जलभराव की समस्या सामने आती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल तटबंध बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नदी प्रबंधन, ड्रेजिंग और नेपाल के साथ समन्वित जल प्रबंधन की भी आवश्यकता है।
बिहार ने पहले भी झेली है भीषण तबाही
बिहार का इतिहास कई विनाशकारी बाढ़ों का गवाह रहा है। वर्ष 1978, 1987, 2004, 2007 और 2008 की बाढ़ को सबसे भयावह माना जाता है।
विशेष रूप से 2008 में नेपाल के कुशाहा क्षेत्र में कोसी तटबंध टूटने के बाद लाखों लोग बेघर हो गए थे। हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति और लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई थीं। 2004 की बाढ़ में भी सैकड़ों लोगों की जान गई और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
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प्रशासन अलर्ट पर, आगे क्या?
मौसम विभाग ने नेपाल और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए बिहार सरकार ने संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है, जबकि तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है।
यदि नेपाल के कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो उत्तर बिहार के निचले इलाकों में Bihar Flood 2026 की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए समय रहते राहत और बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
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